पांडव शिला: हिमाचल की रहस्यमयी चट्टान जो केवल हथेली से हिलती है, पांडवों ने की थी स्थापित

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की सराज घाटी में बसा मझाखल गांव, जिसे अब पांडव शिला गांव के नाम से जाना जाता है, अपनी अनूठी चट्टान के लिए प्रसिद्ध है। बाखली नदी के बाएं तट पर यह विशाल चट्टान एक छोटी चट्टान पर टिकी है। श्रद्धालु और पर्यटक इसे हथेली से हिलाकर इसके चमत्कार को देखते हैं। यह चट्टान पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ी है और आस्था का केंद्र है।

पांडव शिला की पौराणिक कहानी

मान्यता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इस चट्टान को निशानी के तौर पर रखा था। स्थानीय लोग बताते हैं कि भीम ने इस विशाल चट्टान को रास्ते से हटाकर दूसरी चट्टान पर टिका दिया। इसे हथेली से हिलाने पर यह हिलती है, लेकिन अपने स्थान से नहीं हटती। श्रद्धालु इस पर छोटे पत्थर फेंकते हैं। यदि पत्थर चट्टान पर टिक जाता है, तो उनकी मनोकामना पूरी होने की मान्यता है।

धार्मिक महत्व और शिवलिंग

पांडव शिला के पास एक शिवलिंग भी स्थापित है, जिसे श्रद्धालु पूजते हैं। मन्नत पूरी होने पर लोग यहां लोहे के त्रिशूल अर्पित करते हैं। पहले गांव के स्व. राम इसकी नियमित पूजा करते थे, लेकिन अब कोई स्थायी पुजारी नहीं है। फिर भी, यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक बना हुआ है। हिमाचल प्रदेश पर्यटन के अनुसार, ऐसे स्थल हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाते हैं।

यक्षिणी की कथा

इतिहासकार डॉ. हिमेंद्र बाली के अनुसार, पांडव शिला का संबंध करसोग की भंथल पंचायत की पूज्या नागणी जान से भी है। पांडव काल में करसोग और सराज क्षेत्र में दो शक्तिशाली यक्षिणी बहनों का आतंक था। भीम ने इनका वध किया और इन चट्टानों में देवत्व की स्थापना की। तब से यह शिला श्रद्धालुओं के लिए पूजनीय है। यह कथा इस स्थान को और रहस्यमयी बनाती है।

पर्यटकों का आकर्षण

मझाखल गांव की यह चट्टान न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। लोग दूर-दूर से आकर इसे हथेली से हिलाने का अनुभव लेते हैं। स्थानीय युवा नूतन प्रकाश निशु के अनुसार, यह पांडवों के हुक्के की कटोरी का हिस्सा थी। यह अनोखा चमत्कार और प्राकृतिक सुंदरता हर साल हजारों लोगों को यहां खींच लाती है।

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