हिमाचल में संस्थान बंद करने के खिलाफ विपक्ष ने किया वॉकआउट, विधानसभा में हुआ जमकर हंगामा

Himachal Vidhan Sabha Winter Session At Tapovan: हिमाचल विधानसभा के शीतकालीन सत्र (Vidhan Sabha Winter Session)का आज अंतिम दिन है। प्रशनकाल के दौरान प्रदेश में संस्थान बंद किए जाने को लेकर सदन में हंगामा हो गया।

बीजेपी विधायकों ने बंद किए गए संस्थानों को लेकर सरकार को हमला बोला। सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई । प्रदेश में 1865 संस्थानों को बंद करने के सवाल पर सीएम द्वारा दिए गए जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में नारेबाजी करते हुए वॉकआउट किया। चर्चा के दौरान सीएम ने कहा कि बंद किए गए संस्थानों को आवश्यकता अनुसार दोबारा शुरू किया जाएगा। हालांकि, विपक्ष ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि ‘नीड बेस’ का क्राइटेरिया क्या है।

पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह ने ऐसा कभी नहीं किया

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर(Leader of Opposition Jai Ram Thakur) ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने राजनीतिक मंशा के तहत खोले गए सभी संस्थान बंद कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि एक हजार से अधिक प्राइमरी स्कूलों को बंद करने का जो आंकड़ा दिया गया, वह झूठा है। उन्होंने सीएम पर सदन में झूठ बोलने का आरोप लगाया।

पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह (Former CM Virbhadra Singh) ने ऐसा कभी नहीं किया। इन स्कूलों को बंद करके बच्चों को शिक्षा से वंचित किया गया है। यह निर्णय बदले की भावना से लिया गया है।उन्होंने कहा वीरभद्र सिंह ने कहा था कि प्रदेश का एक भी बच्चा अशिक्षित नहीं रहेगा। इसके लिए उन्हें संस्थान खोलने पड़े, तो भी वह ऐसा करेंगे। लेकिन वर्तमान सीएम इसके विपरीत केवल राजनीतिक मंशा के तहत काम कर रहे हैं।

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हिमाचल विधानसभा में लोकसभा की तर्ज पर पहली बार शुरू हुआ शून्यकाल, सात विधायकों ने उठाए जनहित के यह मुद्दे

Himachal News: लोकसभा की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा में भी शून्यकाल शुरू हो गया है। शुक्रवार को सत्र के तीसरे दिन तपोवन विधानसभा में शून्यकाल के पहले दिन सात विधायकों ने जनहित से जुड़े मामले उठाए।

शून्यकाल की समय अवधि आधे घंटे की रहेगी। सदन की कार्यवाही शुरू होने से एक घंटा पहले विधानसभा सचिवालय को इसके तहत प्रस्ताव देने होंगे। हर विधायक को बोलने के लिए दो से तीन मिनट का अधिकतम समय दिया जाएगा। अधिक सवाल आने पर मामले की प्राथमिकता के आधार पर शून्यकाल में सवाल शामिल किए जाएंगे। बीते एक साल के दौरान सदन में उठाए गए मामलों को शून्यकाल में नहीं उठाया जा सकेगा। सवालों की सार्थकता को जांचने के बाद ही विधानसभा सचिवालय शून्यकाल के लिए सवाल चयनित करेगा। शून्यकाल के दौरान उठाए जाने वालों मामलों को आगामी कार्यवाही के लिए संबंधित मंत्रियों और केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

संबंधित कैबिनेट मंत्री शून्यकाल में भी अपना पक्ष रख सकेंगे। उधर, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, नेता विपक्ष जयराम ठाकुर सहित मंत्रियों जगत सिंह नेगी और डॉ. धनीराम शांडिल ने विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को शून्य काल शुरू करने पर बधाई दी। सभी ने कहा कि पूर्व की सरकारों ने भी यह प्रयास किए लेकिन कुलदीप सिंह पठानिया को इसमें सफलता मिली है।

