जवाली जल शक्ति विश्रामगृह में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने की तोड़फोड़, वायरल वीडियो ने खोली पोल

Kangra News: जवाली जल शक्ति विश्रामगृह में शुक्रवार रात कुछ शरारती तत्वों ने हंगामा मचाया। अधिशाषी अभियंता अजय शर्मा ने वायरल वीडियो के जरिए इस घटना को उजागर किया। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बिना अनुमति विश्रामगृह में प्रवेश किया। उन्होंने फर्नीचर को नुकसान पहुंचाया और शराब की बोतलें तोड़ीं। यह घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुई है।

जवाली जल शक्ति विश्रामगृह में हुड़दंग का खुलासा

अधिशाषी अभियंता अजय शर्मा ने बताया कि यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने विश्रामगृह में अनधिकृत प्रवेश किया। उन्होंने शराब और मीट का सेवन किया। गंदे हाथों से सोफों को साफ करने के कारण फर्नीचर खराब हो गया। शर्मा ने इस घटना को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि विश्रामगृह के कर्मचारियों ने उन्हें इसकी जानकारी दी। यह व्यवहार सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग को दर्शाता है।

सीसीटीवी में कैद हुई तोड़फोड़ की घटना

घटना की पूरी जानकारी सीसीटीवी फुटेज में दर्ज है। अजय शर्मा ने बताया कि कार्यकर्ताओं ने शराब की बोतलें तोड़ीं और कपड़े फाड़कर फेंके। इसने विश्रामगृह की व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया। शर्मा ने इसकी शिकायत जवाली थाने में दर्ज करने का फैसला किया। उन्होंने सख्त कार्रवाई की बात कही। यह घटना हिमाचल प्रदेश सरकार की संपत्ति के प्रति लापरवाही को उजागर करती है।

सरकारी संपत्ति को नुकसान पर सवाल

अजय शर्मा ने कहा कि विश्रामगृह में इस तरह की हुड़दंगबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि कार्यकर्ताओं ने सोफों को गंदा किया और संपत्ति को नष्ट किया। यह सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का मामला है। शर्मा ने जोर देकर कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की सतर्कता पर भी सवाल उठाए हैं।

जवाली पुलिस थाने में होगी शिकायत

अधिशाषी अभियंता ने स्पष्ट किया कि इस मामले की शिकायत जवाली पुलिस थाने में दर्ज की जाएगी। सीसीटीवी फुटेज को सबूत के तौर पर पेश किया जाएगा। शर्मा ने कहा कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है। इस घटना ने स्थानीय लोगों में भी चर्चा छेड़ दी है। यह मामला जल शक्ति विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है।

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कांगड़ा के भरवाना में आग लगने से जिंदा जला 31 साल का युवक, पुलिस कर रही मामले की जांच

Kangra News: मकान में आग लगने एक युवक जिंदा जल गया। लेकिन उसके जलने का पता आग बुझाने के बाद चला। पुलिस थाना भवारना के तहत पंचायत बड़घवार के वार्ड नंबर पांच में यह दर्दनाक हादसा हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और शव का पोस्टमार्टम करवाकर उसे परिजनों के हवाले कर दिया।

जानकारी के मुताबिक शुक्रवार रात लगभग 11:45 बजे वार्ड नंबर 5 की मंजू बाला ने प्रधान सोनिया बंटा को फोन पर सूचना दी कि उसके मकान के साथ लगते स्लेटपोश मकान में आग लग गई है। इसके बाद प्रधान ने पुलिस को सूचित किया। कड़ी मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड के कर्मियों और स्थानीय लोगों की मदद से आग पर काबू पाया गया। घर के अंदर रहने वाले दोनों भाइयों में से एक बंटू कुमार आग लगने से पहले घर के बाहर ही था। वह मानसिक रूप से थोड़ा बीमार चल रहा है। उसके शोर मचाने पर गांव वाले इकट्ठे हुए और पुलिस व प्रशासन के साथ आग बुझाने में मदद करने लगे। लेकिन छोटे भाई की ओर किसी का ध्यान नहीं गया। सब यही सोच रहे थे कि छोटा भाई भी आग लगने के बाद घर से बाहर निकल गया होगा।

लोगों ने आसपास के घरों में जाकर भी छोटे भाई को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन वह कहीं नहीं मिला। इसके बाद लोगों को शक हुआ कि कहीं वह मकान के अंदर ही न हो। आग बुझाने के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड के कर्मियों ने कच्चे मकान की दूसरी मंजिल का नीचे गिरा मलबा हटाया तो संजू का शव अधजली हालत में मिला। संजू (29) अपने भाई बंटू (31) के साथ रहता था। जबकि उसकी मां रूमला देवी अपने मायके में रहती थी। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण मकान की दूसरी मंजिल में जल रहे चूल्हे को माना जा रहा है। हालांकि, जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। मामले की पुष्टि एसएचओ केहर सिंह ने की है।

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डीएसपी अनिल शर्मा के तबादले पर मचा बवाल, विधायक किशोरी लाल के बेटे का किया था चालान

Kangra News: हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ में तैनात DSP अनिल शर्मा का अचानक तबादला चर्चा का विषय बन गया है। 2015 बैच के इस होनहार और युवा अधिकारी को सिर्फ छह महीने के कार्यकाल के बाद बैजनाथ से पीटीसी डरोह भेज दिया गया। सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनका तबादला बैजनाथ के कांग्रेस विधायक किशोरी लाल के बेटे पर की गई कार्रवाई का नतीजा है?

DSP अनिल शर्मा ने 2 नवंबर को विधायक किशोरी लाल के बेटे का पैराग्लाइडिंग के दौरान नियम तोड़ने और पुलिस से बदसलूकी करने पर चालान किया था। यह मामला चर्चा में आ गया था। अनिल शर्मा की इस त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई के बाद अचानक उनका तबादला कर दिया गया। हालांकि प्रशासन ने इसे सामान्य तबादला बताया है, लेकिन जनता में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह कदम विधायक के दबाव में उठाया गया?

22 साल की उम्र में हिमाचल प्रदेश पुलिस सेवा में सबसे युवा डीएसपी बनने वाले अनिल शर्मा ने बैजनाथ में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उल्लेखनीय काम किए थे। छह महीने के छोटे से कार्यकाल में उन्होंने नशा माफिया, अवैध खनन और यातायात व्यवस्था पर सख्त कार्रवाई की। उनके नेतृत्व में एनडीपीएस एक्ट के तहत 10 केस दर्ज हुए, अवैध शराब के 12 मामलों में कार्रवाई की गई, और सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले कई मामलों पर अंकुश लगाया गया।

इतना ही नहीं, अनिल शर्मा ने युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए और बीड़ व बैजनाथ क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी परियोजनाओं की शुरुआत की। बीड़ में यह परियोजना पूरी हो चुकी थी, जबकि बैजनाथ में काम जारी था। ऐसे अधिकारी, जो जनता के हित में काम कर रहे थे, का अचानक तबादला होना कई सवाल खड़े करता है। क्या डीएसपी का तबादला इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने विधायक के बेटे पर कार्रवाई की? क्या कांग्रेस सरकार में विधायक के परिवार को कानून से ऊपर माना जाएगा? अगर ऐसा है, तो यह प्रदेश में कानून-व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है।

यह घटना दिखाती है कि जब एक पुलिस अधिकारी अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करता है, तो उसे सरकार का समर्थन नहीं मिलता। क्या हिमाचल प्रदेश में प्रशासन बड़ा है या विधायक का बेटा? क्या यह कांग्रेस सरकार का तरीका है कि जो अधिकारी नियमों का पालन करे, उसे ही सजा दी जाए? ऐसे फैसले न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर करते हैं, बल्कि जनता का कानून और न्याय व्यवस्था पर से भरोसा भी उठाते हैं। हिमाचल के लोगों को यह सोचने की जरूरत है कि क्या ऐसे नेताओं के दबाव में काम करने वाली सरकार उनके अधिकारों की रक्षा कर पाएगी?

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दो दिन का अवकाश होने की सूचना मिलते ही घर भागते दिखे कर्मचारी और बच्चे, सड़कों पर लगा जाम

Dharmshala News: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के बाद एक सप्ताह के राष्ट्रीय शोक के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा दो दिन का अवकाश भी घोषित किया गया था।

हालांकि दो दिन के अवकाश की अधिसूचना सुबह देरी से लोगों तक पहुंची। इस समय तक अधिकतर कर्मचारी अपने दफ्तर पहुंच चुके थे। लेकिन दफ्तर पहुंचने के बाद जैसे ही अधिसूचना कर्मचारियों तक पहुंची तो वे अपना सारा काम छोड़कर अपने घरों की ओर दौड़ पड़े।

इसके चलते कांगड़ा जिले के मुख्यालय धर्मशाला की सभी सड़कों पर जाम लग गया। इतना ही नहीं स्कूल, कॉलेज और विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को भी शोक अवकाश के बाद घर भेज दिया गया। जिसके चलते सड़क पर स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों की आवाजाही भी शुरू हो गई। जिसके चलते जाम के बीच बच्चों और लोगों के लिए पैदल चलना भी परेशानी का सबब बन गया। वहीं, सरकारी कर्मचारियों को अचानक तेज गति से अपने घरों की ओर भागता देख आम लोग भी काफी परेशान रहे।

अस्पतालों में मरीजों का तय समय पर उपचार

एक तरफ जहां प्रदेश में दो दिन के शोक अवकाश के चलते सरकारी कर्मचारी तेजी से अपने घरों की ओर भागते नजर आए। वहीं दूसरी तरफ जिला भर के अस्पतालों में ओपीडी या बाह्य रोगी विभाग सुचारू रूप से काम करते हुए मरीजों की जांच करते नजर आए। अधिकांश मरीज उपचार के लिए अस्पतालों में पहुंचे भी, वहीं चिकित्सकों ने भी तय समय के अनुसार अपनी सेवाएं प्रदान की। जोनल अस्पताल धर्मशाला में भी मरीजों को ओपीडी में उपचार मिल पाया।

गौर हो कि लगातार तीन दिन अस्पताल बंद नहीं किए जा सकते। जिसके चलते शनिवार और रविवार को ओपीडी में सेवाएं बंद रहेंगी। जबकि इमरजेंसी और आईपीडी में मरीजों को तय समय के अनुसार उपचार मिलता रहेगा। जबकि अब सोमवार से ओपीडी सुविधा भी तय समय के अनुसार मरीजों को मिलेगी। वहीं जोनल अस्पताल धर्मशाला के एसएमओ डॉ. सुनील भट्ट ने बताया कि शुक्रवार को ओपीडी में तय समय के अनुसार सेवाएं प्रदान की गई।

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अमित शाह के खिलाफ सड़कों पर उतरे भीम आर्मी समेत यह संगठन, जानें क्या बोले रवि कुमार दलित

Dharmshala News: हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में रविदास महासभा, ऑल इंडिया अंबेडकर सभा और भीम आर्मी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ धरने का आयोजन किया था। इस दौरान धरना प्रदर्शन किया गया और रैली भी निकाली गई। दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं के अमित शाह मुर्दाबाद के नारों से आसमान गूंज उठा। इस कार्यक्रम में भारी संख्या में दलित और दूसरे समुदायों के लोग शामिल हुए तथा सभी ने अमित शाह के बयानों पर आपत्ति जाहिर की।

उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री से तत्काल माफी मांगने और इस्तीफा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता बाबा साहब का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर अमित शाह माफी नहीं मांगते और केंद्र सरकार उनको गृहमंत्री के पद से नहीं हटाती तो फिर बड़े पैमाने पर उग्र आंदोलन किए जाएंगे।

इस मौके पर भीम आर्मी हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष रवि कुमार दलित विशेष तौर पर मौजूद रहे। रवि कुमार  ने कहा कि बाबा साहब के कारण आज देश के दलितों की अच्छा खाने, अच्छा पहनने और शिक्षा समेत सभी अधिकार मिले है। पानी पीने तक का अधिकार बाबा साहब भीम राव अंबेडकर ने दिलाया है। वह हमारे लिए किसी भी भगवान या देवता से ऊपर है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाओं को अधिकार दिलाने वाले एक मात्र शख्स का नाम बाबा साहब भीम राव अंबेडकर है। हम उनका इस तरह से संसद में अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे।

रवि कुमार दलित ने पूछा कि जब बाबा साहब ने कानून बनाते समय किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया, सभी को समान रूप से अधिकार दिए तो उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों? उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सभी तक हमारे शीर्ष नेतृत्व से किसी तरह के आदेश नहीं है। जिस दिन हमें शीर्ष नेतृत्व से आदेश मिलेंगे हम इनको इनकी कुर्सी से उतार देंगे। ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति बाबा साहब भीम राव अंबेडकर के सम्मान में गुस्ताखी न कर सके।

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स्टेट अवॉर्डी शिक्षक के 19 वर्षीय बेटे की हार्ट अटैक से हुई मौत, पिता ने कविता में बयान किया दर्ज

Kangra News: हिमाचल प्रदेश में भी युवाओं की हार्ट अटैक से मौत हो रही है। हाल ही में क्रिकेट खेलते समय 29 वर्षीय युवक की मौत हो गई थी। अब ताजा मामले में 19 वर्षीय युवक को हार्ट अटैक आया और उसकी मौत हो गई। मामला हिमाचल प्रदेश के पालमपुर का है।

जानकारी के मुताबिक यह मामला हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के पालमपुर का है। पालमपुर की लाहला पंचायत के गांव पादरा के स्टेट अवार्डी शिक्षक डॉ. विजय कुमार पुरी के 19 वर्षीय बेटे पीयूष की सोमवार को मौत हो गई। उन्हें अचानक हार्ट अटैक आया और उनकी मौत हो गई।

डॉ. विजय पुरी कांगड़ा का जाना-माना नाम हैं और उन्हें साल 2019 में स्टेट टीचर अवार्ड से सम्मानित किया गया था। डॉ. विजय पुरी ने अपने बेटे के जाने के गम को सोशल मीडिया पर एक कविता के जरिए बयां किया।

उन्होंने कविता में लिखा, आज हमारी कॉलोनी में सन्नाटा है। कुछ तो खास बात रही होगी बेटा तुम्हारे व्यक्तित्व में। तुम हर मिलने वाले से मस्ती भरे अंदाज में बात करते थे। तूने मुझे बीच भंवर में नाव में क्यों छोड़ दिया। पिता ने अपने बेटे की मौत का दर्द एक लंबी पोस्ट में बयां किया।

धर्मशाला के पत्रकार डॉ राजीव पथरिया ने सोशल मीडिया पर लिखा कि महज 19 साल की उम्र में पीयूष सबको छोड़कर क्यों चला गया। यह बच्चा सरकार के लिए भी कई सवाल छोड़ गया है। राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित और प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ विजय पुरी जी के 19 वर्षीय बेटे पीयूष की हृदय गति रुकने से अचानक मौत की खबर स्तब्ध करने वाली है। इतनी कम उम्र में अचानक दिल का दौरा पड़ना निश्चित रूप से चिंता का विषय है। चिकित्सा विज्ञान के विशेषज्ञों और सरकार को ऐसे मामलों को गंभीरता से लेना होगा और समाज को कोई राह दिखानी होगी। क्योंकि पिछले कुछ समय से हृदय गति रुकने से सैकड़ों युवा अपनी जान गंवा चुके हैं। भगवान डॉ विजय पुरी जी और उनके परिवार को इस बड़े सदमे को सहन करने की हिम्मत दे। ओम शांति।

कांगड़ा के साहित्यकार पंकज दर्शी ने भी निधन पर दुख व्यक्त करते हुए लिखा कि हमारे प्रिय साहित्यकार भाई डॉ विजय पुरी जी के बेटे का अचानक निधन हो गया है, मैं कुछ कह या लिख ​​नहीं पा रहा हूं, क्या करूं, दर्द ने मुझे भावविहीन कर दिया है।

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बथान पंचायत के सदस्यों ने धीरा एसडीएम के खिलाफ की शिकायत, जानें क्या लगाए गंभीर आरोप

Kangra News: सुलह विधानसभा क्षेत्र की बथान पंचायत ने धीरा एसडीएम के खिलाफ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और कांगड़ा के डिप्टी कमिश्नर हेम राज बेरवा से शिकायत की है।

पंचायत सदस्यों ने आरोप लगाया कि एसडीएम ने स्थानीय निवासियों को सरकारी जमीन को साफ करने के लिए जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी, जिस पर पिछले बरसात के मौसम में पंचायत ने वन विभाग के सहयोग से पौधे लगाए थे। मीडिया को संबोधित करते हुए पंचायत प्रधान सीमा देवी और उपप्रधान सतपाल ने एसडीएम की कार्रवाई पर असंतोष जताया।

उन्होंने दावा किया कि ग्रामीणों और स्थानीय निकाय के बीच विवादों को सुलझाने में पंचायत और वन विभाग दोनों को शामिल करने के उपायुक्त कांगड़ा के निर्देशों के बावजूद पौधों को उखाड़ने से पहले पंचायत से परामर्श नहीं किया गया। कथित तौर पर ऑपरेशन के दौरान वन विभाग को भी साइट से दूर रखा गया था।

सीमा देवी और सतपाल ने मीडिया को अपनी शिकायतों की प्रतियां जारी कीं। उन्होंने आगे बताया कि पौधरोपण अभियान के दौरान सतपाल पर उन्हीं व्यक्तियों ने हमला किया था जिन्होंने कथित तौर पर जमीन साफ की थी। यद्यपि मामला दर्ज किया गया और गिरफ्तारियां भी हुईं, लेकिन बाद में आरोपियों को अदालतों से जमानत मिल गई।

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सुक्खू सरकार ने प्रदेश भर में बंद किए 1865 संस्थान, विपक्ष ने सदन में किया जमकर हंगामा

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने बीते दो वर्षों में 1,865 संस्थान बंद करने का फैसला लिया है। इनमें से कई संस्थाओं को मर्ज किया गया, जबकि कुछ पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं। राज्य सरकार ने 37 नए संस्थान खोले हैं और 103 नए संस्थान नोटिफाई किए हैं। इसके अलावा, 1,094 प्राइमरी स्कूल भी बंद किए गए हैं।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान इस मामले पर सवाल उठाए गए, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। कृषि, पशुपालन, आयुष, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य विभागों के संस्थान बंद करने का मामला सामने आया। कृषि विभाग के सात, पशुपालन के 101, स्वास्थ्य विभाग के 257, और वन विभाग के दो संस्थान बंद किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, लोक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग, और श्रम विभाग समेत कई अन्य विभागों की बहुउद्देशीय परियोजनाएं भी बंद की गईं।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने चुनावी लाभ के लिए संस्थान खोले थे, जबकि उनकी सरकार जरूरत के हिसाब से संस्थान खोल रही है। उन्होंने दावा किया कि हर फैसले में प्रदेश की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। हालांकि, विपक्ष ने इस जवाब पर असंतोष व्यक्त किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि कई संस्थान जनता के हित में खोले गए थे और अब सरकार उन्हें बंद कर रही है।

इस मुद्दे पर विपक्ष ने विधानसभा से वॉकआउट किया, हालांकि इसे आधिकारिक रूप से दर्ज नहीं किया गया, क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष ने इस सवाल पर विस्तृत चर्चा की अनुमति दी थी।

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हिमाचल सरकार पर बकाया है कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का 8643 करोड़, सीएम सुक्खू ने दी जानकारी

Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का कुल 8,643 करोड़ रुपये का बकाया इस वर्ष 31 जुलाई तक लंबित था, जबकि महंगाई भत्ते (डीए) की तीन किस्तें अभी जारी होनी हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शनिवार को विधानसभा में यह जानकारी दी।

भाजपा विधायकों रणधीर शर्मा और जनक राज के सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को 53 प्रतिशत डीए देती है, जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार के कर्मचारियों को उनके मूल वेतन का 42 प्रतिशत डीए मिलता है।

उन्होंने कहा कि 31 जुलाई, 2024 तक सरकारी कर्मचारियों के चिकित्सा बिलों की प्रतिपूर्ति के लिए 12.83 करोड़ रुपये तथा पेंशनभोगियों के चिकित्सा बिलों की प्रतिपूर्ति के लिए 57.92 करोड़ रुपये का भुगतान भी लंबित है।

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हिमाचल में संस्थान बंद करने के खिलाफ विपक्ष ने किया वॉकआउट, विधानसभा में हुआ जमकर हंगामा

Himachal Vidhan Sabha Winter Session At Tapovan: हिमाचल विधानसभा के शीतकालीन सत्र (Vidhan Sabha Winter Session)का आज अंतिम दिन है। प्रशनकाल के दौरान प्रदेश में संस्थान बंद किए जाने को लेकर सदन में हंगामा हो गया।

बीजेपी विधायकों ने बंद किए गए संस्थानों को लेकर सरकार को हमला बोला। सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई । प्रदेश में 1865 संस्थानों को बंद करने के सवाल पर सीएम द्वारा दिए गए जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में नारेबाजी करते हुए वॉकआउट किया। चर्चा के दौरान सीएम ने कहा कि बंद किए गए संस्थानों को आवश्यकता अनुसार दोबारा शुरू किया जाएगा। हालांकि, विपक्ष ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ‘नीड बेस’ का क्राइटेरिया क्या है।

पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह ने ऐसा कभी नहीं किया

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर(Leader of Opposition Jai Ram Thakur) ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने राजनीतिक मंशा के तहत खोले गए सभी संस्थान बंद कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि एक हजार से अधिक प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का जो आंकड़ा दिया गया, वह झूठा है। उन्होंने सीएम पर सदन में झूठ बोलने का आरोप लगाया।

पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह (Former CM Virbhadra Singh) ने ऐसा कभी नहीं किया। इन स्कूलों को बंद करके बच्चों को शिक्षा से वंचित किया गया है। यह निर्णय बदले की भावना से लिया गया है।उन्होंने कहा वीरभद्र सिंह ने कहा था कि प्रदेश का एक भी बच्चा अशिक्षित नहीं रहेगा। इसके लिए उन्हें संस्थान खोलने पड़े, तो भी वह ऐसा करेंगे। लेकिन वर्तमान सीएम इसके विपरीत केवल राजनीतिक मंशा के तहत काम कर रहे हैं।

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