कहने वालों का कुछ नहीं जाता
सहने वाले कमाल करते हैं

कौन ढूंढे जवाब ज़ख्मों के
लोग तो बस सवाल करते है #Gulzarsaab

ज़िन्दगी क्या है जानने के लिए
जिंदा रहना बहुत ज़रूरी है

आज तक कोई भी रहा तो नहीं #Gulzarsaab

सामने आया मेरे, देखा भी, बात भी की
मुस्कुराए भी किसी पहचान की खातिर

कल का अखबार था, बस देख लिया, रख भी दिया #Gulzarsaab #Triveni

ये माना इस दौरान कुछ साल बीत गए हैं
फिर भी आँखों में चेहरा तुम्हारा समाये हुए हैं

किताबों पे धूल जमने से कहानी कहाँ बदलती है #Triveni #Gulzarsaab

सब पे आती है, सबकी बारी से
मौत मुंसिफ है, कम-ओ-बेश नहीं

ज़िन्दगी सब पे क्यूँ नहीं आती #Gulzarsaab

किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों से
बड़ी हसरत से तकती हैं
महीनों अब मुलाकातें नहीं होती
जो शामें उनकी सोहबत में कटा करती थीं
अब अक्सर गुज़र जाती है कम्प्यूटर के पर्दों पर
बड़ी बेचैन रहती हैं क़िताबें #Gulzarsaab

एक है जिसका सर दसवें बादल में है
एक है जिसका पांव अभी दलदल में है

एक जो है सतरंगी थाम के उड़ता है
दूसरा पैर उठाता है तो रुकता है
फिरका-परस्ती, वहम परस्ती और गरीबी की रेखाएं

#हिन्दुस्तान में दो-दो हिन्दुस्तान दिखाई देते हैं. #Gulzarsaab

दरख्त
सोचते हैं जब

तो फूल आते हैं
वो धूप में डुबोके
उंगलियां

खयाल लिखते हैं
लचकती शाखों पर
तोह रंग-रंग.लफ़्ज चुनते हैं
खुशबुओं से बोलते हैं
ओर बुलाते हैं
-
हमारा शौक़ देखिये
कि गर्दनें ही काट लेते हैं
जहां कहीं महकता है कोई #Gulzarsaab

बन्जारे लगते हैं मौसम
मौसम बेघर होने लगे हैं

जंगल, पेड़, पहाड़, समंदर
इन्सां सब कुछ काट रहा है
छील छील के खाल ज़मीं की
टुकड़ा टुकड़ा बांट रहा है

आसमान से उतरे मौसम
सारे बंजर होने लगे हैं #Gulzarsaab #KadviHawa