दरख्त
सोचते हैं जब
तो फूल आते हैं
वो धूप में डुबोके
उंगलियां
खयाल लिखते हैं
लचकती शाखों पर
तोह रंग-रंग.लफ़्ज चुनते हैं
खुशबुओं से बोलते हैं
ओर बुलाते हैं
-
हमारा शौक़ देखिये
कि गर्दनें ही काट लेते हैं
जहां कहीं महकता है कोई #Gulzarsaab
दरख्त
सोचते हैं जब
तो फूल आते हैं
वो धूप में डुबोके
उंगलियां
खयाल लिखते हैं
लचकती शाखों पर
तोह रंग-रंग.लफ़्ज चुनते हैं
खुशबुओं से बोलते हैं
ओर बुलाते हैं
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हमारा शौक़ देखिये
कि गर्दनें ही काट लेते हैं
जहां कहीं महकता है कोई #Gulzarsaab