میرے دشمن کا بیٹا ہے مجھے آداب کرتا ہے
بڑے لوگوں کے بچے بھی بڑے معلوم ہوتے ہیں
- منور رانا
मेरे दुश्मन का बेटा है मुझे आदाब करता है
बड़े लोगों के बच्चे भी बड़े मालूम होते हैं
- मुन्नवर राना
अपने घर से ज़रा दूर चले जाने पर फिर कई कई रोज़ घर ना आ पाने पर अपनों से मुलाक़ात न हो पाने पर अजनबी मुल्क में बस जाने पर किसी सूरजमुखी के खिलखिलाने पर आँचल के सर से सरक जाने पर सोंधी मिट्टी की ख़ुशबू याद आने पर शाम को तुलसी पर दिये के … Continue reading जड़ें पुकारती हैं (جڈیں پکارتی ہیں)