बता दें कि हिमाचल विधानसभा में दो दिन तक स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा से गतिरोध बनने के चलते 18 दिसंबर से शून्य काल की शुरूआत नहीं हो सकी। शून्यकाल शुरू करने का यह प्रयोग यूं तो मानसून सत्र में हो चुका था, लेकिन एसओपी न बनने पर उस वक्त इसे शीत सत्र के लिए टाला गया था। अब इसे एसओपी के साथ शुक्रवार को शुरू किया गया। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने शून्यकाल शुरू करने की आधिकारिक घोषणा की।

60 किलोमीटर के दायरे में दो बार टोल टैक्स लगाना गलत : अनुराधा

शून्यकाल में पहला मामला उठाते हुए लाहौल-स्पीति से कांग्रेस विधायक अनुराधा राणा ने किरतपुर-मनाली फोरलेन पर टकोली और डोहलूनाला में टोल टैक्स वसूलने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि 60 किलोमीटर के दायरे में दो जगह टोल टैक्स नहीं लेने की बात केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने भी की है। इसके बावजूद टकोली और डोहलूनाला में ऐसा करने की तैयारी है। इससे लाहौल-स्पीति से आने-जाने वालों को आर्थिक नुकसान होगा। केंद्र सरकार के नियमों के भी यह खिलाफ है। जवाब में लोकनिर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार के मामला उठाने के बाद टकोली में टोल टैक्स को कुछ समय के लिए स्थगित किया गया। केंद्र सरकार के समक्ष इस मामले को उठाया गया है।

नई पंचायतों के गठन प्रस्ताव ग्राम सभा से पास होने जरूरी नहीं : अनिरूद्ध

बिलासपुर से भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने नई ग्राम पंचायतों के गठन का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार नई पंचायतें बना रही हैं। ग्रामसभा के प्रस्ताव मांगे गए हैं। सारा रिकॉर्ड हमारे पास है, कैसे नई पंचायतें बनेंगी, इस व्यवस्था को सरकारी स्तर से ठीक से लागू किया जाए। पंचायतों के अलावा विधायकों के पास भी इसके प्रस्ताव आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई पंचायत प्रधान इस बाबत प्रस्ताव नहीं भेज रहे हैं। जवाब में पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि जनगणना का काम चल रहा है। इसी बीच नई पंचायतों का भी गठन हो रहा है। केवल यह विधान नहीं है कि ग्राम पंचायत से इनका पास होना जरूरी है। इसके लिए सीधे भी विभाग को प्रस्ताव भेजे जा सकते हैं। इस संबंध में विभागीय स्तर पर भी विचार किया जा सकता है। मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि अगर पंचायत के स्तर पर राजनीति की वजह से मामले नहीं बढ़ पा रहे हैं तो विभाग को सीधे भेजे प्रस्ताव पर भी विचार किया जा सकता है।

केवल पठानिया ने फोरलेन निर्माण से कूहले बंद होने का मामला उठाया

शाहपुर से विधायक केवल सिंह पठानिया ने पठानकोट-मनाली फोरलेने के निर्माण के चलते शाहपुर सहित कई क्षेत्रों में कूहलों के बंद होने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि एनएच की ओर से डंपिंग करने से कई कूहलें बंद हो गई हैं। इस कारण किसान गेहूं की बिजाई नहीं कर सके। उनके क्षेत्र में 22 कूहलें बंद हो गई हैं। उन्होंने पूछा कि क्या शाहपुर बाजार में पांच मीटर चौड़ाई कम करने को लेकर कोई फैसला हुआ है या नहीं। पठानिया ने रोड क्रास करने के लिए क्रासिंग बनाने और गेहूं की फसल नहीं कर पाने के लिए मुआवजा देने की मांग भी की।

संजय रतन ने की दाड़ी में स्वतंत्रता सैनानी स्मारक बनाने की मांग

कांग्रेस विधायक संजय रतन ने दाड़ी में स्वतंत्रता सैनानी स्मारक बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि दस साल पहले इस बारे में घोषणा हुई थी। देश को आजादी दिलाने वालों की याद को जिंदा रखने के लिए स्मारक बनाना जरूरी है। उन्होंने स्वतंत्रता सैनानी बोर्ड भी गठित करने की मांग की। भाजपा विधायक सुखराम चौधरी ने सितंबर के दौरान पांवटा साहिब क्षेत्र में बादल फटने से हुए नुकसान पर सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि कई लोगों की उपजाऊ भूमि बह गई है। पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रभावितों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। भाजपा विधायक जनकराज ने भेड़ पालकों की अनदेखी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकारी अनदेखी से लोग पुराने व्यवसाय को छोड़ रहे हैं। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले को लेकर वन विभाग से चर्चा की जाएगी।

