हिमाचल आपदा: सुक्खू-जयराम की बैठक में राहत कार्यों पर जोर, जानें मुख्यमंत्री ने क्या दिए निर्देश
Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में बादल फटने से आई भीषण आपदा ने भारी तबाही मचाई है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के साथ थुनाग में बैठक कर हिमाचल आपदा से हुए नुकसान की समीक्षा की। सुक्खू ने सड़कों, बिजली और पानी की आपूर्ति जल्द बहाल करने के निर्देश दिए। उन्होंने केंद्र से विशेष राहत पैकेज की मांग के लिए दिल्ली जाने की बात कही।
त्वरित राहत के लिए निर्देश
मुख्यमंत्री ने प्रभावित सराज क्षेत्र में राहत कार्यों में तेजी लाने को कहा। उन्होंने क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और जल योजनाओं की मरम्मत के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तुरंत तैयार करने के आदेश दिए। सुक्खू ने 56 किलोमीटर लंबी चैलचौक-जंजैहली सड़क के सुदृढ़ीकरण की योजना बनाई। इसके लिए एक सप्ताह में रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया। हिमाचल आपदा के बीच 60 प्रतिशत पेयजल योजनाएं अस्थायी रूप से बहाल हो चुकी हैं।
पुनर्वास पर विशेष ध्यान
सुक्खू और जयराम ठाकुर ने जमीन गंवाने वाले परिवारों के पुनर्वास पर चर्चा की। जयराम ने कहा कि सर्दियां नजदीक हैं, इसलिए बेघर परिवारों को तुरंत आश्रय देना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने मंडी उपायुक्त को सुरक्षित स्थानों पर प्री-फैब्रिकेटेड घर बनाकर अस्थायी पुनर्वास शुरू करने के निर्देश दिए। हिमाचल आपदा ने कई परिवारों को बेघर कर दिया, जिसके लिए त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं।
बेली पुलों से संपर्क बहाली
मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग को बेली और सस्पेंशन पुल बनाकर प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क बहाल करने को कहा। इसके लिए राज्य सरकार पर्याप्त धन देगी। सुक्खू ने अधिकारियों से जयराम ठाकुर के साथ समन्वय कर राहत कार्यों में तेजी लाने को कहा। बागवानी से जुड़े किसानों के नुकसान का आकलन भी शुरू करने के निर्देश दिए गए। यह प्रयास पीड़ितों को जल्द राहत पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
केंद्र से राहत पैकेज की मांग
सुक्खू ने कहा कि वह जल्द दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्रियों से मिलेंगे। वे हिमाचल आपदा के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग करेंगे। उन्होंने सभी विभागों को आपसी सहयोग से राहत कार्यों को तेज करने का निर्देश दिया। जयराम ठाकुर ने भी राहत कार्यों में सरकार का साथ देने का भरोसा दिया। इस आपदा ने हिमाचल के कई हिस्सों को तबाह किया है, जिससे पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती सामने है।
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