दुनियाभर में थू-थू करवाने के बाद एक्शन में आई बांग्लादेश सरकार, हिंदुओं पर हमला करने वाले गिरफ्तार

Bangladesh Hindu Violence: बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ लगातार हिंसा हो रही है। पांच अगस्त को सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार में हिंदुओं के कई मंदिरों में तोड़फोड़ हुई है और हिंदुओं को जमकर प्रताड़ित किया गया। आखिरकार दुनियाभर में थू-थू करवाने के बाद बांग्लादेश का मोहम्मद यूनुस प्रशासन ऐक्शन लेने पर मजबूर हुआ है।

बांग्लादेशी अधिकारियों ने सुनामगंज जिले में इस महीने की शुरुआत में हिंदू समुदाय के घरों और दुकानों के साथ-साथ एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ के सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। मुख्य सलाहकार कार्यालय की एक प्रेस रिलीज के अनुसार, संदिग्धों – अलीम हुसैन, 19; सुल्तान अहमद राजू, 20; इमरान हुसैन, 31; और शाहजहां हुसैन, 20 को दोराबाजार क्षेत्र में गिरफ्तार किया गया।

दरअसल, तीन दिसंबर को स्थानीय निवासी आकाश दास ने फेसबुक पर एक पोस्ट किया था, जिसके बाद इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया। हालांकि, बाद में दास ने पोस्ट हटा दिया था, लेकिन स्क्रीनशॉट वायरल हो गया था। इसके बाद दास को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इसी मामले में अब गिरफ्तारियां की गई हैं। दास के पोस्ट के बाद गुस्साई भीड़ ने लोकनाथ मंदिर और हिंदू समुदाय पर हमला कर तोड़फोड़ की थी।

पुलिस, जिला प्रशासन और सेना के जवानों के हस्तक्षेप से अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रण में किया। तब से पुलिस ने 12 नामजद व्यक्तियों और 150-170 अज्ञात संदिग्धों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और इसमें शामिल अन्य लोगों को पकड़ने के लिए गहन जांच कर रही है। 5 अगस्त को छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद से हटा दिया गया और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने कथित तौर पर भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों को तनावपूर्ण बना दिया है।

‘भारत से अच्छे संबंध चाहता है बांग्लादेश’

वहीं, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने शनिवार को कहा कि वह भारत सहित सभी देशों के साथ पारस्परिक सम्मान और समानता पर आधारित मजबूत संबंध चाहती है। ‘ढाका ट्रिब्यून’ अखबार की खबर के अनुसार, विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने नरसिंगडी के रायपुरा और बेलाबो उपजिलों में अधिकारियों, पत्रकारों, नेताओं और बुद्धिजीवियों के साथ दो अलग-अलग बैठकों के दौरान ये टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश ने भारत को संदेश भेजा है, जिसमें अच्छे संबंधों की इच्छा जताई गई है, लेकिन यह आपसी हितों पर आधारित होना चाहिए। हुसैन ने कहा कि बांग्लादेश सभी देशों के साथ सम्मान और समानता के आधार पर अच्छे संबंध चाहता है तथा सरकार इस लक्ष्य की ओर काम कर रही है। हुसैन ने अंतरिम सरकार की निष्पक्ष शासन व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया, जिसमें छात्रों समेत जनता की चिंताओं को दूर करना और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुधारों को लागू करना शामिल है।

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मुस्लिम धर्मगुरु ने हिन्दू देवी पार्वती पर की विवादास्पद टिप्पणी, कई हिंदू संगठन भड़के; जानें पूरा मामला

Kerala News: सार्वजनिक सभा के दौरान सुन्नी मुस्लिम धर्मगुरुओं के एक प्रमुख संगठन समस्त केरल जमीयतुल उलमा के सदस्य उमर फैजी मुक्कम ने हिंदू देवी पार्वती पर विवादास्पद टिप्पणी की। इससे बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। फैजी ने उत्तरी भारत की मस्जिदों में हो रहे सर्वेक्षणों का जिक्र करते हुए कहा कि यह कहकर मुद्दे उठाए जा रहे हैं कि वहां शिवलिंग या पार्वती की कोई चीज हुआ करती थी।