नालागढ़ में एथेनॉल प्लांट ने कर दिए 12 बोर : हरदीप

कांग्रेस विधायक हरदीप बावा ने कहा कि नालागढ़ में एक एथेनॉल प्लांट ने पानी के लिए 12 बोर कर दिए हैं। इस उद्योग ने अपने प्रस्ताव में जल नहर बनाने की बात कही थी लेकिन अब भूमिगत जल का प्रयोग करने के लिए बोर किए जा रहे हैं। इससे आसपास की 36 पेयजल और सिंचाई योजनाएं प्रभावित होंगी। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने बीते दिनों उनके क्षेत्र में कई योजनाओं का शुभारंभ भी किया। इन योजनाओं पर भी संकट खड़ा हो गया है। जवाब में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि नालागढ़ में भूमिगत जल का स्तर बहुत कम हो गया है। यहां का 70 फीसदी भूमिगत जल प्रयोग हो चुका है। अब हमें भूमि को रिचार्ज करने के लिए सोचना चाहिए। मुकेश ने कहा कि विभागीय टीम को उद्योग के निरीक्षण के लिए भेजा जाएगा। अगर डीपीआर के खिलाफ काम हो रहा होगा तो उचित कार्रवाई की जाएगी।

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मुख्यमंत्री सुक्खू का बड़ा ऐलान, कहा, भ्रष्टाचार रोकने के लिए लाया जाएगा एक्ट, लीगल सुझावों पर किया जा रहा विचार

Himachal News: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चर्चा का जबाव देते हुए सदन में कहा कि भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए एक्ट लाया जाएगा। इसके लिए सरकार गंभीरता से सोच रही है, और लीगल सुझावों पर विचार किया जा रहा है।

इसके तहत चेंलाइजेशन के लिए 1500 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं, तो वहां पर खनन व अवैध खनन न किए जाने को लेकर नीति लाई जाएगी। सीएम सुक्खू ने कहा कि जंगल कटने की बात सदन में जोर शोर से उठी है। इस विषय को लेकर जंगलों को कटान को खोलने के लिए समय व सिस्टम निर्धारित किए जाने को लेकर काम किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पेडों के कटान को प्रतिबंधित किए जाने पर विचार कर रही है, जबकि उसे कब खोलना है उसका समय भी तय किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 19 प्रजातियों के पेड़ो को पूर्व सरकार ने काटने की अनुमति दे दी थी, जिसे अब घटाकर 13 कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की ओर से लाए गए प्रस्ताव में उनके नेताओं के खिलाफ अधिकतर मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता व ज़ीरो टॉलरेंस के साथ काम कर रही है। उन्होंने भाजपा की चर्चा की कड़ी निंदा की।

सीएम सुक्खू ने कहा कि नियम 67 प्रस्ताव की चर्चा पर विपक्ष इतना गम्भीर था कि उस समय मात्र 14 विधायक ही सदन पर ही बैठे हुए थे। सीएम ने पत्र बम मामले में पहले ही दिन एफआईआर दर्ज करवाई थी। जो अमोल नामक लड़के के खिलाफ दर्ज हुई थी, ये भरमौर से पत्र बम चल रहा था। पुलिस थाना बालूगंज में एफआईआर दर्ज करवाई थी। 18 अगस्त 2023 को इस पत्र का फोटो खींचकर वायरल किया गया। इस मामले में भाजपा के एक विधायक को बुलाया गया, जिन्होंने जानकारी न होने की बात कही। उन्होंने अपने मित्र की ओर से इस पत्र को अपलोड किए जाने की बात कही। 25 करोड़ की चिट्ठी में अमोल ठाकुर का कोई व्यक्ति ही नहीं है।

