The VPN panic is only getting started

The UK government is facing calls to add age restrictions to VPNs in order to stop them being used to… get around age restrictions.

The Verge

11 साल पहले मरा पति सपने में आया और गर्भवती हो गई महिला, सोशल मीडिया पर मचा हड़कंप

Viral News: आज की दुनिया में भी कुछ ऐसी घटनाएं घटती हैं जिनके बारे में विज्ञान के अनुसार कुछ कह पाना कठिन होता है। ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। एक महिला ने पति की मौत के 11 साल बाद बच्चे को जन्म दिया है। उसका दावा है कि पति उसके सपने में आते हैं। खाना मांगते हैं, झगड़ते हैं, साथ सोते हैं। उनके चलते वह गर्भवती हुई और बच्चे को जन्म दिया है।

महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। लोगों को उसकी बातों पर यकीन नहीं हो रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर इस बच्चे का बाप कौन है? इस पर महिला का जवाब है कि बच्चा उनके दिवंगत पति का है। महिला के इस दावे पर लोगों को आश्चर्य हो रहा है। लोग विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि वैज्ञानिक रूप से ऐसा संभव नहीं है।

क्या सपनों के माध्यम से हो सकती है संतान प्राप्ति?

वैज्ञानिक समझ के अनुसार किसी महिला के लिए सपना या अलौकिक माध्यम से गर्भधारण करना संभव नहीं है। महिला के इस दावे के बाद से ही इस पर खूब ट्रोलिंग हो रही है। यूजर्स ने बच्चे के पिता होने की पुष्टि के लिए डीएनए टेस्ट की मांग की है। एक यूजर ने कमेंट किया, “ऐसा लगता है कि हम अभी भी सो रहे हैं और मैं यह दुःस्वप्न देख रहा हूं।” दूसरे यूजर ने लिखा, “इस औरत को लगता है कि पूरी दुनिया मूर्ख है। यह वजह है कि यह इस तरह के तर्क दे रही है।”

क्या इस तरह की घटना पहली बार हुई है?

पति के मौत के बाद पत्नी की गर्भवती होने की यह पहली घटना नहीं है, लेकिन दूसरे मामलों में महिला या तो स्वाभाविक रूप से गर्भवती हुई या IVF जैसी वैज्ञानिक पद्धति का सहारा लिया। अमेरिका के फ्लोरिडा में मैरी कुल्हमन नामक एक महिला ने अपने पति की वाटर-स्कीइंग दुर्घटना में मौत के नौ महीने बाद बच्चे को जन्म दिया। मैरी ने अपने बेटे को एक “चमत्कार” बताया। उनका मानना ​​था कि बच्चे का गर्भाधान उनके पति की असामयिक मृत्यु से कुछ समय पहले हुआ था।

इसी तरह, UK में एस्तेर बाथर्स अपने दिवंगत पति की मृत्यु के दो साल बाद आई.वी.एफ. उपचार के माध्यम से उनके बच्चे की मां बनी। ये मामले जो अलग-अलग परिस्थितियों में हुए हैं, जिन्हें विज्ञान द्वारा समझाए जा सकते हैं। मैरी कुल्हमन के मामले में गर्भाधान उनके पति की मृत्यु से ठीक पहले स्वाभाविक रूप से हुआ था। एस्तेर बाथर्स की गर्भावस्था नियोजित आई.वी.एफ. उपचार का परिणाम थी। पुरुष की मौत के बाद अगर उसके स्पर्म को सुरक्षित स्टोर कर लिया जाए तो बाद में उससे महिला को गर्भवती किया जा सकता है।

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पंजाब में खालिस्तानी आतंकी मॉड्यूल को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, एक ब्रिटिश सिख सैनिक भी शामिल; जानें क्या बोला ब्रिटेन

Britain News: हाल ही में पंजाब पुलिस ने खालिस्तानी आतंकी मॉड्यूल को लेकर बड़ा खुलासा किया है। खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) के प्रमुख और पाकिस्तान स्थित रंजीत सिंह नीता द्वारा नियंत्रित आतंकी ‘मॉड्यूल’ की जांच के दौरान पुलिस को एक ब्रिटिश सिख सैनिक के बारे में सुराग मिले हैं। संदेह है कि राज्य में पुलिस थानों पर हाल ही में हुए ग्रेनेड हमलों के पीछे इसी ब्रिटिश सिख सैनिक का हाथ है।

ब्रिटिश सेना के सैनिक जगजीत सिंह पर आतंकवाद में शामिल होने के आरोपों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इस नाम का कोई भी व्यक्ति वर्तमान में ब्रिटिश सेना में सेवारत नहीं है। वहीं, पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने अपनी जांच का बचाव करते हुए कहा है कि इस मामले को ‘उचित माध्यमों’ से ब्रिटिश अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा।

