गऊशाला संकट: डमटाल में बेसहारा पशुओं की दयनीय स्थिति, प्रशासन पर सवाल
Himachal News: गऊशाला संकट ने हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के डमटाल को चर्चा में ला दिया। इंदौरा की गऊशाला में सैकड़ों बेसहारा पशु भूख और बीमारी से जूझ रहे हैं। यह स्थिति पशु कल्याण पर गंभीर सवाल उठाती है।
गऊशाला की बदहाल स्थिति
डमटाल की गऊशाला में पशुओं की हालत दयनीय है। भूख, प्यास और बीमारियों के कारण कई पशु रोजाना मर रहे हैं। पूर्व विधायक रीता धीमान ने इसे “बूचड़खाना” करार दिया। उन्होंने कहा कि गऊशाला में चारा और कर्मचारियों की भारी कमी है। पशुओं को दफनाने के लिए गड्ढे खोदे जा रहे हैं। यह दृश्य स्थानीय लोगों के लिए दुखद है।
प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
रीता धीमान ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दानदाताओं और प्रयास ग्रुप द्वारा चारा भेजा जा रहा है, फिर भी पशु भूख से मर रहे हैं। गऊशाला संकट का कारण चारे का गलत प्रबंधन है। धीमान ने सुझाव दिया कि यदि सरकार गऊशाला नहीं चला सकती, तो इसे बंद कर देना चाहिए।
प्रयास ग्रुप का योगदान
प्रयास ग्रुप संस्था गऊशाला के लिए हर महीने लाखों रुपये खर्च कर रही है। संस्था रोजाना हरा चारा और पोषक आहार भेजती है। इसके बावजूद, गऊशाला की स्थिति नहीं सुधर रही। यह व्यवस्था में खामियों को उजागर करता है। स्थानीय लोग इस लापरवाही से आहत हैं।
एसडीएम का बयान
इंदौरा के एसडीएम सुरिंदर ठाकुर ने कहा कि गऊशाला संकट को गंभीरता से लिया गया है। जल्द ही गऊशाला का निरीक्षण होगा। दो महीने पहले सरकार को एक रिपोर्ट भेजी गई थी, जो विचाराधीन है। यदि खामियां मिलीं, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। अधिक जानकारी के लिए यहां देखें।
यह स्थिति पशु कल्याण के प्रति प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाती है।
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