सीएम सुक्खू ने कहा कि जो प्रदेश के हित का कार्य करेगा, भाजपा की वॉशिंग मशीन हम भी खरीद रहे हैं। जांच में पाया गया कि ऐसे मामले में संलिप्त नहीं थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप पर पूर्व सरकार की ओर से केसीसीबी के चयरेमेंन बनाने को लेकर जांच चलती है। लेकिन भाजपा में शामिल होने पर उन्हें क्लीन चिट्टी दे दी गई है, ओर उन्होंने फिर चुनाव भी लड़ा। सीएम ने कहा कि भाजपा का कच्चा चिट्ठा आंतरिक कलह का सबसे बड़ा सबूत है। किन्नौर के शोंग टोंग प्रोजेक्ट 2012 में पटेल कंपनी को अवार्ड किया गया, जिसे पांच वर्ष में पूरा करना था। प्रोजेक्ट को 2019 को पहली एक्सटेंशन ऑफ टाइम इओटी दी गई, 1488 दिनों के लिए दी गई। उन्होंने कहा कि 2018 में तत्कालीन सरकार ने रेट बढ़ाकर 99 रुपए प्रति क्यूब का रखा, जिसे ही अभी जारी रखा गया है।

उन्होंने कहा कि शराब ठेकों की बात की, जिसमें चार साल में 600 करोड़ कमाया था, उसमें एक साल में ही 600 करोड़ कमाए, तो पूर्व सरकार के समय में जो हुआ उसे क्या महाघोटाला कहेंगे। सीएम ने कहा कि मात्र पांच से सात प्रतिशत बढ़ोतरी से रिन्यू किए गए। जिस पर भाजपा विधायकों की ओर से जोरदार हंगामा सदन में करते हुए नारेबाजी भी की गई। इसके बाद सत्तापक्ष की मौजूदगी में सीएम सुक्खू ने चर्चा में अपनी बात जारी रखी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बद्दी में 118 नियमों के तहत विधायक की ओर से जमीन खरीदी गई। नादौन में ज़मीन 2015 में ज़मीन चार लाख 75 हजार की स्टैंप ड्यूटी दी थी। अब एनएच होने के बाद छह करोड़ 70 लाख एचआरटीसी को दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के लोगों ने कई स्थानों पर ज़मीने खरीद रखी हैं। जबकि वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सबसे पहले सबऑर्डिनेट सलेक्शन बोर्ड को भंग करके 14 एफआईआर दर्ज कर 48 लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की, जिसमें नौ कर्मचारी थे, जबकि अन्य भी शामिल थे। इनके मुख्यमंत्री ने एक कंपनी को 123 करोड़ की 150 बीघा भूमि दो करोड़ 81 लाख में दे दी। एक ही कंपनी को तीन बार एक रुपए स्कवेयर मीटर के हिसाब से 300 बीघा भूमि प्रदान कर दी गई। ये कंपनी प्लाट काटकर अन्य कंपनियों को प्लॉट बेचे जा रहे हैं। नादौन में ईडी ने छापा मारा है, जोकि ज्ञान चंद को मेरा समर्थक बताया गया, जोकि कभी अनुराग व संजय का भी बन जाता है। 10 वर्ष पहले प्रेस कांफ्रेंस की थी, जिसमें मेरे विधायक रहते आरोप लगाए, तब उनके खिलाफ 10 सालों से केस चल रहा है। पूर्व उधोग मंत्री की ओर से ऑक्शन करवाई गई थी, जिसमें उन्हें क्रशर मिला था।

सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि उनके कार्यकाल में पुलिस भर्ती घोटाला हुआ। सीएम कार्यालय तक का इसमें नाम आया, तब पेपर कैंसिल करना पड़ा। सुंदरनगर में जहरीली शराब से मौत हुई है, फिर भी ठेके उन्ही के रिन्यू होते रहे। टूरिज्म में 18 फीसदी जीएसटी आती है, इसके तहत क्रूज चलाया गया। इसमें दो ठेकेदार की लड़ाई थी, जिसे सदन में उठाने का प्रयास किया जा रहा है। 40 से 50 वोटर बॉडी को कंपनियां आकर चला सकती है, जिससे राज्य को रेवेन्यू मिलेगा और पर्यटन को भी विकसित किया जाएगा। ग्रीन एनर्जी पर उन्होंने कहा कि पेखुवाला पर भी गलत आरोप लगाए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए अरविटेशन की प्रक्रिया को खत्म किया गया है। जिससे व्हाईट फ्लावर व अडानी का केस भी अच्छे वकील रखने से केस जीते हैं, ओर 64 करोड़ मामले में भी जीतेंगे।

सीएम ने कहा कि भाजपा ने एक सौ करोड़ की जगह यमुनानगर की साढ़े चार करोड़ में बेच दी, जिसे जल्द ही कैंसिल करवाया गया। होटलों को बेचने नहीं बनाने आए हैं, इसे लेकर सरकार कई तरह के तरीकों पर बात कर सकते हैं। सरकार कुछ करना चाहेगी, तो वह केबिनेट में लाया जाएगा। दहशरा में तंबोला मामले को पकड़कर दोबारा 2.12 करोड़ में दिया गया।

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हिमाचल सरकार धर्मार्थ संस्थाओं को दे सकेगी 30 एकड़ जमीन, सीएम सुक्खू बोले, भ्रष्टाचारियों के खिलाफ होगी कार्यवाही

Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार धर्मार्थ संस्थाओं (चैरिटेबल ट्रस्ट) को 30 एकड़ तक जमीन व संस्थागत ढांचा हस्तांतरित करने की मंजूरी दे सकेगी। विधानसभा सत्र शीतकालीन सत्र के पहले दिन राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने हिमाचल प्रदेश भू जोत अधिकतम सीमा संशोधन विधेयक 2024 पेश किया।

विधेयक पर चर्चा के बाद इसे पारित किया जाएगा। भू जोत अधिनियम की धारा-5 में संशोधन करते हुए सरकार ने इसे प्रस्तावित किया है। इसके तहत धार्मिक या आध्यात्मिक संस्थाओं को हिमाचल में संस्थागत ढांचे व जमीन को सहयोगी संस्थाओं के नाम स्थानांतरित करने की छूट मिल सकेगी।

सरकार ने संशोधन विधेयक में स्पष्ट किया है कि यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता है तो जमीन व संस्थागत ढांचे तो सरकार अपने अधीन कर सकेगी।

भू जोत अधिनियम इसकी अनुमति नहीं देता

राधा स्वामी सत्संग ब्यास ने राज्य सरकार से कई बार अनुरोध किया था कि उसके भोटा चैरिटेबल अस्पताल की भूमि और भवन को चिकित्सा सेवाओं के बेहतर प्रबंधन के लिए जगत सिंह मेडिकल रिलीफ सोसायटी को हस्तांतरित करने की अनुमति दी जाए।

यह इसका ही सहयोगी संगठन है। भू जोत अधिनियम इसकी अनुमति नहीं देता। इस कारण सरकार को यह बदलाव लाना पड़ा। इसमें तर्क दिया था कि यह चैरिटेबल अस्पताल है। इन्हें अस्पताल के लिए मशीनरी व अन्य उपकरण खरीदने के लिए भारी भरकम जीएसटी चुकाना पड़ता है। बीते दिनों राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई।

मंत्रिमंडल में चर्चा के बाद शीतकालीन सत्र के पहले दिन राजस्व मंत्री ने संशोधन विधेयक सदन में पेश कर दिया। चर्चा के बाद अब इस विधेयक के पारित होने से भूमि हस्तांतरण की राह आसान हो जाएगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जमीन को बेचते हैं या अन्य उपयोग के लिए लाते हैं तो सरकार इसे अपने अधीन कर लेगी।

भ्रष्टाचारियों पर होगी सख्त कार्रवाई: सुक्खू

भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। राजनीति में आरोप- प्रत्यारोप तो लगते हैं लेकिन आरोपों में सच्चाई होना भी जरूरी है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बुधवार सायं तपोवन में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सदन में विपक्ष पूरी तरह से गंभीर नहीं है।

भाजपा के लिए भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं है। भाजपा नेता भ्रष्टाचार के आरोप लगाने की प्रक्रिया में आगे आना चाहते हैं। बकौल सुक्खू, विडंबना यह है कि भाजपा के विधायक भ्रष्टाचार के नाम पर जमीनों की खरीद-फरोख्त की बातें कर रहे हैं लेकिन उनके पास तथ्य कोई नहीं है।