इसके अनुसार, अदालतें सर्वेक्षण करने की मंजूरी दे रही हैं। अब अजमेर दरगाह में एक समस्या है। एक-एक करके मस्जिदों को मिटाया जा रहा है। इसलिए, समस्त ने 1991 के पूजा स्थल अधिनियम को बनाए रखने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया है। यह कार्यक्रम समस्त केरल सुन्नी स्टूडेंट्स फेडरेशन ने एरियाकोड मलप्पुरम में आयोजित किया था।

‘दूसरे धर्मों द्वारा पूजे जाने वाली वस्तुओं का उपहास करना गलत’

समस्त की युवा शाखा सुन्नी युवाजन संघ के राज्य सचिव अब्दु समद पूकोट्टूर ने कहा कि इस्लाम के तहत दूसरे धर्मों द्वारा पूजे जाने वाली वस्तुओं का उपहास करना अनुचित है। अगर फैजी की टिप्पणी से अन्य धर्मों के लोगों को ठेस पहुंची है, तो हमें इसका खेद है।

फैजी पर समस्त के अध्यक्ष जिफरी मुथुकोया थंगल को ‘चोर’ कहने का भी आरोप है, जिसके कारण उन्हें बुधवार को समूह की मुशावरा बैठक छोड़नी पड़ी। इसके अलावा, फैजी की कथित वामपंथी झुकाव के लिए आलोचना की गई। मुशावरा सदस्य बहाउद्दीन नदवी ने कहा कि लोग जानते हैं कि फैजी वामपंथी हितों का समर्थन करते हैं। समस्त नास्तिक विचारधाराओं को मानने वाले संगठनों के साथ गठबंधन नहीं कर सकता।

समस्त के अंदरूनी मतभेद हुए उजागर

यह घटना समस्त के अंदरूनी मतभेदों को भी उजागर करती है। फैजी के बयानों से संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा है। समस्त ने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 का समर्थन करने का प्रस्ताव पारित किया है। यह अधिनियम किसी भी धार्मिक स्थल की प्रकृति को बदलने पर रोक लगाता है। फैजी ने इसी अधिनियम का हवाला देते हुए अपनी बात रखी थी। उनका कहना था कि मस्जिदों में सर्वेक्षण कराके उन्हें ध्वस्त किया जा रहा है। यह अजमेर दरगाह जैसे स्थानों पर भी हो रहा है।

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बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए 88 हिंसक हमले, कई मंदिर तोड़े, कुल 70 लोग गिरफ्तार; युनूस सरकार ने कबूला सच

Bangladesh News: बांगलादेश ने आखिरकार स्वीकार किया है कि अगस्त में प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद 88 हिंसक घटनाएं अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हुईं। इन हमलों ने बांगलादेश में हिन्दुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन घटनाओं में न सिर्फ हिंदू समुदाय के लोग, बल्कि कई मंदिर भी निशाने पर आए जिससे भारत में भी चिंता की लहर दौड़ गई है।

अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने कहा कि इन घटनाओं में 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने यह खुलासा ऐसे समय किया है जब एक दिन पहले विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बांग्लादेशी नेतृत्व के साथ बैठक के दौरान अल्पसंख्यकों पर हमलों की अफसोसजनक घटनाओं को उठाया था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कल्याण से संबंधित भारत की चिंताओं से अवगत कराया था।

आलम ने संवाददाताओं को बताया कि पांच अगस्त से 22 अक्टूबर तक अल्पसंख्यकों से संबंधित घटनाओं में कुल 88 मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा, “मामलों और गिरफ्तारियों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है, क्योंकि पूर्वोत्तर सुनामगंज, मध्य गाजीपुर और अन्य क्षेत्रों में भी हिंसा के नए मामले सामने आए हैं।”

उन्होंने कहा कि ऐसे मामले भी हो सकते हैं जहां कुछ पीड़ित पिछली सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्य रहे हों। सरकार अब तक इस बात पर जोर देती रही है कि कुछ घटनाओं को छोड़कर, हिंदुओं पर उनकी आस्था के कारण हमला नहीं किया गया। आलम ने कहा कि 22 अक्टूबर के बाद हुई घटनाओं का ब्यौरा जल्द ही साझा किया जाएगा।

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मुस्लिम भीड़ ने हिंदु महिलाओं पर किया जानलेवा हमला, कहा, नंगा करके मारेंगे; देखें वायरल वीडियो

Gujarat Viral Video Muslim Attack on Hindu Women: गुजरात के नवसारी जिले के दरगाह रोड इलाके में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं पर जानलेवा हमला किया.

