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चीफ जस्टिस: न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की रक्षक, जानें बीआर गवई ने और क्या कहा
Maharashtra News: भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई को महाराष्ट्र विधानमंडल ने सम्मानित किया। महाराष्ट्र मूल के गवई को चीफ जस्टिस बनना राज्य का गौरव बताया गया। उन्होंने संविधान की सर्वोच्चता पर जोर दिया। जस्टिस गवई ने बाबासाहेब आंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की रक्षक है। यह सम्मान उनके लिए भावनात्मक क्षण था। लोग उनकी उपलब्धि से प्रेरित हैं। यह राज्य के लिए गर्व का पल है।
संविधान की सर्वोच्चता
जस्टिस गवई ने कहा कि संविधान सर्वोच्च है। उन्होंने बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को दोहराया। आंबेडकर ने कहा था कि कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका को समान अधिकार मिले हैं। गवई ने जोर देकर कहा कि न्यायपालिका को कार्यपालिका के हस्तक्षेप से मुक्त रहना चाहिए। यह बयान उपराष्ट्रपति धनखड़ के संसद सर्वोच्चता वाले बयान पर इशारा था। लोग इस संवैधानिक बहस को गंभीरता से सुन रहे हैं। यह लोकतंत्र की ताकत दिखाता है।
न्यायपालिका की भूमिका
जस्टिस गवई ने कहा कि न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की प्रहरी है। आंबेडकर ने इसे संविधान का संरक्षक बताया था। गवई ने कहा कि अदालतों को लोगों के हितों की रक्षा करनी होगी। यह जिम्मेदारी संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। उनके इस बयान ने लोगों में विश्वास जगाया। यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर जोर देता है। लोग उनकी इस प्रतिबद्धता की सराहना कर रहे हैं। यह संदेश समाज में गूंज रहा है।
आंबेडकर का जिक्र
जस्टिस गवई ने बाबासाहेब आंबेडकर को याद किया। उन्होंने कहा कि आंबेडकर ने संविधान को शांति और युद्ध में देश को एकजुट रखने वाला बताया। गवई ने आंबेडकर के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के दृष्टिकोण को दोहराया। यह बयान लोगों के दिलों को छू गया। आंबेडकर के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। लोग इस ऐतिहासिक संदर्भ से प्रेरित हैं। यह संविधान की ताकत को दर्शाता है।
उपराष्ट्रपति का बयान
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अप्रैल में कहा था कि संसद सर्वोच्च है। इस पर जस्टिस गवई ने इशारों में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि संविधान ने तीनों अंगों को समान अधिकार दिए हैं। कोई भी एक दूसरे से ऊपर नहीं है। यह बयान लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करता है। लोग इस संतुलित दृष्टिकोण की सराहना कर रहे हैं। यह बहस संवैधानिक मूल्यों को उजागर करती है।
सामाजिक एकता पर जोर
जस्टिस गवई ने आंबेडकर के हवाले से कहा कि स्वतंत्रता की रक्षा जरूरी है। इसके लिए जातिगत मतभेद खत्म करने होंगे। उन्होंने कहा कि संविधान सामाजिक एकता का आधार है। यह बयान लोगों में एकजुटता का संदेश देता है। गवई ने देश पर शासन करने वालों से एकता की अपील की। लोग उनके इस संदेश से प्रभावित हैं। यह समाज में समानता का आह्वान है।
जस्टिस गवई का सफर
जस्टिस बीआर गवई महाराष्ट्र के रसूखदार परिवार से हैं। उनके पिता आरएस गवई विधानपरिषद के चेयरपर्सन थे। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया बनाई थी। जस्टिस गवई देश के दूसरे दलित चीफ जस्टिस हैं। उनकी यह उपलब्धि प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र ने उन्हें यह मुकाम दिया। लोग उनके इस संघर्ष और सफलता की कहानी से प्रेरित हैं। यह गर्व का क्षण है।
महाराष्ट्र का सम्मान
महाराष्ट्र विधानमंडल ने जस्टिस गवई को सम्मानित किया। दोनों सदनों ने उनके चीफ जस्टिस बनने को गौरवशाली बताया। यह सम्मान उनके लिए भावनात्मक था। गवई ने सदन को संबोधित करते हुए संविधान की ताकत पर जोर दिया। यह पल महाराष्ट्र के लोगों के लिए गर्व का विषय है। लोग उनकी इस उपलब्धि को उत्साह के साथ देख रहे हैं। यह सम्मान उनकी मेहनत का प्रतीक है।
लोकतंत्र की ताकत
जस्टिस गवई ने लोकतंत्र की ताकत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संविधान ने तीनों अंगों को संतुलित शक्ति दी है। यह बयान उपराष्ट्रपति के बयान का जवाब था। गवई ने कहा कि लोकतंत्र में संविधान सर्वोच्च है। यह विचार लोगों में विश्वास जगाता है। उनकी यह टिप्पणी संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का संदेश देती है। लोग इस संदेश को गंभीरता से ले रहे हैं।