वह खुद कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार के मामले में विपक्ष चर्चा करे। नेता प्रतिपक्ष रैली में ही भाग लेने के लिए जाते रहे और सदन में कम रहे। विपक्ष किसी भी मुद्दे पर कहीं पर गंभीर नहीं है। विपक्ष की तो यह मंशा थी कि नियम 67 के तहत चर्चा उन्हें नहीं मिलेगी और वाकआउट कर जाएंगे।

सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, इसलिए विपक्ष को वाकआउट का मौका नहीं मिला। इन पर लागू नहीं होगा नियम इस अधिनियम के प्रविधान चाय बागानों, केंद्र व राज्य सरकार के स्वामित्व वाली भूमि, रजिस्ट्रीकृत सहकारी कृषि सोसायटियों की भूमि, राज्य तथा केंद्रीय सहकारी बैंकों व अन्य बैंकों की भूमि, स्थानीय प्राधिकरणों या उनमें निहित भूमि व चाय संपदाओं पर लागू नहीं होंगे।

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हिमाचल में कर्मचारियों को नहीं मिलेंगे अनुबंध सेवाकाल के वरिष्ठता और वित्तीय लाभ, आज विधानसभा में पास हो सकता है विधेयक

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों को अनुबंध सेवाकाल का वरिष्ठता और वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा। साल 2003 से यह व्यवस्था लागू होने जा रही है। बुधवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस संदर्भ में सदन के पटल पर हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा की शर्तें विधेयक रखा।

वीरवार को सदन में चर्चा के यह विधेयक पारित होगा। इस विधेयक को लाने के पीछे एक प्रमुख चिंता राज्य पर पड़ने वाला संभावित वित्तीय बोझ है। अनुबंध सेवाकाल का लाभ देने से कर्मचारियों को न केवल अतिरिक्त संसाधनों का भारी आवंटन करना पड़ेगा, बल्कि पिछले 21 वर्षों से अधिक समय से वरिष्ठता सूची में भी संशोधन करना होगा।

राज्य की कांग्रेस सरकार इस विधेयक के माध्यम से प्रदेश के कर्मचारियों से संबंधित महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रही है। विधेयक पारित होने के बाद कर्मचारियों को ज्वाइनिंग की तारीख से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ नहीं मिलेंगे। कर्मचारियों की वरिष्ठता अब उनके नियमित होने के बाद तय की जाएगी। अनुबंध सेवाकाल को इसमें नहीं जोड़ा जाएगा। यह बदलाव विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए हैं जिनकी वरिष्ठता को लेकर पहले अदालत से आदेश जारी किए गए थे। इन आदेशों के चलते राज्य खजाने पर बोझ बढ़ने की संभावना थी।

विधेयक के अनुसार बिल का उद्देश्य नियमित सरकारी कर्मचारियों व अनुबंधित नियुक्तियों के हितों के बीच सामंजस्य स्थापित करना है। मुख्यमंत्री की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई है कि यह विधेयक भारत के संविधान के अनुच्छेद-309 से अधिकार लेता है, जिसके तहत सार्वजनिक कर्मचारियों की भर्ती और सेवा शर्तों को नियंत्रित किया जाता है। हिमाचल में अनुबंध आधार पर नियुक्तियां 2003 में शुरू हुईं, जिसमें नियुक्ति पत्रों में सेवा शर्तों का स्पष्ट उल्लेख किया गया। कर्मचारियों को यह अवगत कराया गया था कि अनुबंध के तहत उनका कार्यकाल वरिष्ठता या नियमित कर्मचारियों को मिलने वाले अन्य लाभों के लिए नहीं गिना जाएगा।

इसके बावजूद अनुबंध नियुक्तियों को भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में शामिल करने से यह धारणा बनी कि ऐसी नियुक्तियां नियमित रोजगार के बराबर हैं। विधेयक के अनुसार अनुबंध के आधार पर नियुक्ति करने का उद्देश्य उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान मानने का कभी नहीं था। उनकी सेवा शर्तें उनकी ओर से हस्ताक्षरित समझौतों से नियंत्रित होती हैं और इस प्रकार वे नियमित नियुक्तियों के समान सार्वजनिक सेवाओं का हिस्सा नहीं हैं।