इस घटना में विशेष रूप से हिंदू महिलाओं को निशाना बनाया गया. बताया जा रहा है कि मामूली वाहन पार्किंग विवाद ने इस हिंसा का रूप लिया, जिसमें महिलाओं के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया.

घटना शनिवार, 7 दिसंबर 2024 की है. पीड़ित परिवारों ने बताया कि रात में वाहन खड़ा करने को लेकर हुए विवाद के बाद, 100-150 लोगों की भीड़ लाठी-डंडे और अन्य हथियार लेकर मौके पर पहुंची. हमलावरों ने हिंदू महिलाओं को गंदी-गंदी गालियाँ दीं और धमकियाँ दीं कि “काफिरों यहाँ से भाग जाओ. यह इलाका हमारा है. अभी तो शुरुआत है.”

महिलाओं को बनाया गया निशाना

पीड़ित चंदन राठौर ने बताया कि हमलावरों ने महिलाओं को “नंगा करके मारने” जैसी धमकी दी और उनके साथ अश्लील हरकतें कीं. जब परिवार के अन्य सदस्य बचाव के लिए आए, तो उन्हें भी पीटा गया और जान से मारने की धमकी दी गई.

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मुख्य आरोपियों के नाम आए सामने

पीड़ितों ने टाउन पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में शाहनवाज भंडारी को इस हिंसा का मास्टरमाइंड बताया गया है. अन्य आरोपियों में एजाज शेख, शोएब, सूफियान, सलीम, और रफीक बेट का नाम शामिल है. साथ ही, 150 अज्ञात लोगों को भी आरोपित किया गया है.

त्योहारों पर भी बढ़ा तनाव

पीड़ितों के अनुसार, यह इलाका मुस्लिम बाहुल्य है, जहां पहले भी हिंदुओं के साथ इस तरह की घटनाएं होती रही हैं. चंदन राठौर ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों से यहां गणेशोत्सव और नवरात्रि जैसे त्योहारों पर मुस्लिम कट्टरपंथी हंगामा करते हैं. उन्होंने जबरन भजन-कीर्तन बंद करवाने और पंडालों में घुसकर महिलाओं के साथ बदसलूकी करने की घटनाओं का जिक्र किया.

पुलिस कार्रवाई पर सवाल

मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है, जिससे हिंदू संगठनों और स्थानीय निवासियों में नाराजगी है. उन्होंने पुलिस से तुरंत सख्त कदम उठाने की मांग की है.

हिंदू महिलाओं ने सुनाई आपबीति

इस घटना से पीड़ित कई महिलाओं ने वीडियो जारी कर अपनी आपबीती सुनाई. एक महिला ने भावुक होकर पूछा, “क्या हिंदू होना गुनाह है? हमें यहां से भगाने और गला काटने की धमकी दी जाती है. क्या हिंदुस्तान में हिंदुओं को रहने का अधिकार नहीं है?”

स्थानीय हिंदू संगठनों ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने प्रशासन से सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है और पुलिस को ज्ञापन भी सौंपा है.

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लगभग 200 मुस्लिमों ने एक “हिंदू घर पर हमला” किया, और हिंदू “महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार” किया !! वीडियो गुजरात के नवसारी शहर के दरगाह रोड का बताया जा रहा है !! कह रहे हैं "काफ़िरो ये इलाका छोड़ दो" #ViralVideo

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मोहम्मद यूनुस पर भड़की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, कहा, हिंदुओं के कत्लेआम का है मास्टरमाइंड; जानें पूरा मामला

Shaikh Hasina News: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का दौर जारी है। दुनिया भर में कृष्ण भक्ति का प्रचार-प्रसार करने वाली संस्था ISKCON से जुड़े संत चिन्मय कृष्णदास को जेल भेजा गया है। उन पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए गए हैं। इसके खिलाफ भी बांग्लादेश में हिंदुओं के बीच गुस्सा है। इस बीच पूर्व पीएम शेख हसीना ने आरोप लगाया है कि बांग्लादेश में हो रहे नरसंहार के जिम्मेदार अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस हैं। शेख हसीना ने तो मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा का मास्टरमाइंड बताया है।