पुलिस डोजियर और आतंकी गतिविधियों का ब्योरा

पंजाब पुलिस डोजियर के अनुसार, जगजीत सिंह और उसके साथी पंजाब में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए धार्मिक संप्रदायों के प्रमुखों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। पुलिस का कहना है कि उन्होंने युवाओं को पैसे और विदेश में पलायन का मौका देकर आतंकी गतिविधियों के लिए भर्ती करना शुरू कर दिया था। इस मामले में यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था और जगजीत सिंह को वांछित अपराधी घोषित किया गया था। 2021 में उसका नाम तब प्रकाश में आया जब तरनतारन जिले के सोहल गांव निवासी रंजीत सिंह के पास से दो हथगोले और दो पिस्तौल बरामद किए गए। घटना के संबंध में अमृतसर के एसएसओसी थाने में शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।

ब्रिटिश मंत्रालय और पुलिस की प्रतिक्रिया

ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि “इस नाम का कोई भी व्यक्ति ब्रिटिश सेना में सेवारत नहीं है। भारतीय अधिकारियों ने इस संबंध में हमसे संपर्क नहीं किया है।” मंत्रालय के प्रवक्ता रेयान शिलाबीर ने पंजाब पुलिस द्वारा जारी एक फोटो पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह फोटो एक अन्य ब्रिटिश सिख सैनिक की है जिसका नाम जगजीत सिंह से मेल नहीं खाता। इसके बावजूद पंजाब के डीजीपी ने अपनी जांच का बचाव करते हुए कहा, “गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और गहन जांच से हमें जानकारी मिली है। इस मामले को ब्रिटिश अधिकारियों के समक्ष उठाया जाएगा।”

आतंकी हमलों और संगठन के बारे में खुलासा

पुलिस ने बयान जारी कर बताया कि पिछले तीन महीनों में पंजाब में पुलिस चौकियों और अन्य स्थानों पर कई ग्रेनेड और आईईडी हमले हुए हैं। इन हमलों की जिम्मेदारी प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) के प्रमुख रंजीत सिंह नीता और “निगरानी एवं टोही इकाई” के फतेह सिंह बागी ने सोशल मीडिया पर ली है।

पुलिस का कहना है कि 37 वर्षीय जगजीत सिंह मूल रूप से तरनतारन जिले के मियांपुर गांव का रहने वाला है। वह 2010 में स्टूडेंट वीजा पर ब्रिटेन गया था और पढ़ाई पूरी कर 2013 में ब्रिटिश सेना में भर्ती हो गया। इसके बाद उसने खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स और बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे प्रतिबंधित संगठनों से संबंध स्थापित किए और अकालजोत खालिस्तान फोर्स (एकेएफ) नामक कट्टरपंथी समूह बनाया। पंजाब पुलिस ने एक और तस्वीर जारी कर इसे जगजीत सिंह की ताजा तस्वीर बताया है।

पुलिस को संदेह है कि राज्य में पुलिस थानों पर हाल ही में हुए ग्रेनेड हमलों के पीछे इसी ब्रिटिश सिख सैनिक का हाथ है। पंजाब पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि पंजाब में अक्टूबर और नवंबर में कई आतंकी हमले हुए, जिनमें हैंड ग्रेनेड और ‘इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस’ (आईईडी) से हमले शामिल हैं, लुधियाना में हिंदू समूहों के नेताओं के घरों पर पेट्रोल बम का इस्तेमाल कर दो हमले किए गए। इसके बाद दिसंबर में शहीद भगत सिंह नगर जिले के काठगढ़ थाने के अंतर्गत असरों पुलिस चौकी पर हैंड ग्रेनेड फेंका गया।

नीता और फतेह सिंह बागी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने खुद को ‘निगरानी और टोही इकाई’ का हिस्सा बताया, जो केजेडएफ के तहत काम करती है। इन केजेडएफ मॉड्यूल की जांच से पंजाब पुलिस को ब्रिटिश सेना के एक सिख सैनिक जगजीत सिंह (37) का पता चला। संदेह है कि जगजीत सिंह अपनी असली पहचान छिपाने के लिए छद्म नाम फतेह सिंह बागी का इस्तेमाल कर रहा है। पुलिस ने कहा है कि जगजीत सिंह की मौजूदा स्थिति और उसके सेवा में होने की पुष्टि के लिए ब्रिटिश अधिकारियों से जानकारी मांगी जाएगी। यह मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

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अमेरिकी अरबपति एलन मस्क के ऐलान के बाद ब्रिटेन की राजनीति में आया भूचाल, जानें किस की देंगे 100 मिलियन की मदद

