मिंजर मेला विवाद: चंबा में हलाल मांस बिक्री से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं हो रही आहत, प्रशासन की चुप्पी से बढ़ी नाराजगी
Himachal News: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में ऐतिहासिक मिंजर मेले की गरिमा को लेकर विवाद छिड़ गया है। स्थानीय सनातन समाज ने मेले में मिंजर मेला विवाद के तहत हलाल मांस बिक्री की अनुमति पर गहरा आक्रोश जताया है। यह मेला लक्ष्मीनाथ मंदिर के सम्मान में शुरू होता है। लोग इसे धार्मिक भावनाओं पर हमला बता रहे हैं।
धार्मिक भावनाओं पर चोट
चंबा के निवासियों का कहना है कि मिंजर मेला एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो 935 ई. में राजा साहिल वर्मन की जीत की याद में मनाया जाता है। मेले की शुरुआत लक्ष्मीनाथ मंदिर में मिंजर चढ़ाने से होती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से प्रशासन द्वारा उत्तर प्रदेश के व्यापारियों को हलाल मांस बेचने की अनुमति देना स्थानीय लोगों को अपमानजनक लग रहा है। नगर परिषद अध्यक्षा नीलम नैयर के नेतृत्व में मांस के अवशेषों को पवित्र रावी नदी में फेंके जाने की घटना ने आक्रोश को और बढ़ा दिया है।
प्रशासन की अनदेखी
स्थानीय लोगों ने बार-बार ज्ञापन और चेतावनियां देकर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। पूर्व उपायुक्त अपूर्व देवगन और वर्तमान उपायुक्त मुकेश रेप्स्वाल पर इस मुद्दे को नजरअंदाज करने का आरोप है। लोगों ने इसे सनातन धर्म की आस्था पर हमला बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
जनता की मांगें
चंबा के लोगों ने मेले की पवित्रता बनाए रखने के लिए कई सुझाव दिए हैं। वे चाहते हैं कि हलाल मांस की बिक्री पर तुरंत रोक लगे। स्टॉल आवंटन से पहले विक्रेताओं की पृष्ठभूमि की जांच हो। चौगान मैदान में मोबाइल शौचालय और कूड़ेदान लगाए जाएं। बारिश से बचाव के लिए वाटरप्रूफ पंडाल और हाई-टेक सीसीटीवी की व्यवस्था हो। बाहरी राज्यों से आने वालों की जांच के लिए चुराह घाटी और खैरी जैसे प्रवेश द्वारों पर सतर्कता बढ़ाई जाए।
मेले की सांस्कृतिक महत्ता
मिंजर मेला चंबा की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। यह सप्ताह भर चलने वाला उत्सव रावी नदी के किनारे चौगान मैदान में आयोजित होता है। लोग रेशमी मिंजर पहनकर और कुञ्जरी मल्हार गीत गाकर उत्सव मनाते हैं। मेला समाप्त होने पर मिंजर, नारियल और सिक्का नदी में चढ़ाया जाता है। लेकिन मिंजर मेला विवाद ने इसकी पवित्रता पर सवाल उठाए हैं।
सामुदायिक एकता पर सवाल
मिंजर मेले की शुरुआत में मिर्ज़ा परिवार द्वारा मिंजर चढ़ाने की परंपरा हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक रही है। लेकिन हलाल मांस की बिक्री ने इस एकता को चुनौती दी है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन इस मिंजर मेला विवाद को गंभीरता से ले और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करे। वे ठोस कार्रवाई और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।