Deadly Dallas gas explosion destroys apartments amid massive fire
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गैस विस्फोट या आतंकी साजिश? शिमला गैस ब्लास्ट मामले में एनएसजी रिपोर्ट पर उठे सवाल, पढ़ें चौंकाने वाले खुलासे
Himachal News: हिमाचल प्रदेश में जुलाई 2023 में हुए गैस विस्फोट ने प्रशासनिक और जांच एजेंसियों के बीच विवाद खड़ा कर दिया। शिमला में हुए इस हादसे को पहले गैस रिसाव का परिणाम माना गया, लेकिन बाद में एनएसजी की रिपोर्ट में इसे आतंकी घटना बताया गया। इस मामले में अब नए तथ्य सामने आए हैं, जो गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
गैस विस्फोट की शुरुआती जांच
जुलाई 2023 में शिमला में हुए विस्फोट के तुरंत बाद एसपी शिमला ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों को बुलाया। विशेषज्ञों ने पाया कि लगभग 10 किलोग्राम गैस रिसाव के कारण यह हादसा हुआ। उनकी रिपोर्ट में इसे स्पष्ट रूप से गैस विस्फोट बताया गया। इस निष्कर्ष ने जांच की शुरुआती दिशा तय की, लेकिन बाद के घटनाक्रम ने मामले को जटिल बना दिया।
एनएसजी की जांच और विवाद
विस्फोट के पांच दिन बाद डीजीपी हिमाचल ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) को जांच के लिए बुलाया। एनएसजी ने तीन दिन तक घटनास्थल का निरीक्षण किया, लेकिन शिमला पुलिस को शामिल नहीं किया। हैरानी की बात यह थी कि नमूने बिना गवाहों के सामने सील किए गए। बाद में एनएसजी की रिपोर्ट में विस्फोट को आतंकी घटना करार दिया गया, जिसमें आरडीएक्स के उपयोग का दावा किया गया।
अस्वीकृत रिपोर्ट और दबाव
एनएसजी की रिपोर्ट डिप्टी एसपी विक्रम चौहान के माध्यम से एसपी शिमला को मिली, लेकिन यह ठीक से सील नहीं थी। एसपी ने इसे अस्वीकार कर वापस भेज दिया। सूत्रों के अनुसार, आईजीपी पुप्पुल प्रसाद ने टेलीफोन पर इसे स्वीकार करने का दबाव बनाया, लेकिन एसपी ने नियमों का हवाला देते हुए इनकार कर दिया। इस घटना ने जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
डीजीपी का पत्र और आरोप
डीजीपी हिमाचल ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शिमला पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। इतना ही नहीं, उन्होंने इस रिपोर्ट का इस्तेमाल निशांत शर्मा धन उगाही मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए किया। यह कदम कई सवाल खड़े करता है कि क्या यह सब एक सुनियोजित साजिश थी?
सीआईडी की अंतिम रिपोर्ट
लगभग 20 महीने बाद सीआईडी की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। उनकी रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि यह गैस रिसाव के कारण हुआ हादसा था। इसमें न तो आरडीएक्स का उपयोग हुआ और न ही कोई आईईडी मिला। इस निष्कर्ष ने एनएसजी की रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए।
साजिश के संकेत
एसपी शिमला ने कई बार डीजीपी को पत्र लिखकर इस मामले की सच्चाई उजागर करने की मांग की। अब वे इस मामले को अदालत में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह सब उन्हें फंसाने की साजिश थी। इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप भी गंभीर है।
अनुत्तरित सवाल
20 महीनों से अधिक समय बीतने के बावजूद कोई आतंकी गिरफ्तार नहीं हुआ। अगर एनएसजी की रिपोर्ट सही थी, तो आरडीएक्स कहां से आया? डीजीपी ने शिमला पुलिस को क्यों निशाना बनाया? केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर सवाल क्यों उठ रहे हैं? ये सवाल जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर संदेह पैदा करते हैं।
आगे की राह
एसपी शिमला अब इस मामले को अदालत में ले जा रहे हैं। उनका कहना है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें उन्हें गलत तरीके से फंसाने की कोशिश की गई। इस मामले में नए खुलासे और कानूनी कार्रवाई से सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।
Author: Harikrishan Sharma