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⚡ E20 fuel now mandatory across India!
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Old Vehicles In Delhi-NCR: दिल्ली में फिलहाल 10 और 15 साल पुरानी गाड़ियों पर नहीं लगेगी रोक, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
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Khabarwala24 News Old Vehicles In Delhi-NCR: दिल्ली-एनसीआर में पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम
ओवरएज वाहन: दिल्ली के गायब हुई 80 हजार स्क्रैप गाड़ियां, मनजिंदर सिंह सिरसा ने उठाए सवाल; जानें पूरा मामला
Delhi News: दिल्ली में ओवरएज वाहनों को अक्तूबर तक राहत मिली है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने मंगलवार को फैसला लिया कि ईंधन पाबंदी अब 1 नवंबर से लागू होगी। यह नियम दिल्ली और एनसीआर के पांच जिलों में प्रभावी होगा। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसे दिल्लीवासियों के लिए राहत बताया। उन्होंने 80 हजार स्क्रैप गाड़ियों के गायब होने की जांच की मांग की।
ईंधन पाबंदी में बदलाव: 1 नवंबर से लागू
CAQM ने पहले 1 जुलाई से ओवरएज वाहनों पर ईंधन पाबंदी लागू की थी। दिल्ली सरकार की आपत्तियों के बाद यह तारीख टल गई। अब 1 नवंबर से दिल्ली के सभी पेट्रोल पंपों पर यह नियम लागू होगा। एनसीआर के पांच जिलों में भी इसे लागू किया जाएगा। यह फैसला वायु प्रदूषण को कम करने के लिए लिया गया है। दिल्लीवासियों को फिलहाल तीन महीने की राहत मिली है।
सिरसा का आरोप: 80 हजार गाड़ियां गायब
मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने AAP पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 80 हजार ओवरएज वाहनों को स्क्रैप घोषित कर कबाड़ियों को सौंप दिया गया। दिल्ली में कोई रजिस्टर्ड स्क्रैपिंग सेंटर नहीं है। सिरसा ने सवाल उठाया कि ये गाड़ियां कहां गईं? उन्होंने दावा किया कि लाखों की गाड़ियां हजारों में बेची गईं। इस मामले में AAP नेताओं की भूमिका की जांच की मांग की गई।
स्क्रैपिंग की गुत्थी: साजिश का दावा
सिरसा ने स्क्रैपिंग प्रक्रिया को साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि बिना जरूरत के गाड़ियां जब्त की गईं। दिल्ली में स्क्रैपिंग यूनिट नहीं होने के बावजूद 80 हजार वाहन गायब हो गए। सिरसा ने AAP पर करोड़ों रुपये कमाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस घोटाले की जांच होगी। दोषी नेताओं को बेनकाब करने का वादा किया। दिल्लीवासियों के लिए यह मामला चिंता का विषय बना हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट और NGT का रुख
सिरसा ने बताया कि वह इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट और NGT में उठाएंगे। उनका कहना है कि ओवरएज वाहनों के स्क्रैपिंग में पारदर्शिता जरूरी है। दिल्ली सरकार और CAQM से जवाब मांगा जाएगा। सिरसा ने कहा कि दिल्लीवासियों को यह जानने का हक है कि उनकी गाड़ियां कहां गईं। इस मामले में कानूनी कार्रवाई से सच सामने आने की उम्मीद है।
दिल्ली में प्रदूषण: ओवरएज वाहनों की भूमिका
दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। ओवरएज वाहन इसकी प्रमुख वजहों में से एक हैं। CAQM का मानना है कि पुराने वाहनों पर पाबंदी से प्रदूषण कम होगा। हालांकि, दिल्लीवासियों को इस नियम से आर्थिक नुकसान का डर है। कई लोग पुरानी गाड़ियों पर निर्भर हैं। CAQM का नया फैसला उन्हें कुछ समय देता है, लेकिन सवाल बरकरार हैं।
एनसीआर में भी लागू होगा नियम
CAQM ने फैसला लिया कि ईंधन पाबंदी एनसीआर के पांच जिलों में भी लागू होगी। इनमें गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत शामिल हैं। इन क्षेत्रों में वाहनों की संख्या अधिक है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए यह कदम जरूरी माना जा रहा है। स्थानीय लोग इस नियम से प्रभावित होंगे। प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील की है।
दिल्लीवासियों की चिंता: गाड़ियों का क्या?
दिल्ली में स्क्रैप की गई 80 हजार गाड़ियों का मुद्दा चर्चा में है। लोग जानना चाहते हैं कि उनकी गाड़ियां कहां गईं। सिरसा ने कहा कि यह दिल्लीवासियों के साथ धोखा है। उन्होंने इस मामले में पूरी जांच का भरोसा दिलाया। ओवरएज वाहनों पर पाबंदी से पहले पारदर्शी नीति की जरूरत है। यह मुद्दा दिल्ली की सियासत को गरमा सकता है।
पुरानी गाड़ियां: दिल्ली सरकार ने ईंधन और जब्ती नियम वापस लिया, पढ़ें राहत की खबर
Delhi News: दिल्ली में पुरानी गाड़ियां चलाने वालों को बड़ी राहत मिली। सरकार ने 1 जुलाई से लागू नियम, जो 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को ईंधन देने पर रोक लगाता था, वापस ले लिया। दो दिन बाद जन दबाव और असुविधा के चलते यह फैसला बदला गया। अब ऐसी गाड़ियों को न ईंधन से रोका जाएगा, न जब्त किया जाएगा। लोग खुश हैं।
नियम लागू होने की पृष्ठभूमि
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए 1 जुलाई से नया नियम लागू किया था। इसके तहत पुरानी गाड़ियां पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं ले सकती थीं। ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे भी लगाए गए थे। नियम का मकसद दिल्ली की हवा को साफ करना था। लेकिन इसने वाहन मालिकों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं। कई लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशान हो गए।
जन दबाव और यू-टर्न
नियम लागू होने के दो दिन बाद ही लोगों का गुस्सा सामने आया। वाहन मालिकों ने नियम को अव्यवहारिक बताया। सोशल मीडिया पर भी सरकार की आलोचना हुई। पुरानी गाड़ियां चलाने वाले परिवारों ने बताया कि उनकी आजीविका पर असर पड़ रहा है। दबाव बढ़ने पर सरकार ने नियम वापस लिया। अब दिल्ली की सड़कों पर पुरानी गाड़ियां पहले की तरह चल सकेंगी। सरकार ने जनता की सुविधा को प्राथमिकता दी।
भविष्य की योजनाएं
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया कि पुरानी गाड़ियां अब बिना रोकटोक ईंधन ले सकेंगी। जब्ती की कार्रवाई भी नहीं होगी। हालांकि, प्रदूषण नियंत्रण के लिए वैकल्पिक उपायों पर विचार चल रहा है। सरकार ने लोगों से अपील की कि वे प्रदूषण कम करने में सहयोग करें। दिल्ली परिवहन विभाग ने नियमों की समीक्षा का भरोसा दिया। वाहन मालिकों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया।