वित्तीय अनियमितता: चंबा के थनेईकोठी में पंचायत प्रधान को कारण बताओ नोटिस, आठ कामों में गड़बड़ी के आरोप

Himachal News: चंबा जिले के तीसा विकास खंड की थनेईकोठी पंचायत में विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता का खुलासा हुआ। डीसी चंबा ने प्रधान कुलदीप सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया। उन्हें 15 दिनों में जवाब देना होगा, वरना पंचायती राज अधिनियम 1994 के तहत कार्रवाई होगी। खंड विकास अधिकारी की जांच में अनियमितताएं सही पाई गईं। यह मामला ग्रामीणों के लिए निराशाजनक है, जो पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

शिकायत से शुरू हुई जांच

नसरुल्ला नामक शिकायतकर्ता ने प्रधान कुलदीप सिंह पर विकास कार्यों में गड़बड़ी का आरोप लगाया। खंड विकास अधिकारी तीसा ने जांच शुरू की। टीम ने पंचायत में भौतिक और तकनीकी निरीक्षण किया। जांच में शिकायतें सही पाई गईं। मापन पुस्तिका और वास्तविक स्थिति में अंतर मिला। सामग्री का स्टॉक रजिस्टर में इंद्राज नहीं था। इस वित्तीय अनियमितता ने पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

आठ कार्यों में गड़बड़ी

जांच में आठ निर्माण कार्यों में अनियमितताएं मिलीं। पाइपलाइन (नीला गोठ से सौण्डा) में 6.51 लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन सामग्री का कोई रिकॉर्ड नहीं था। मुर्गा शैड और सिंचाई टैंक में भी सामग्री गायब थी। पक्के रास्ते और इंटरलॉक टाइल जैसे कार्यों में लाखों की गड़बड़ी पाई गई। मापन और लेखा-जोखा में लापरवाही सामने आई। यह ग्रामीणों के विश्वास को तोड़ने वाला है।

स्टॉक रजिस्टर में खामियां

जांच में पाया गया कि कई कार्यों में सामग्री खरीदी गई, लेकिन स्टॉक रजिस्टर में दर्ज नहीं थी। पाइपलाइन (बसुआ से कुंडोला) में 1.29 लाख और इंटरलॉक टाइल में 1.78 लाख की गड़बड़ी मिली। ड्रेन और पक्के रास्ते जैसे कार्यों में भी यही स्थिति थी। सामग्री या तो गायब थी या आंशिक रूप से इस्तेमाल हुई। यह लापरवाही ग्रामीण विकास के लिए आवंटित धन के दुरुपयोग को दर्शाती है।

तीन कार्यों की जांच रुकी

जांच समिति तीन कार्यों की जांच नहीं कर पाई। कार्यस्थल पर शिकायतकर्ताओं और बचाव पक्ष के बीच विवाद हो गया। तनाव के कारण भौतिक और तकनीकी निरीक्षण संभव नहीं हुआ। डीसी ने प्रधान को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया। अगर जवाब संतोषजनक नहीं हुआ, तो एकतरफा कार्रवाई होगी। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस वित्तीय अनियमितता पर कड़ी कार्रवाई होगी।

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पंचायत घोटाला: करोड़ों की वित्तीय अनियमितता, प्रधान बर्खास्त; अब पुलिस करेगी कार्यवाही

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की नौर पंचायत में पंचायत घोटाला उजागर हुआ है। 2021 से 2024 के दौरान दो करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। जांच के बाद जिला पंचायत अधिकारी ने प्रधान काहन चंद को तत्काल बर्खास्त कर दिया। शिकायत के आधार पर गठित कमेटी ने कई गंभीर खुलासे किए। अब उप-प्रधान को पंचायत की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

फर्जी भुगतान और हेराफेरी

जांच में पता चला कि मनरेगा कार्यों में साइनबोर्ड नहीं लगाए गए। प्रधान ने अपनी पत्नी के नाम पर 1.85 लाख रुपये का फर्जी भुगतान किया। इंटरलॉक टाइल्स के कार्य में 56,594 रुपये की अतिरिक्त राशि हड़पी गई। अमृत सरोवर निर्माण में 37,800 रुपये का फर्जी खर्च दिखाया गया, लेकिन कोई कार्य नहीं हुआ। इन अनियमितताओं ने ग्रामीणों का भरोसा तोड़ा है।

घटिया सामग्री और बिलों में गड़बड़ी

रिपोर्ट के अनुसार, चादरों की खरीद में अधिक मूल्य दिखाकर हेराफेरी की गई। घटिया गुणवत्ता का सामान खरीदा गया। मजदूरों को भुगतान भी नहीं किया गया। जांच कमेटी ने इन सभी आरोपों की पुष्टि की। पंचायत घोटाला ने स्थानीय प्रशासन को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर किया। ग्रामीणों ने इस कार्रवाई की मांग लंबे समय से की थी।

कानूनी कार्रवाई और बर्खास्तगी

जिला पंचायत अधिकारी दयाराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश पंचायत राज अधिनियम के तहत कार्रवाई की। काहन चंद को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, लेकिन जवाब असंतोषजनक रहा। उन्हें तत्काल बर्खास्त कर दिया गया। पुलिस और भ्रष्टाचार रोकथाम शाखा को सूचित किया गया है। पंचायती राज विभाग अब मामले की गहन जांच कर रहा है।

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पंचायत घोटाला: 10 सालों से बीपीएल सुविधाओं का लाभ ले रहा प्रधान, प्रशासन ने आज तक नहीं किया निलंबित

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की गलयोग-सिणी पंचायत में पंचायत घोटाला सामने आया है। ग्राम पंचायत के प्रधान मोती राम पर आरोप है कि उन्होंने पिछले 10 सालों से बीपीएल और आईआरडीपी योजनाओं का अनुचित लाभ उठाया। सुक्खू सरकार के स्पष्ट नियमों के बावजूद, जो पंचायत जनप्रतिनिधियों को इन योजनाओं का लाभ लेने से रोकते हैं, मोती राम का नाम इन सूचियों में दर्ज है।

प्रारंभिक जांच में खुलासा

खण्ड विकास अधिकारी, निहरी द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में पाया गया कि मोती राम का नाम बीपीएल और आईआरडीपी सूची में शामिल है। यह खुलासा तब हुआ जब स्थानीय लोगों ने इस मामले को उठाया। जांच में मोती राम को अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही का दोषी पाया गया। हैरानी की बात यह है कि मोती राम पिछले पांच सालों तक पंचायत के उपप्रधान रहे और अब प्रधान के पद पर हैं।

पत्नी की नौकरी ने बढ़ाई सनसनी

मामले को और जटिल बनाता है यह तथ्य कि मोती राम की पत्नी आंगनबाड़ी में हेल्पर के पद पर कार्यरत हैं और लगभग 5200 रुपये मासिक वेतन प्राप्त करती हैं। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है, क्योंकि बीपीएल और आईआरडीपी योजनाएं गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पंचायत घोटाला सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है।

कारण बताओ नोटिस जारी

जिला पंचायत अधिकारी अंचित डोगरा ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 145 और नियम 142 के तहत मोती राम को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि क्यों न उन्हें प्रधान पद से निलंबित किया जाए। मोती राम को 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। यदि वे जवाब नहीं देते, तो उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।

कार्रवाई में देरी से सवाल

यह मामला कई महीनों से लंबित है, लेकिन अभी तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। सरकार के निर्देशों के अनुसार, ऐसे मामलों में पंचायत प्रधान को तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। स्थानीय निवासियों में इस देरी को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि यह पंचायत घोटाला न केवल गलयोग-सिणी बल्कि अन्य पंचायतों में भी पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।

आगे की राह

मामले की जांच अभी जारी है। जिला पंचायत अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन और पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। अधिक जानकारी के लिए हिमाचल प्रदेश सरकारी पोर्टल देखें।

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पंचायत भ्रष्टाचार: प्रतिभा सिंह की गोद ली नौण पंचायत में करोड़ों के घोटाले, विजिलेंस ने शुरू की जांच

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के नाचन विधानसभा क्षेत्र की नौण पंचायत में पंचायत भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने 2023 में इस पंचायत को गोद लिया था। उन्होंने 11 करोड़ रुपये का पैकेज और 182 योजनाएं दी थीं। इसका मकसद पंचायत को आदर्श बनाना था। लेकिन यह भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई।

भ्रष्टाचार का खुलासा कैसे हुआ

सोशल मीडिया पर नौण पंचायत के कामों के स्क्रीनशॉट वायरल हुए। एक पुलिया की लागत 10 लाख रुपये बताई गई। लेकिन तस्वीरों में वह साधारण दिखी। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या यह इतनी महंगी हो सकती है। विजिलेंस ब्यूरो की टीम ने मौके पर निरीक्षण किया। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।

घोटालों की लंबी सूची

नौण पंचायत में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, कई योजनाएं कागजों में पूरी दिखाई गईं, लेकिन हकीकत में काम अधूरा है। प्रमुख घोटाले इस प्रकार हैं:

  • श्मशान घाट का स्टोर: 5 लाख का स्टोर गायब, सिर्फ बोर्ड लगा है।
  • पानी के पौंड: कई जगह पौंड बनाए ही नहीं गए।
  • सड़क निर्माण: नौण से बेहरी की सड़क का काम अधूरा।
  • देवता मंदिर की सराय: मसेरन देवता की सराय डीपीएफ में छोटी बनाई गई।
  • श्मशान घाट: सुहा नाल में लाखों की धांधली, काम अधूरा।

धार्मिक स्थलों में भी धांधली

पंचायत भ्रष्टाचार का दायरा देवी-देवताओं के कार्यों तक पहुंचा। कई देवताओं की सराय नहीं बनीं। जहां बनीं, वहां 5 लाख के बजाय 2 लाख भी खर्च नहीं हुए। एक जगह 5 लाख में दो सराय बना दी गईं। यह स्थानीय लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ है।

विजिलेंस की सक्रियता

विजिलेंस ने पंचायत भ्रष्टाचार के इस मामले में जांच तेज कर दी है। सूत्रों का कहना है कि गहन जांच से करोड़ों के घोटाले उजागर हो सकते हैं। दोषी पंचायत प्रतिनिधियों पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद है। यह मामला नौण के लोगों के लिए निराशाजनक है, जिन्हें आदर्श पंचायत का सपना दिखाया गया था।

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