Aleppo clashes : అలెప్పోలో భీకర ఘర్షణలు, వేలాది మంది నిర్వాసితులు , సిరియా సంక్షోభం

Aleppo clashes : సిరియాలోని అలెప్పో నగరంలో సైన్యం–SDF మధ్య ఘర్షణలు తీవ్రరూపం దాల్చాయి. క్లోజ్డ్ మిలిటరీ జోన్ల...

Vaartha
‘Shot in the head, as if executed’: four days of violence end with hundreds dead in southern Syria

Sectarian divisions prompted the worst unrest in Syria since March as the Druze population of Sweida province suffered massacres and executions

The Guardian
Mientras en #siria los "libertadores" del ISIS, con el apoyo occidental;secuestrando mujeres alawitas y vendiendolas como esclavas (sexuales).
Y todos callados que se jode la alegría de poner a un terrorista a organizar "liberaciones"
Como dije en su momento "pobres sirios"
#syrianews
Meanwhile in #syria the "freedom fighters" aka ISIS, with western support, are kidnapping Alawita women for sex slavery.
And now everybody is quiet. After setting a terrorist to "liberate" the poor Syrian people #freesyriafromISIS

As promised! Here's our new subscriber map of control in #Syria AFTER the fall of #Assad, including territory newly under #Israel and so-called "#IslamicState" (#ISIS/#ISIL). Plus handy timeline of events amid this seismic shift.

More info: https://www.polgeonow.com/2024/12/syria-who-controls-what-2024-rebels-kurds-israel-isil.html

#geography #OSINT #geopolitics #SyriaWar #SyriaNews #MiddleEast #Mediterranean #Russia #maps #mapping #map #cartography #conflictmapping #ArmedConflict #Israel @geography @geopolitics #conflictzones #SyrianCivilWar #Levant

Syria: Map of Control After the Fall of Assad - Dec. 14, 2024 (Subscription)

The fall of Assad has left much (not all) of Syria under rebel control, while both Israel and "ISIS" have entered the fray.

सीरिया सिविल वार के बीच इजरायल का बड़ा एक्शन, 11 मिलियन के फंड को दी मंजूरी; कब्जा की जमीन पर होगा प्रयोग

Seriya Civil War: सीरिया में गृह युद्ध चरम पर है। देश में तख्तापलट हो चुका है और अब तक राष्ट्रपति रहे बशर अल-असद को भागकर रूस जाना पड़ा है। इस बीच इजरायल ने सीरिया से लगते गोलान हाइट्स के एक बड़े इलाके पर नियंत्रण कर लिया है। इसके अलावा गोलान हाइट्स में आबादी का समीकरण भी बदलने की पूरी तैयारी है। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की अध्यक्षता में रविवार को कैबिनेट ने 11 मिलियन डॉलर के एक फंड को मंजूरी दी है। इसके तहत वहां पर कॉलोनी बसाई जाएंगी, उद्योगों को विकसित किया जाएगा और एक स्टूडेंट विलेज भी बनेगा। इसके माध्यम से वहां यहूदियों की आबादी में इजाफा किया जाएगा ताकि संतुलन स्थापित हो सके।

फिलहाल गोलान हाइट्स में यहूदी और ड्रूज की 50-50 फीसदी आबादी है। नेतन्याहू कैबिनेट का कहना है कि यह राशि शिक्षा, नवीकरणनीय ऊर्जा, स्टूडेंट विलेज की स्थापना में खर्च की जाएगी। इसके तहत वहां नए नागरिकों को बसाया जाएगा। इससे आबादी संतुलित होगी। नेतन्याहू ने कैबिनेट मीटिंग के बाद कहा कि गोलान हाइट्स में खुद को ताकतवर बनाना एक तरह से इजरायल को ही मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि इस समय यह बेहद जरूरी है। हम अपने इस एजेंडे पर आगे बढ़ते रहेंगे।

इजरायल का कहना है कि यह प्लान फिलहाल उसके नियंत्रण वाले इलाके के लिए ही है। इजरायल ने 1967 की मशहूर 6 दिनों की जंग में गोलान हाइट्स के इलाके को जीता था। यह जंग उसने सीरिया समेत अरब के कई देशों के खिलाफ अकेले ही लड़ी थी। इसका 1981 में इजरायल ने विलय कर लिया था। ज्यादातर अरब देश इजरायल की ओर से कब्जाए गए इस इलाके को मंजूरी नहीं देते हैं, लेकिन अमेरिका की ओर से 2019 में इसे इजरायली इलाके के तौर पर मंजूरी दे दी थी। अरब देशों ने तो इजरायल के इस नए कदम पर भी तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है।

