षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi)और मकर संक्रांति का महासंयोग: क्या 2026 की पहली एकादशी पर चावल का दान करना चाहिए? #ShattilaEkadashi2026 #MakarSankranti #EkadashiVrat #HinduFestival #TilDan #SpiritualIndia #VishuBhakti #Astrology2026 #Panchang #Ekadashi #Vrat #ShattilaEkadashi #MakarSankranti2026 #SpiritualGuide

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देवशयनी एकादशी: 6 जुलाई को व्रत और पूजा से पाएं भगवान विष्णु की कृपा

Spirituality News: 6 जुलाई 2025 को देवशयनी एकादशी का व्रत मनाया जाएगा। यह आषाढ़ शुक्ल एकादशी को होता है। भगवान विष्णु इस दिन से चार महीने योग निद्रा में रहते हैं। इस व्रत से पाप नष्ट होते हैं। पूजा और व्रत कथा से भक्तों को सुख-समृद्धि मिलती है। पंचांग के अनुसार, व्रत का पारण 7 जुलाई को होगा। यह दिन भक्तों के लिए विशेष है।

व्रत का समय और महत्व

देवशयनी एकादशी 6 जुलाई को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 5 जुलाई को शाम 6:58 से शुरू होगी और 6 जुलाई को रात 9:14 तक रहेगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा से आशीर्वाद मिलता है। चातुर्मास की शुरुआत होती है, जिसमें मांगलिक कार्य वर्जित हैं। यह व्रत भक्तों को पुण्य और शांति प्रदान करता है।

पूजा सामग्री और विधि

देवशयनी एकादशी की पूजा के लिए दीपक, फल, आम के पत्ते, कुमकुम, पीला कपड़ा, फूल, अक्षत, पंचमेवा, मिठाई, चौकी, धूप और विष्णु-लक्ष्मी की प्रतिमा चाहिए। सुबह स्नान कर पीले वस्त्र पहनें। पूजा घर साफ करें। विष्णु और लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें। पीले फूल, तुलसी और भोग अर्पित करें। विष्णु मंत्रों का जाप और व्रत कथा पढ़ें।

व्रत पारण और सावधानियां

देवशयनी एकादशी का व्रत पारण 7 जुलाई को सुबह 5:29 से 8:16 बजे तक होगा। इस दौरान विधिपूर्वक पारण करें। चातुर्मास में मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से बचें। शादी, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य न करें। झूठ, अपमान और गुस्सा करने से बचें। दोपहर में न सोएं। यह दिन भक्ति के लिए समर्पित करें।

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देवशयनी एकादशी: 6 जुलाई को व्रत और कथा से पाएं सुख-समृद्धि

Spirituality News: 6 जुलाई 2025 को देवशयनी एकादशी का व्रत होगा। आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा से सुख-समृद्धि मिलती है। व्रत कथा सुनने से जीवन के संकट दूर होते हैं। पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत से अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। भक्त इस दिन जप-तप और पूजा कर विष्णुलोक की प्राप्ति का आशीर्वाद पाते हैं।

देवशयनी एकादशी की कथा

देवशयनी एकादशी की कथा में युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से इस व्रत का महत्व पूछा। श्रीकृष्ण ने बताया कि सतयुग में मांधाता नामक सम्राट का राज्य सुखी था। लेकिन तीन साल तक वर्षा न होने से अकाल पड़ा। प्रजा ने राजा से मदद मांगी। राजा दुखी होकर समाधान खोजने जंगल गए। वहां अंगिरा ऋषि से मिले और अकाल का कारण पूछा।

अंगिरा ऋषि का समाधान

अंगिरा ऋषि ने बताया कि सतयुग में धर्म चार चरणों में रहता है। एक शूद्र की तपस्या के कारण अकाल पड़ा। उसे मारना समाधान है, लेकिन राजा ने इसे अस्वीकार किया। तब ऋषि ने देवशयनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। राजा ने राज्य में सभी वर्णों के साथ व्रत किया। व्रत के प्रभाव से मूसलधार वर्षा हुई और राज्य धन-धान्य से भर गया।

व्रत का महत्व और प्रभाव

देवशयनी एकादशी का व्रत भक्तों के लिए विशेष है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, जप-तप और व्रत कथा सुनने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। यह व्रत सुख, समृद्धि और मान-सम्मान दिलाता है। भक्तों को विधिपूर्वक व्रत रखना चाहिए। इससे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

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