पांच दिन बाद दंपति ने हॉस्पिटल प्रशासन पर लगाए नवजात की मौत के आरोप, कहा, पेट पर चढ़कर करवाई थी डिलीवरी
Mandi News: सिविल अस्पताल सुंदरनगर पर एक दंपत्ति ने बच्चे के जन्म में लापरवाही बरतने का गंभीर आरोप लगाया है। दंपत्ति ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाया है कि प्रसव के पांच दिन बाद नवजात बच्चे की मौत हो गई। यह मामला बल्ह उपमंडल के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत ढाबन के डडोह का है। धनी राम नामक व्यक्ति अपनी पत्नी को प्रसव के लिए सिविल अस्पताल सुंदरनगर लेकर आया था।
महिला को 18 दिसंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था
महिला को 18 दिसंबर को डिलीवरी के लिए सिविल अस्पताल सुंदरनगर में भर्ती कराया गया था। शिकायतकर्ता अर्चना ने बताया, “मैं 26 घंटे तक दर्द में रही, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। न तो उन्होंने मुझे अस्पताल से रेफर किया और न ही मेरी सिजेरियन डिलीवरी की। मुझे नॉर्मल डिलीवरी के लिए इंतजार करने को कहा गया और मैं 18 दिसंबर की पूरी रात दर्द में रही।”
महिला की डिलीवरी 19 दिसंबर को हुई
पीड़ित महिला ने जानकारी देते हुए बताया, “ड्यूटी पर मौजूद पैरामेडिकल स्टाफ ने डॉक्टर को बताए बिना 26 घंटे बाद (19 दिसंबर की सुबह) मेरी नॉर्मल डिलीवरी की और लेबर रूम में मेरे पेट पर चढ़कर जबरन बच्चे को बाहर निकाल लिया। बच्चा पैदा होते ही बिल्कुल भी नहीं रोया। ऐसे में बच्चे को मशीन में डालकर मेडिकल कॉलेज नेरचौक रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई।”
महिला ने लगाए ये आरोप
पीड़ित महिला ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाया कि मेरी डिलीवरी 26 घंटे देरी से हुई। 9 महीने में मेरे बच्चे के सभी टेस्ट नॉर्मल थे, तो ऐसा क्या हुआ कि बच्चे के जन्म लेते ही उसके शरीर के सभी अंग फेल हो गए। इसमें अस्पताल प्रशासन की गलती है।
23 दिसंबर को हुई नवजात की मौत
अर्चना के पति धनी राम ने कहा, “मेरी पत्नी लेबर रूम में दर्द से तड़पती रही। डिलीवरी के समय किसी को अंदर नहीं जाने दिया गया। जब बच्चा पैदा हुआ तो उसे मुझे सौंप दिया गया और बच्चे को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मेरा बच्चा पांच दिन तक जीवित रहा। डॉक्टरों ने कहा कि बच्चा 26 घंटे गर्भ में रहा, जिस कारण उसके अंग फेल हो गए हैं।” नवजात की 23 दिसंबर को नेरचौक मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान मौत हो गई।
पीड़ित महिला के पति ने आरोप लगाया कि लेबर रूम में मेरी पत्नी के साथ हुए दुर्व्यवहार की जांच होनी चाहिए। मामले की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर-1100 पर की गई है। इसके अलावा स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल, नाचन विधायक विनोद कुमार, सुंदरनगर विधायक राकेश जम्वाल और सुंदरनगर अस्पताल प्रबंधन को भी ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी गई है। मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में सीएमओ मंडी डॉ. नरेंद्र भारद्वाज ने कहा कि मामले को लेकर एसएमओ से बात की है, लेकिन वह छुट्टी पर हैं। इस मामले में दूसरे डॉक्टर से बात की है तो पता चला है कि परिजनों ने एसएमओ सुंदरनगर को शिकायत भेजी है। शिकायत के बाद मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अब फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट आने के बाद ही मामले का पता चल पाएगा।
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