शेख हसीना ने अवामी लीग के एक कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि मंदिरों, चर्चों पर हमले के पीछे मोहम्मद युनूस का हाथ है। वह इन घटनाओं के पीछे मास्टरमाइंड की तरह काम कर रहे हैं। 5 अगस्त को तख्तापलट के बाद भारत आईं शेख हसीना ने कहा, ‘आज मेरे ऊपर आरोप लगाए जाते हैं कि मैंने नरसंहार कराया है। लेकिन असलियत यह है कि मोहम्मद यूनुस ऐसा कर रहे हैं। वह पूरे डिजाइन के साथ कााम कर रहे हैं। छात्र संगठनों के नाम पर वह सत्ता में हैं और अब अल्पसंख्यकों की हत्याएं कराई जा रही हैं। वह इसके मास्टरमाइंड हैं। यहां तक कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के लीडर तारिक रहमान भी कह चुके हैं कि हत्याएं जारी रहीं तो सरकार नहीं चलेगी।’

बता दें कि तारिक रहमान बांग्लादेश नेशनल पार्टी की नेता बेगम खालिदा जिया के बेटे हैं। बता दें कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनने के बाद से ही अल्पसंख्यकों पर हमले जारी हैं। बड़ी संख्या में उनके घर फूंके गए, दुर्गा पूजा पंडालों पर हमले हुए और अब नए सिरे से हिंसा का दौर जारी है। कृष्ण भक्ति को प्रचारित करने वाली संस्था इस्कॉन को भी निशाना बनाया जा रहा है।

बता दें कि बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनने के बाद से पाकिस्तान की ओर झुकाव बढ़ा है। बंग बंधु मीजबुर रहमान की प्रतिमा पर हमला हुआ था और उनकी तस्वीरों को दफ्तरों से हटाया गया है। यही नहीं बांग्लादेश निर्माण के नायकों से जुड़े दिनों पर छुट्टियों को भी रद्द किया गया है। हिंदुओं पर भी यह कहते हुए हमले हो रहे हैं कि ये शेख हसीना की सरकार के समर्थक थे। कई बड़ी हिंदू हस्तियों के घरों और आराधनों स्थलों तक पर अटैक की घटनाएं हुई हैं।

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24 करोड़ मुसलमानों को कहां फेंकोगे? समान व्यवहार करें, यही संविधान कहता है; केंद्र पर बरसे फारुख अब्दुल्ला

Jammu Kashmir News: नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि केंद्र को देश में सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाली गतिविधियों पर रोक लगानी चाहिए और मुसलमानों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। अब्दुल्ला ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘(संभल जैसी घटनाएं) रोकने की जरूरत है। मैं केंद्र सरकार से कहूंगा कि वह (ऐसी हरकतें) रोके, क्योंकि वे (भारत के) मुसलमानों को समुद्र में नहीं फेंक सकते। वे 24 करोड़ मुसलमानों को कहां फेंकेंगे? मुसलमानों के साथ समान व्यवहार करें, यही हमारा संविधान कहता है। अगर वे संविधान के साथ छेड़छाड़ करेंगे तो भारत कैसे बचेगा।’’

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ने कहा कि कोई भी कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीरी पंडितों को वापस आने से कौन रोक रहा है? हर राजनीतिक दल ने कहा है कि उन्हें वापस आना चाहिए। यह उनका फैसला है कि वे कब वापस आना चाहते हैं। हमारे दिल उनके लिए खुले हैं। जब मैं मुख्यमंत्री था और स्थिति खराब थी, तब भी हमने उन्हें वापस लाने की कोशिश की थी।’’

जम्मू-कश्मीर में आरक्षण नीति की समीक्षा की मांग पर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार को इसकी समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हम सरकार से इसकी समीक्षा करने को कहेंगे। आरक्षण वंचित वर्गों के लिए है ताकि वे बराबरी के स्तर पर आ सकें।’’ नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार ने आरक्षण को युक्तिसंगत बनाने की मांगों पर विचार करने के लिए कैबिनेट की उप-समिति का गठन किया है। केंद्र शासित प्रदेश में आरक्षण की सीमा 70 प्रतिशत तक पहुंच गयी है।

