कहने वालों का कुछ नहीं जाता
सहने वाले कमाल करते हैं
कौन ढूंढे जवाब ज़ख्मों के
लोग तो बस सवाल करते है #Gulzarsaab
कहने वालों का कुछ नहीं जाता
सहने वाले कमाल करते हैं
कौन ढूंढे जवाब ज़ख्मों के
लोग तो बस सवाल करते है #Gulzarsaab
ज़िन्दगी क्या है जानने के लिए
जिंदा रहना बहुत ज़रूरी है
आज तक कोई भी रहा तो नहीं #Gulzarsaab
सामने आया मेरे, देखा भी, बात भी की
मुस्कुराए भी किसी पहचान की खातिर
कल का अखबार था, बस देख लिया, रख भी दिया #Gulzarsaab #Triveni
ये माना इस दौरान कुछ साल बीत गए हैं
फिर भी आँखों में चेहरा तुम्हारा समाये हुए हैं
किताबों पे धूल जमने से कहानी कहाँ बदलती है #Triveni #Gulzarsaab
सब पे आती है, सबकी बारी से
मौत मुंसिफ है, कम-ओ-बेश नहीं
ज़िन्दगी सब पे क्यूँ नहीं आती #Gulzarsaab
एक है जिसका सर दसवें बादल में है
एक है जिसका पांव अभी दलदल में है
एक जो है सतरंगी थाम के उड़ता है
दूसरा पैर उठाता है तो रुकता है
फिरका-परस्ती, वहम परस्ती और गरीबी की रेखाएं
#हिन्दुस्तान में दो-दो हिन्दुस्तान दिखाई देते हैं. #Gulzarsaab
दरख्त
सोचते हैं जब
तो फूल आते हैं
वो धूप में डुबोके
उंगलियां
खयाल लिखते हैं
लचकती शाखों पर
तोह रंग-रंग.लफ़्ज चुनते हैं
खुशबुओं से बोलते हैं
ओर बुलाते हैं
-
हमारा शौक़ देखिये
कि गर्दनें ही काट लेते हैं
जहां कहीं महकता है कोई #Gulzarsaab
बन्जारे लगते हैं मौसम
मौसम बेघर होने लगे हैं
जंगल, पेड़, पहाड़, समंदर
इन्सां सब कुछ काट रहा है
छील छील के खाल ज़मीं की
टुकड़ा टुकड़ा बांट रहा है
आसमान से उतरे मौसम
सारे बंजर होने लगे हैं #Gulzarsaab #KadviHawa