सऊदी अरब ने इजरायल के इस कदम को सीरिया के खिलाफ साजिश करार दिया है। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इजरायल ने सीरिया में जारी अस्थिरता का फायदा उठाने के लिए यह कदम उठाया है। उसने कहा कि यह इजरायल के कब्जे की कोशिश का एक नया कदम है।

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सीरिया के बाद जॉर्डन पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, किंग अब्दुल्ला की कुर्सी को हो सकता है खतरा; इजरायल की टेंशन बढ़ी

Syria News: सीरिया में विद्रोहियों के हाथों बशर अल-असद शासन के पतन के बाद एक और इस्लामिक देश के अंदर खतरा मंडराने लगा है। इजरायल ने चिंता जताई है कि सीरिया में विद्रोहियों को बढ़त जॉर्डन में भी चरमपंथ को बढ़ावा दे सकती है, जिससे किंग अब्दुल्ला के शासन को खतरा हो सकता है। इन चिंताओं के बीच इजरायली खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने जॉर्डन का दौरा किया है। इजरायल की कैबिनेट में इस बात को लेकर चर्चा हुई है कि सीरियाई संघर्ष जॉर्डन में फैल सकता है, जिसका सीधा असर इजरायल पर पड़ेगा।

इजरायली सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के प्रमुख रोनेन बार और आईडीएफ खुफिया निदेशालय के प्रमुख मेजर-जनरल श्लोमी बिंदर ने हाल ही में जॉर्डन का दौरा किया है। अरब राजनयिकों ने भी इसे लेकर चिंता व्यक्त की है। यरूशलम पोस्ट ने एक अरब राजनयिक के हवाले से कहा है कि मिस्र, जॉर्डन और पड़ोसी देशों के अधिकारी सीरिया पर कड़ी नजर रख रहे हैं।

दूसरे देशों में शुरू हो सकता है आंदोलन

अरब दुनिया में इस बात को लेकर डर बढ़ रहा है कि सीरिया में विद्रोह की सफलता दूसरे देशों में भी इस्लामिक आंदोलनों को बढ़ावा दे सकता है। राजनयिक ने कहा कि ‘सीरियाई विपक्ष की बयानबाजी अब तक मध्यम रही है, लेकिन भविष्य के बारे में कहना मुश्किल होगा।’

सीरियाई विद्रोही क्या कह रहे?

सीरिया में मुख्य विद्रोही समूह हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के प्रमुख अबू मोहम्मद अल जुलानी ने शनिवार को सीरियाई टीवी को दिए गए एक बयान में इजरायल की चिंताओं को लेकर बात की। जुलानी ने कहा कि सीरिया में बशर अल-असद के शासन के बाद सीरिया का किसी नए संघर्ष में उतरने का कोई इरादा नहीं है। जुलानी ने सीरिया में इजरायली हमलों की निंदा की और कहा कि इजरायल के लिए ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, सीरिया में असद शासन के पतन के बाद इजरायल ने करीब 500 हवाई हमले किए हैं।

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इजरायल ढूंढ रहा अपने सबसे खतरनाक जासूस एली कोहेन की कब्र, सीरिया ने सरेआम दी थी फांसी

Israel News: सीरिया में बशर अल-असद शासन के पतन के साथ ही इजरायल ने सीरिया के अंदर एक सीक्रेट कब्र की तलाश शुरू की है। ये कब्र इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के सबसे खतरनाक जासूस एली कोहेन की है। इजरायली मीडिया आउटलेट यरुशलम पोस्ट ने हिजबुल्लाह से जुड़े न्यूज पेपर अल-अखबार के हवाले से ये जानकारी दी है। अल-अखबार ने राजनयिक सूत्रों के हवाले से बताया है कि इजरायल ने जासूस एली कोहेन को दफन किए जाने वाली जगह का पता लगाने के लिए सीरिया के अंदर और विदेश में संपर्क शुरू किया है।

पहले भी हुई थी कोहेन के शव की तलाश

इसके साथ ही इजरायल ने 1982 में लेबनान में सीरियाई सेना के साथ सुल्तान याकूब की लड़ाई के बाद लापता घोषित किए गए IDF सैनिकों के शवों का पता लगाने के लिए भी नए सिरे से प्रयास शुरू किए हैं। फरवरी 2021 में बताया गया था कि कोहेन का शव को इजरायल को सौंपने के लिए रूस, सीरियाई अधिकारियों के साथ सहयोग करके दक्षिणी दमिश्क में यरमौक शरणार्थी शिविर के क्षेत्र की तलाश कर रहा था।

इसके अगले महीने ही कथित तौर पर कोहेन से जुड़ी एक चीज को इजरायल को सौंपा गया था। उस समय की इजरायली मीडिया रिपोर्टों में कहा गया यह वस्तु कोहेन के कपड़ों का दस्तावेज या फिर कोई लेख हो सकता है। हालांकि, तत्कालीन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इन रिपोर्टों का खंडन किया था। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि क्या वास्तव में कोई ऐसी चीज सौंपी गई थी।

कौन थे एली कोहेन?