कोर्ट के आदेशों पर देने पड़ रहे हैं वरिष्ठता के लाभ

सरकार के उच्च अधिकारियों ने बताया कि कोर्ट के माध्यम से कई कर्मचारियों को अनुबंध सेवाकाल का वरिष्ठता लाभ देना पड़ा है। रोजाना इस प्रकार के मामले कोर्ट में लग रहे हैं। ऐसे में सरकार को विधेयक लाकर इस व्यवस्था को बंद करना पड़ रहा है। ताज मोहम्मद बनाम लेखराज केस ने सरकार की इन दिनों परेशानी बढ़ाई हुई है। विधेयक पारित होने के बाद अनुबंध सेवाकाल से वरिष्ठता और वित्तीय लाभ देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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हिमाचल प्रदेश में हर महीने वेतन पर खर्च होते है 13 अरब रुपए, मुख्यमंत्री सुक्खू ने दी जानकारी

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र धर्मशाला में चल रहा है. सत्र की कार्यवाही के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्य जनहित के साथ अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार से सवाल करते हैं. प्रश्नों को तारांकित और अतारांकित प्रश्नों के श्रेणी में बांटा जाता है.

तारांकित प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने बुधवार को सदन को ओल्ड पेंशन स्कीम जुड़ी अहम जानकारी दी है. हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रश्न संख्या- 2165 के जवाब में बताया कि बीते दो सालों में दिनांक 30 नवंबर, 2024 तक न्यू पेंशन स्कीम से ओल्ड के तहत आने वाले कुल 7 हजार 355 सेवानिवृत अधिकारी और कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन स्कीम का फायदा दिया जा चुका है. यह सवाल नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने पूछा था.

वेतन भुगतान पर हर महीने 13 अरब से ज्यादा का खर्च

इसी तरह धर्मशाला से विधायक सुधीर शर्मा ने भी सरकार से कर्मचारियों के वेतन और रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन को लेकर सवाल किया. मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन को बताया कि हिमाचल प्रदेश में सरकारी विभागों, आयोगों, निगमों और बोर्डों में लगभग 2 लाख 17 हजार 010 अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं.

इनका मासिक वेतन लगभग 13 अरब 2 करोड़ 26 लाख 5 हजार 165 रुपये है. वहीं, पेंशनर्ज़ या फैमिली पेंशनर्ज की कुल संख्या लगभग 2 लाख 10 हजार 992 है. इनका मासिक पेंशन बिल लगभग 7 अरब 30 करोड़ 35 लाख 95 हजार 332 रुपये है. यह जवाब मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रश्न संख्या- 762 के जवाब में दिया. यह सवाल बीजेपी विधायक सुधीर शर्मा ने किया था.

14वीं विधानसभा का सातवां सत्र धर्मशाला में जारी

हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र धर्मशाला में बुधवार आज से ही शुरू हुआ है. इस सत्र के कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई. यह हिमाचल प्रदेश की 14वीं विधानसभा का सातवां सत्र है. सत्र की कार्यवाही की शुरुआत नेवा ऐप की लॉन्चिंग के साथ हुई. इसके बाद प्रश्न काल की शुरुआत होनी थी, लेकिन इससे पहले ही विपक्ष राज्य में हो रहे कथित भ्रष्टाचार के आरोप को लेकर नियम- 67 के स्थगन प्रस्ताव लेकर आया. हिमाचल प्रदेश विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा जारी है. इस पर विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्य हिस्सा ले रहे हैं.

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शीतकालीन सत्र के पहले दिन सुक्खू सरकार ने पेश किए चार विधेयक, चारों ध्वनिमत से हुए पारित

Himachal Vidhan Sabha Winter Session Tapovan: हिमाचल विधानसभा का शीतकालीन सत्र (Winter Session) आज से तपोवन (Tapovan) में शुरू हो गया है। भोजन अवकाश के बाद संबंधित मंत्रियों ने चार विधेयक सदन में प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें सरकारी कर्मचारी की भर्ती और सेवा की शर्तें विधेयक 2024, प्रदेश पुलिस संशोधन विधेयक 2024, प्रदेश भू-जोत अधिकतम सीमा संशोधन विधेयक 2024,प्रदेश पंचायती राज संशोधन विधेयक 2024 शामिल है।