Elon Musk News: अमेरिकी अरबपति कारोबारी एलन मस्क अमेरिकी चुनावों में दखल के बाद अब ब्रिटिश संसदीय चुनावों में दखल देने की रणनीति बना रहे हैं। अगले साल मई में ब्रिटेन में संसदीय चुनाव होने हैं। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, एलन मस्क ब्रिटेन के रिफॉर्म यूके नामक राजनीतिक दल को करीब 100 मिलियन डॉलर (यानी 850 करोड़ रुपये) दान देने की रणनीति बना रहे हैं। इस खबर से ब्रिटिश राजनीति में भूचाल आ गया है। अगर मस्क ऐसा करते हैं तो ब्रिटेन के इतिहास में यह एक ऐतिहासिक दान होगा, जो ब्रिटेन की राजनीति को बदल सकता है।

यह चर्चा तब शुरू हुई, जब अमेरिकी शहर फ्लोरिडा में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मार-ए-लागो एस्टेट में एक बैठक हुई, जिसमें एलन मस्क के साथ ब्रिटिश राजनीतिज्ञ और रिफॉर्म यूके पार्टी के नेता निगेल फरेज और एक अन्य धनी शख्स दिखे। चर्चा है कि इस बैठक में उन तीनों के बीच इस दान को लेकर खुलकर बातचीत हुई। अगर मस्क की यह डील पक्की होती है तो ब्रिटेन का राजनीतिक परिदृश्य प्रभावित हो सकता है। अगले महीने सत्ता में आ रहे ट्रंप प्रशासन में एक प्रमुख खिलाड़ी मस्क जल्द ही अपना ध्यान अमेरिका के बाद ब्रिटेन पर कर सकते हैं।

बता दें कि एलन मस्क ने अमेरिकी चुनावों में डोनाल्ड टंप के अभियान का समर्थन करने के लिए 270 मिलियन डॉलर की रकम दान की थी। निगेल फरेज को डोनाल्ड ट्रंप का सबसे उच्च-प्रोफ़ाइल ब्रिटिश समर्थक माना जाता है। फरेज ने पुष्टि की है कि मस्क द्वारा उनकी पार्टी रिफ़ॉर्म यू.के. को भारी दान देने के बारे में बातचीत चल रही है। टाइम्स ऑफ लंदन के मुताबिक, यह दान 100 मिलियन डॉलर तक हो सकता है, जो ब्रिटेन के इतिहास में सबसे बड़ा राजनीतिक दान होगा। इस खबर के बाद ब्रिटिश नेताओं ने चिंता जताई है और राजनीतिक दान पर ब्रिटेन के नियमों को जल्द से जल्द कड़ा करने की मांग की है।

मस्क के साथ बैठक के बाद फरेज ने जीबी न्यूज़ से कहा, “हमने पैसे पर चर्चा की है। यह एक ऐसी बातचीत है जिसे हम वापस जाकर फिर से करेंगे। वह हमें पैसे देने के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने अभी तक पूरी तरह से निर्णय नहीं लिया है कि वह ऐसा करेंगे या नहीं।”

ब्रिटेन में राजनीतिक दलों द्वारा चुनावों में खर्च की जाने वाली राशि पर सख्त नियम हैं। हालांकि, राजनीतिक दल असीमित दान स्वीकार कर सकते हैं, बशर्ते कि दानकर्ता ब्रिटेन का मतदाता हो या ब्रिटेन में पंजीकृत कंपनियाँ हों। एलन मस्क के सोशल नेटवर्क कंपनी एक्स की एक ब्रिटिश शाखा है, ट्विटर यूके लिमिटेड, जिसका पंजीकृत पता लंदन में है। इस लिहाज से एलन मस्क को यह दान देने में कोई दिक्कत नहीं होगी। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि इससे गैर वाजिब विदेशी हस्तक्षेप की अनुमति मिल जाएगी। इसलिए चुनाव आयोग से ऐसे प्रभाव से बचने के लिए सख्त नियम की मांग उठने लगी है। लेबर पार्टी ने भी इस पर चिंता जताई है और इसका समाधान निकालने का वादा किया है।

निगेल फरेज द्वारा 2021 में स्थापित रिफॉर्म यूके नेअपने कट्टर दक्षिणपंथी मंच के लिए इस दौरान कई बार ध्यान आकर्षित किया है। फरेज आव्रजन विरोधी नीतियों ओर हरित ऊर्जा लक्ष्यों का विरोध करते रहे हैं। इस पार्टी ने ब्रेक्जिट आंदोलन के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। फरेज अपनी पार्टी का विस्तार और अपने मंसूबों को आकार देने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में एलन मस्क की तरफ से उन्हें अगर आर्थिक मदद मिलती है तो वह इंग्लैंड का राजनीतिक परिदृश्य बदल सकते हैं। हालांकि, मस्क इसका फायदा किस तरह से उठाएंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