एली कोहेन इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के एक जासूस थे, जिन्हें सीरिया में मिशन के तहत भेजा गया था। कोहेन का जन्म साल 1924 में मिस्र में एक सीरियाई यहूदी परिवार में हुआ था। उन्होंने सीरियाई व्यापारी के रूप में खुद को पेश करके सीरिया की सेना और सरकार के उच्चतम पदों तक अपनी पैठ बना ली। साल 1961 से 1965 के बीच कोहेन ने सीरिया के अंदर से महत्वपूर्ण खुफिया इजरायल को सौंपी थी।

संदेश भेजते वक्त पकड़े गए कोहेन

कोहेन के मिशन को इजरायल के इतिहास में अब तक के सबसे साहसी खुफिया जानकारी जुटाने वाले अभियानों में से एक के रूप में याद किया जाता है। कोहेन की पकड़ इतनी गहरी हो चुकी थी कि उन्हें रक्षा उप मंत्री बनाने की तैयारी थी। उन्हें गोपनीय सैन्य बीफ्रिंग दी गई। जनवरी 1965 में जब कोहेन इजरायल को खुफिया संदेश भेज रहे थे, उसी समय सीरियन काउंटर-इंटेलीजेंस ने उनके रेडियो सिग्नल की पहचान कर ली और उन्हें पकड़ लिया गया।

खुलेआम दी गई थी फांसी

एक सैन्य मुकदमे के बाद मई 1965 में कोहेन को दमिश्क में खुलेआम फांसी पर लटका दिया गया। सीरिया ने कोहेन के शव को इजराइल में उनके परिवार को लौटाने से इनकार कर दिया। कथित तौर पर उनके शव को कई बार अलग-अलग जगह पर दफनाया गया, ताकि इजराइल उनके अवशेषों को ढूंढ़कर वापस न ले जा सके।

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इजरायली सेना नहीं छोड़ना चाहती सीरिया में कब्जाया हुआ हिस्सा, रक्षा मंत्री काट्ज ने दिया यह बयान

Israel News: बीते रविवार को बशर अल-असद शासन के पतन के बाद जब इजरायली सेना ने अल्फा लाइन को पार करते हुए सीरिया के हिस्से वाले बफर जोन और माउंट हरमोन पर कब्जा कर लिया था। इजरायल ने उस समय इसे अस्थायी उपाय कहा था, लेकिन ऐसा लगता है कि इजरायली सेना सीरिया में लंबे समय तक बने रहने की योजना बना रही है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने सेना को आने वाले सर्दियों के महीने के दौरान सीरियाई हिस्से में माउंट हरमोन की चोटी पर बने रहने के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है।

तुर्की और अमेरिका के विदेश मंत्री मिले

काट्ज ने यह घोषणा ऐसे समय में की है, जब सीरिया में विद्रोही गुटों का समर्थन करने वाले तुर्की और अमेरिका के विदेश मंत्रियों ने मुलाकात की है। इस दौरान सीरिया में असद के पतन के बाद इस्लामिक स्टेट को फिर से उभरने से रोकने को लेकर चर्चा हुई है। इस बीच असद के सत्ता से हटने के बाद पहली जुम्मे की नमाज हुई। दमिश्क की ऐतिहासिस उमय्यद मस्जिद में विद्रोही नेता अबू मोहम्मद अल-जुलानी ने सीरियाई लोगों से जीत की खुशी मनाने के लिए सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है।

सीरिया में 350 से ज्यादा हवाई हमले

इजरायल ने रविवार को सीरियाई विद्रोहियों के हाथों राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से हटाए जाने के कुछ ही घंटो बाद गोलान हाइट्स के बफर जोन पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद से इजरायली सेना ने सीरिया के अंदर सैन्य ठिकानों और हथियार भंडारों पर 350 से ज्यादा हवाई हमले किए हैं। इसमें रासायनिक हथियार भंडार से लेकर हवाई सुरक्षा और नौसेना तक सब कुछ निशाना बनाया गया है।

इजरायल ने खोला नया मोर्चा

इजरायल ने कहा है कि वह ऐसा इसलिए कर रहा है ताकि विनाश के हथियारों को विद्रोहियों के हाथों में पड़ने से रोका जा सके। बफर जोन में सैनिकों को तैनात करने की योजना ऐसे समय में आई है, जब इजरायली सेनाएं महीनों तक हिजबुल्लाह से लड़ने के बाद दक्षिणी लेबनान से वापस लौट रही हैं। वहीं, गाजा में हमास के आतंकवादियों के साथ अभी भी युद्ध जारी है।

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