हॉस्पिटल फीस पर हिमाचल सरकार का बड़ा बयान, कहा, यह कोई अनिवार्य निर्देश नहीं
Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी के लिए 10 रुपये की हॉस्पिटल फीस को लेकर विवाद छिड़ा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क सरकार ने थोपा नहीं है। यह सुझाव अस्पतालों की रोगी कल्याण समितियों से आया है। अस्पतालों को स्वायत्तता दी गई है, ताकि वे अपनी जरूरतों के आधार पर यह शुल्क वसूलें या न वसूलें।
रोगी कल्याण समितियों का सुझाव
मुख्यमंत्री ने बताया कि हॉस्पिटल फीस का निर्णय कैबिनेट की उप-समिति की सिफारिश पर लिया गया। यह फैसला रोगी कल्याण समितियों के विवेक पर छोड़ा गया है। इन समितियों में स्थानीय प्रतिनिधि शामिल होते हैं। अस्पताल अपनी स्वच्छता और रखरखाव के लिए यह शुल्क ले सकते हैं। हालांकि, जिन अस्पतालों के पास संसाधन हैं, वे इसे लागू न करने के लिए स्वतंत्र हैं।
सरकार का दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार ने कोई अनिवार्य निर्देश जारी नहीं किए। अस्पतालों को स्वायत्तता दी गई है, ताकि वे अपनी जरूरतों के अनुसार फैसला लें। यह शुल्क स्वच्छता, बुनियादी ढांचे और चिकित्सा उपकरणों की स्थिति सुधारने के लिए है। स्वास्थ्य विभाग ने अधिसूचना जारी कर इसकी पुष्टि की। रोगी कल्याण समितियां इस धनराशि का उपयोग अस्पतालों की बेहतरी के लिए करेंगी।
शुल्क का उद्देश्य
स्वास्थ्य विभाग के आदेश के अनुसार, हॉस्पिटल फीस से प्राप्त राशि का उपयोग अस्पतालों में स्वच्छता, भवनों की मरम्मत और उपकरणों की देखभाल के लिए होगा। यह कदम मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए उठाया गया है। प्रदेश में हर दिन हजारों मरीज सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचते हैं। खासकर शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में मरीजों की भारी भीड़ रहती है।
अस्पतालों में लागू हुआ शुल्क
कुछ अस्पतालों ने यह शुल्क लागू करना शुरू कर दिया है। आईजीएमसी के सुपर स्पेशियलिटी चमियाना अस्पताल में मरीजों से 10 रुपये की हॉस्पिटल फीस वसूली जा रही है। अन्य जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में भी यह शुल्क लागू हो सकता है। रोगी कल्याण समितियां अपने स्तर पर इस धनराशि का उपयोग सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करेंगी।
मरीजों पर प्रभाव
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में हर दिन बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए यह शुल्क चिंता का विषय बन सकता है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क वैकल्पिक है। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए यह कदम उठाया गया है। रोगी कल्याण समितियां इस बात का ध्यान रखेंगी कि शुल्क का उपयोग पारदर्शी तरीके से हो।
#healthcareServices #hospitalFees