भाषाई हमले: बीजेपी ने उद्धव-राज ठाकरे पर साधा निशाना, शेलार ने की पहलगाम हमले से की तुलना
Maharashtra News: महाराष्ट्र में हिंदी को तीसरी भाषा बनाने के विरोध में उद्धव और राज ठाकरे की एकजुटता पर बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि भाषाई आधार पर हमले निराशाजनक हैं। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले से तुलना की, जहां धर्म के आधार पर हत्याएं हुईं। बीजेपी मराठी सम्मान की रक्षा करेगी और गैर-मराठी लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी। यह विवाद राज्य में तनाव बढ़ा रहा है।
पहलगाम से भाषाई हमले की तुलना
आशीष शेलार ने कहा कि पहलगाम में आतंकवादियों ने धर्म पूछकर लोगों को निशाना बनाया। महाराष्ट्र में भाषा के आधार पर हमले हो रहे हैं। यह दुखद है। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि कुछ नेता इन हमलों का आनंद ले रहे हैं। बीजेपी मराठी गौरव की रक्षा करेगी, लेकिन गैर-मराठी लोगों को भी सुरक्षित रखेगी। शेलार ने कहा कि मराठी उनके लिए राजनीतिक मुद्दा नहीं है।
मनसे कार्यकर्ताओं की हिंसा
हाल ही में भयंदर में मनसे कार्यकर्ताओं ने एक दुकानदार पर मराठी न बोलने के लिए हमला किया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पुलिस ने सात मनसे समर्थकों को हिरासत में लिया, लेकिन बाद में नोटिस देकर छोड़ दिया। शेलार ने इन घटनाओं को दुखद बताया। इस तरह की हिंसा ने स्थानीय लोगों में डर पैदा किया है। बीजेपी ने इसे गंभीरता से लिया है।
वर्ली में निवेशक पर हमला
मुंबई के वर्ली में निवेशक सुशील केडिया के कार्यालय पर मनसे कार्यकर्ताओं ने हमला किया। केडिया ने सोशल मीडिया पर मराठी न बोलने की बात लिखकर राज ठाकरे को चुनौती दी थी। हमले के बाद केडिया ने माफी मांगी और ठाकरे की तारीफ की। इस घटना ने भाषाई तनाव को और बढ़ाया। पुलिस ने पांच मनसे समर्थकों को गिरफ्तार किया। यह मामला राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
बीजेपी का ठाकरे बंधुओं पर हमला
आशीष शेलार ने उद्धव और राज ठाकरे के संयुक्त प्रदर्शन को जनता को लुभाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि यह रैली भाषा के लिए नहीं, बल्कि बीएमसी चुनावों के लिए थी। बीजेपी ने ठाकरे बंधुओं पर राजनीतिक अवसरवादिता का आरोप लगाया। शेलार ने कहा कि उद्धव सत्ता खोने की बेचैनी में हैं। यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है।
हिंदी भाषा विवाद का पृष्ठभूमि
उद्धव और राज ठाकरे ने हिंदी को तीसरी भाषा बनाने के सरकारी फैसले का विरोध किया। 5 जुलाई को दोनों ने मुंबई में संयुक्त रैली की। सरकार ने बाद में इस फैसले को वापस ले लिया। बीजेपी का कहना है कि हिंदी वैकल्पिक थी, अनिवार्य नहीं। यह विवाद मराठी अस्मिता और गैर-मराठी समुदायों के बीच तनाव को उजागर करता है।
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