मनरेगा: केंद्र का हिमाचल को बड़ा झटका, मनरेगा के काम हुए पूरी तरह ठप; लोगों की आजीविका पर पड़ रहा असर
Himachal News: हिमाचल प्रदेश में मनरेगा योजना के तहत ग्रामीण रोजगार पर संकट मंडरा रहा है। केंद्र सरकार ने कार्यदिवसों में कटौती और बजट रोक दिया है। इससे कई पंचायतों में काम रुक गया है। नए प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो रहे, और पुराने कार्यों का भुगतान भी अटका है।
ग्रामीण विकास पर असर
मनरेगा योजना हिमाचल में जल संरक्षण, वनीकरण, बाढ़ नियंत्रण और ग्रामीण संपर्क जैसे कार्यों को बढ़ावा देती है। यह ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने और प्रवास रोकने में भी मदद करती है। लेकिन बजट की कमी ने इन कार्यों को ठप कर दिया है। ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने इसे लोगों के साथ धोखा बताया।
कार्यदिवस और बजट में भारी कटौती
पिछले वित्त वर्ष में हिमाचल को 397 लाख कार्यदिवस मिले थे। इस बार 407 लाख कार्यदिवस प्रस्तावित थे, लेकिन केंद्र ने इन्हें घटाकर 250 लाख कर दिया। मनरेगा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5177 कार्य मंजूर हैं, लेकिन नए कार्यों पर खर्च न के बराबर है। कुल 6311 कार्यों पर केवल 70.16 लाख रुपये खर्च हुए हैं।
पंचायतों में काम ठप
राज्य में 15.53 लाख जॉब कार्ड और 28.86 लाख कामगार हैं, लेकिन केवल 9.23 लाख जॉब कार्ड सक्रिय हैं। 3616 ग्राम पंचायतें मनरेगा के तहत काम कर रही हैं, जबकि 26 पंचायतों ने एक भी पैसा खर्च नहीं किया। ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर इसका गहरा असर पड़ रहा है।
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