सभी विधायक ध्वनिमत से पारित हो गए

सदन में नियम 67 तहत चर्चामें भाग लेते हुए विधायक संजय अवस्थी ने कहा कि बीजेप सरकार में दस प्रतिशत रेन्युअल पर काम देते रहे क्या वो भ्रष्टाचार नहीं सरकार बदलते ही सरकार ने से व्यवस्था को बंद के दिया. जिसका नतीजा यह हुआ की सरकार को छह सौ करोड़ राजस्व प्राप्त हुआ। इन आरोपों पर विपक्ष ने आपत्ति जताई। जयराम ठाकुर ने चर्चा में भाग लेते हुए हमसे पूर्व भी कांग्रेस सरकार थी और पॉलिसी तब से चली आ रही है। उन्होंने आरोप लगते हुए कहा की छ सौ करोड़ रुपये का राजस्व प्रात करने वाली बात झूठ है। सीएम इस बात का जवाब दें।इस पर सीएम ने कहा कि सरकार ने छह सौ करोड़ रुपये राजस्व शराब के ठेकों की नीलामी से कमाया है।संजय अवस्थी ने चर्चा को आगे बढ़ते हुए कहा कि सीएम ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गोविंद सागर झील में वॉटर स्पोर्ट को बढ़ावा दिया लेकिन विपक्ष इस पर भी आपत्ति जता रहा है ।

प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो सका

विधानसभा सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो सका। नियम 67 के तहत लाए गए काम रोको प्रस्ताव के चलते सारा काम स्थगित कर दिया है। सीएम सुक्खू ने कहा कि भ्रष्टाचार पर स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सदन में नहीं हैं। जयराम ठाकुर के समय के भी कुछ चिट्ठे यहां रखे जाने हैं। इस पर रणधीर शर्मा ने कहा कि जयराम भी आ जाएंगे। स्पीकर ने कहा कि बगैर पर्याप्त दस्तावेजों के बात की जा रही है। इसके बाद स्पीकर ने सदन की बैठक को दस मिनट के लिए फिर स्थगित किया गया।

कई भ्रष्टाचार के मामले हैं, सरकार समोसे की जांच कर रही

चर्चा दोबारा शुरू हुई तो विधायक रणधीर शर्मा ने कहा की कई भ्रष्टाचार के मामले हैं पर सरकार सीएम के समोसे की जांच ज़रूर कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम के चहेतों ने कम दामों पर जमीन खरीदी और वही जमीन ज़्यादा दामों पर एचआरटीसी को बेच दी। उन्होंने आरोप लगाय की एक विधायक के साले को पेट्रोल पम्प लगाने के लिए कांगड़ा ज़िला मुख्यालय में जमीन लीज पर दिलवाई जा रही है जबकि औपचारिकताएँ पूरी नहीं की गई है ।इस दौरान उन्होंने निगम के 18 होटलों को जानबूझ के घाटे में दिखाने का आरोप लगाया, और सीएम ने इन होटलों को निजी हाथों में देने के लिय मंजूरी दी थी।

स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा

विधानसभा सदन में स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने प्रश्नकाल शुरू करने की घोषणा की। इस पर बीजेपी विधायक रणधीर शर्मा ने हस्तक्षेप करते हुए स्थगन यानी काम रोको प्रस्ताव पर विचार करने की बात की। रणधीर शर्मा और अन्य बीजेपी विधायकों ने सुक्खू सरकार के दो साल के कार्यकाल में घोटालों और भ्रष्टाचार होने के आरोप में नियम 67 में स्थगन प्रस्ताव दिया। इस पर स्पीकर हस्तक्षेप करते रहे कि अभी प्रश्नकाल चलने दें। अब सारा काम रोककर इस स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है।

NEVA पर उपलब्ध होंगे विधानसभा के दस्तावेज

ई-विधान से अब NEVA पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा के दस्तावेज उपलब्ध होंगे। विधानसभा अध्यक्ष ने सीएम सुक्खविंदर सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को आसन के पास बुलाक NEVA को शुरू किया। वर्ष 2014 में हिमाचल प्रदेश ने देश में पहली ई-विधान सेवा शुरू की थी। अब एक देश एक एप्लीकेशन के तहत राष्ट्रीय ई-विधान(NEVA) एप को शुरू किया गया है।

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