आतंकियों के साथ कथित संबंधों के चलते पिछले सप्ताह उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा दो सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किए जाने के बारे में अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार ‘‘हर चीज पर नजर रखेगी और यह पता लगाएगी कि दोनों कर्मचारियों को क्यों बर्खास्त किया गया।’’ नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष ने इजरायल-लेबनान के बीच हुए संघर्ष विराम का स्वागत किया, लेकिन गाजा, सीरिया और ईरान पर हमलों को भी रोकने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह (संघर्ष विराम) एक बहुत अच्छा कदम है, लेकिन इजराइल और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से गाजा, सीरिया और ईरान में किए जा रहे हमलों को रोकना जरूरी है, जो आज भी जारी हैं। यह खतरनाक है। तुरंत संघर्ष विराम होना चाहिए।’’ अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘आपने (संयुक्त राष्ट्र) सुरक्षा परिषद में बहस देखी होगी। यदि सुरक्षा परिषद के अस्तित्व का कोई उद्देश्य है, तो उसे इजराइल को दिए गए निर्देशों पर काम करना चाहिए। उन्हें संघर्ष विराम लागू करना चाहिए और मानवीय सहायता की अनुमति देनी चाहिए।’’

हाल में ‘उमराह’ यात्रा से लौटे अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने न केवल कश्मीर के लिए बल्कि पूरे मुस्लिम जगत के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा, ‘‘आज हम जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, अल्लाह हमें उनसे मुक्ति दिलाए। अल्लाह हमें सही रास्ते पर ले जाए। मैंने प्रार्थना की कि हम बुराई से दूर रहें और हमारे देश में फैली धार्मिक नफरत का अंत हो। मैंने एकता और सद्भाव के लिए प्रार्थना की।’’

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ढाका में हिंदू युवक के साथ उपद्रवियों ने की मारपीट, चाकू की नोंक पर लूटा; पुलिस ने दर्ज नहीं की शिकायत

Dhaka News: बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरों के बीच कोलकाता के एक युवक ने दावा किया है कि ढाका में उपद्रवियों ने उसकी इसलिए पिटाई कर दी, क्योंकि उन्हें पता लगा कि वह भारतीय हिंदू है। 22 वर्षीय युवक का कहना है कि वह बीते 23 नवंबर को बांग्लादेश गया था और वहां एक दोस्त के घर रुका था। जब देर शाम को टहलने के लिए वे घर से बाहर निकले तो उपद्रवियों ने उन्हें पकड़ लिया। मुझसे मेरी पहचान पूछी और फिर भारतीय हिंदू पता लगने पर मारपीट की। मुझसे लूटपाट की और लात-घूंसों से जमकर पिटाई की। वहां खड़े सभी लोग तमाशा देखते रहे, लेकिन कोई बचाने नहीं आया।

कोलकाता के बेलघरिया के रहने वाले 22 साल के सायन घोष का कहना है कि “बांग्लादेश में रहने के दौरान जब मैं और मेरा दोस्त 26 नवंबर को देर शाम टहलने के लिए निकले, तो चार-पांच बदमाशों के एक समूह ने मुझे मेरे दोस्त के आवास से लगभग 70 मीटर की दूरी पर रोक लिया। उन्होंने मुझसे मेरी पहचान के बारे में पूछा। जैसा कि मैंने उन्हें बताया था मैं भारत से आया हूं और एक हिंदू हूं तो उन्होंने मुझे मारना शुरू कर दिया। उन्होंने मुझे लात और मुक्कों से मारना शुरू कर दिया और मुझे बचाने की कोशिश करने वाले मेरे दोस्त पर भी हमला किया।”

