भूस्खलन चिंता: शिमला में मुख्यमंत्री सुक्खू ने लिया शोघी-ढली फोरलेन का जायजा
Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को शिमला के शोघी-ढली फोरलेन परियोजना के संवेदनशील स्थलों का दौरा किया। भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं ने स्थानीय लोगों में दहशत पैदा की है। एनएचएआई के अत्यधिक पहाड़ कटान से मकान असुरक्षित हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने प्रभावितों की शिकायतें सुनीं और त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से इस मुद्दे पर चर्चा करने की बात कही।
स्थानीय लोगों का दर्द
शिमला के भट्टाकुफर, संजौली, ढली और लिंडीधार में लोगों ने एनएचएआई के पहाड़ कटान पर गहरी चिंता जताई। कई मकान खतरे में हैं। चलौंठी के संजय शर्मा ने बताया कि उनका मकान अब असुरक्षित है, जिसे पहले वह किराए पर देते थे। अब वह खुद किरायेदार बन गए। लोगों का कहना है कि एनएचएआई अधिकारी उनकी शिकायतें अनसुनी कर रहे हैं। यह स्थिति स्थानीय समुदाय में आक्रोश पैदा कर रही है।
मुख्यमंत्री का आश्वासन
मुख्यमंत्री सुक्खू ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और उनकी पीड़ा को समझा। उन्होंने कहा कि घर बनाना वर्षों की मेहनत का नतीजा होता है। इसका ढहना केवल आर्थिक नहीं, भावनात्मक नुकसान भी है। उन्होंने असुरक्षित मकानों में रहने वालों को 10,000 रुपये मासिक किराया सहायता देने की घोषणा की। साथ ही, आपदा प्रभावितों के लिए विशेष राहत पैकेज की बात कही। प्रभावितों ने इस संवेदनशील रवैये की सराहना की।
एनएचएआई पर सवाल
स्थानीय लोगों ने एनएचएआई के अवैज्ञानिक पहाड़ कटान को भूस्खलन का मुख्य कारण बताया। लिंडीधार के एक निवासी ने कहा कि अधिकारी उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं देते। इससे क्षेत्र में खतरा बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ने इस गंभीर मुद्दे को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष उठाने का वादा किया। उन्होंने एनएचएआई को आधुनिक तकनीक अपनाने और सुरंग आधारित समाधान तलाशने के निर्देश दिए।
राहत और सुरक्षा के निर्देश
सुक्खू ने संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के लिए कहा। उन्होंने प्रभावितों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। शिमला प्रशासन ने 12 सदस्यीय समिति बनाई है, जो फोरलेन के संवेदनशील स्थलों की जांच करेगी। भट्टाकुफर में हाल ही में ढहे पांच मंजिला भवन की जांच के लिए भी पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है। ये कदम स्थानीय लोगों में सुरक्षा और विश्वास बहाल करने के लिए उठाए गए हैं।
आधुनिक तकनीक की जरूरत
मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण के लिए स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाए। वे इलाके की भौगोलिक स्थिति को बेहतर समझते हैं। सुक्खू ने एनएचएआई से सुरंग आधारित मार्गों पर ध्यान देने को कहा, ताकि भूस्खलन का खतरा कम हो। उन्होंने अवैज्ञानिक कटान को रोकने और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया। इससे पर्यावरण और स्थानीय समुदाय दोनों की रक्षा होगी।
प्रभावितों की पुकार
शोघी-ढली फोरलेन परियोजना से कई परिवार प्रभावित हुए हैं। भट्टाकुफर में एक पांच मंजिला भवन के ढहने से लोग डरे हुए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उनकी संपत्तियां खतरे में हैं। वे प्रशासन से त्वरित कार्रवाई और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के दौरे ने लोगों में उम्मीद जगाई है, लेकिन वे ठोस समाधान की प्रतीक्षा में हैं।
भविष्य की योजना
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण सावधानी से करना होगा। उन्होंने एनएचएआई को वैज्ञानिक तरीकों से काम करने की सलाह दी। शिमला प्रशासन की समितियां जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी, जिसके आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। सुक्खू ने केंद्र सरकार से सहयोग मांगा है, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और प्रभावितों को समय पर मदद मिले।
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