बांग्लादेशी हिंदुओं के समूह ने भारत से की सख्त एक्शन की मांग, कहा, संयुक्त राष्ट्र शांति सेना की हो तैनाती, वरना विलुप्त हो जाएंगे हिन्दू
Bangladesh News: बांग्लादेश में इस्कॉन संत की गिरफ्तारी और अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर प्रवासी बांग्लादेशी हिंदुओं के एक समूह ने भारत सरकार से बांग्लादेश पर सख्त ऐक्शन की मांग की है। समूह ने अपनी पांच सूत्री मांगों में बांग्लादेश में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध लगाने, संयुक्त राष्ट्र शांति सेना की तैनाती और हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है।
एक रिपोर्ट जारी करते हुए दावा किया गया कि 5 अगस्त से 21 दिसंबर के बीच हिंदू मंदिरों, अनाथालयों और श्मशान घाटों पर हमलों के 51 मामले सामने आए। उन्होंने आशंका जताई कि अगर भारत सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो बांग्लादेश से हिंदू समुदाय विलुप्त हो जाएगी।
बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा की मांग उठाने वाले इस समूह में यूरोप और उत्तरी अमेरिका में बसे बांग्लादेशी मूल के लोग हैं। ये लोग वैश्विक बंगाली हिंदू गठबंधन से जुड़े हुए हैं। समूह ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए बांग्लादेश में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना की तैनाती सहित वैश्विक हस्तक्षेप की मांग की।
समूह ने नई दिल्ली से बांग्लादेश में “अवैध और शत्रुतापूर्ण शासन” पर संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों की मांग करने का आह्वान किया। साथ ही समूह ने “1947 के विभाजन से भूमि के साथ अधूरी जनसंख्या विनिमय को पूरा करने, विस्थापित अल्पसंख्यकों के सुरक्षित पुनर्वास” का आह्वान किया। समूह द्वारा जारी एक बयान में इस प्रस्ताव पर अधिक जानकारी नहीं दी गई।
बांग्लादेश से हिंदुओं को विलुप्त होने से बचाएं भारत
समूह ने कहा कि भारत सरकार को बांग्लादेश में अंतरिम प्रशासन पर “अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हिंदू-बहुल क्षेत्रों में संरक्षित क्षेत्र” बनाने के लिए दबाव डालना चाहिए। समूह के अमेरिका स्थित नेता सितांगशु गुहा ने 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम में भारत की भूमिका की ओर इशारा किया और कहा, “भारत हमारा सबसे अच्छा दोस्त है, यह बांग्लादेश के 20 मिलियन हिंदुओं को बचाने में मदद कर सकता है।” उन्होंने कहा, “भारत क्या करेगा यह नई दिल्ली सरकार पर निर्भर करता है। हम भारत सरकार से हिंदू समुदाय को विलुप्त होने से बचाने में मदद करने का आग्रह करते हैं।