चाकू की नोंक पर लूटपाट

घोष ने आगे बताया, “उन्होंने चाकू की नोक पर मेरा मोबाइल फोन और बटुआ भी छीन लिया। कोई भी दर्शक हमारे बचाव में नहीं आया। आसपास कोई पुलिसकर्मी नहीं था। घटना के बाद, हम श्यामपुर पुलिस स्टेशन गए लेकिन उन्होंने कोई शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया। इसके बजाय, उन्होंने बार-बार पूछा जब मैंने उन्हें अपना पासपोर्ट और वीजा दिखाया और मेरे दोस्त और उसके परिवार के सदस्यों से बात की, तो वे संतुष्ट हुए और मुझसे अपने घावों का इलाज कराने के लिए कहा।”

घोष ने दावा किया, “घटना के तीन घंटे बाद मुझे वहां इलाज मिला। मेरे माथे और सिर पर कई टांके लगे थे और यहां तक ​​कि मेरे मुंह में भी चोट आई थी।” घोष आखिरकार 30 नवंबर को कोलकाता लौट सकें। उसने मामले में बेलघरिया पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा, “मैं अपनी और अपने दोस्त के परिवार की सुरक्षा के डर से ढाका में भारतीय उच्चायोग जाने से बहुत डर रहा था।”

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बांग्लादेश में भीड़ ने पत्रकार मुन्नी साहा के साथ की बदसलूकी, पुलिस ने हिरासत में लिया; जानें क्या लगे आरोप

Bangladesh News: बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद हिंदुओं पर हिंसाएं हो रही हैं। मोहम्मद यूनुस की सरकार हिंदू पुजारियों पर भी कहर बरपा रही है। अल्पसंख्यकों को निशाने पर लेने के बीच अब बांग्लादेशी पत्रकारों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। पड़ोसी देश की वरिष्ठ पत्रकार मुन्नी साहा पर बीती रात भीड़ ने धावा बोल दिया और उन पर आरोप लगाया कि वह बांग्लादेश को भारत का हिस्सा बनाना चाहती हैं और इसके लिए वह सबकुछ कर रही हैं। बाद में पुलिस ने उन्हें भीड़ से बचाया और फिर हिरासत में भी ले लिया।

बांग्लादेश की स्थानीय मीडिया के अनुसार, पत्रकार मुन्नी साहा एंटी रिजर्वेशन प्रोटेस्ट के दौरान हुए स्टूडेंट की मौत के मामले में वॉन्टेड हैं। इसी प्रोटेस्ट के चलते बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ गया था। पुलिस ने बताया कि मुन्नी साहा को ढाका के कावरान बाजार इलाके से बचाया गया। उन्हें भीड़ ने घेर रखा था।

ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी रेजाउल करीम मलिक ने ‘द डेली स्टार’ अखबार को बताया, “लोगों ने उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया। उन्हें घबराहट का दौरा पड़ा। हमने उनकी स्वास्थ्य स्थिति और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें रिहा कर दिया कि वह एक महिला पत्रकार है।” साहा को अदालत से जमानत लेने और भविष्य में पुलिस के समन का पालन करने के लिए कहा गया है।

दो और हिंदू ब्रह्मचारी गिरफ्तार: इस्कॉन कोलकाता

अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन), कोलकाता के प्रवक्ता राधारमण दास ने शनिवार को दावा किया कि बांग्लादेश में दो और हिंदू ब्रह्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। राधारमण ने कहा, ”मुझे जानकारी मिली है कि बांग्लादेश में पुलिस ने इस्कॉन के दो और ब्रह्मचारियों को गिरफ्तार किया है।”

राधारमण ने शुक्रवार रात को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”इस बीच, बुरी खबर आई है: चिन्मय प्रभु के लिए प्रसाद लेकर गए दो ब्रह्मचारियों को मंदिर लौटते समय गिरफ्तार कर लिया गया, और चिन्मय प्रभु के सचिव भी लापता हैं। कृपया उनके लिए प्रार्थना करें।”

इससे पहले, राधारमण ने पोस्ट किया था, ”एक और ब्रह्मचारी, श्री श्याम दास प्रभु को आज चटोग्राम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।” राधारमण ने शनिवार को ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”क्या वह आतंकवादी जैसा दिखते हैं? बांग्लादेश के इस्कॉन के निर्दोष ब्रह्मचारियों को रिहा किया जाए। इस्कॉन के ब्रह्मचारियों की गिरफ्तारी बेहद चौंकाने वाली और परेशान करने वाली है।”

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