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लंदन में रहने वाली 24 साल की हर्षिता बरेला की लाश कार के बूट से बरामद, कहा था, पति मुझे मर डालेगा

Britain News: लंदन में रहने वाली 24 साल की भारतीय महिला हर्षिता बरेला की हत्या का मामला सामने आया है। उसकी लाश को 14 नवम्बर को एक कार के बूट से बरामद किया गया। हर्षिता की मां सुदेश कुमारी ने मीडिया से कहा कि उनकी बेटी ने कुछ हफ्ते पहले उन्हें बताया था कि उसका पति उसे मार डालेगा। हर्षिता ने अपनी मां से कहा था, “मैं उसके पास वापस नहीं जाऊंगी। वह मुझे मार डालेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि उसका पति यानी कि पंकज लाम्बा उसकी ज़िंदगी को नर्क बना चुका था।

हर्षिता बरेला इस साल अप्रैल में भारत से लंदन गई थी। उसकी शादी पंकज लाम्बा से अगस्त 2023 में हुई थी। पुलिस का कहना है कि हर्षिता को हत्या करने से पहले गला घोंटकर मारा गया था। पुलिस ने पंकज लाम्बा को मुख्य आरोपी बनाया है, लेकिन वह इस समय भारत में है। हर्षिता के परिवार का आरोप है कि ब्रिटिश पुलिस ने उनकी मदद के लिए कोई कदम नहीं उठाया है। वहीं स्थानीय पुलिस का कहना है कि ब्रिटिश अधिकारियों ने अभी तक भारत से उनकी मदद के लिए संपर्क नहीं किया है।

हर्षिता के पिता सतबीर बरेला ने भी अपने दामाद पर घरेलू हिंसा के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पंकज लाम्बा ने हर्षिता को इतनी बुरी तरह पीटा था कि उसकी गर्भावस्था में गर्भपात हो गया था। सतबीर ने बताया कि उनकी बेटी ने कई बार उन्हें बताया था कि पंकज उसे सरेआम पीटता था और वह बहुत रोती थी।

इस मामले में यह भी सामने आया कि हर्षिता ने अगस्त 2023 में पुलिस में घरेलू हिंसा की शिकायत की थी। इसके बाद पंकज लाम्बा को 3 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसे बाद में जमानत मिल गई थी। इस मामले में घरेलू हिंसा रोकने का आदेश भी दिया गया था।

हालांकि, पंकज लाम्बा की मां, सुनील देवी ने मीडिया से कहा कि वह विश्वास नहीं कर सकतीं कि उनका बेटा हर्षिता को मार सकता है। “मुझे कुछ नहीं पता, लेकिन मुझे यकीन नहीं है कि उसने ऐसा किया होगा,” उन्होंने कहा।

हर्षिता बरेला की हत्या ने ब्रिटेन और भारत में घरेलू हिंसा के मामलों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बरेला परिवार को न्याय का इंतजार है।

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33 वर्षीय पैगी रेनी ने हवस मिटाने के लिए कुत्ते के साथ बनाए यौन संबंध, अब हो सकती है दो साल की जेल

Britain News: यूके से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जहां शेफ़ील्ड की 33 वर्षीय पैगी रेनी ने अपनी हवस मिटाने के लिए कुत्ते को अपना शिकार बनाया। महिला ने इस बात को क्राउन कोर्ट में स्वीकार किया कि उसने चार्ली नामक एक पग के साथ यौन संबंध बनाए थे।

रेनी ने “किसी जानवर के साथ संभोग या मुख मैथुन” की अत्यधिक अश्लील तस्वीरें रखने से इनकार किया। जांचकर्ताओं का कहना है कि पशु प्रेमी को उसके प्रेमी ग्राहम मार्शल, 38 वर्षीय ने सहायता और प्रोत्साहन दिया था।

इससे पहले की सुनवाई में, अदालत ने सुना कि कैसे मार्शल और रीनी ने पग को “नियमित रूप से उसे आदतन यौन गतिविधि के अधीन करके” अनावश्यक पीड़ा पहुँचाई। रीनी ने अक्टूबर में एक महिला को कुत्ते के साथ यौन संबंध बनाने में सहायता करने और उकसाने के एक मामले में दोषी होने की दलील दी। इसके अलावा, उन्होंने एक संरक्षित जानवर को अनावश्यक पीड़ा पहुँचाने के लिए भी दोषी होने की दलील दी, अर्थात् उसे नियमित रूप से आदतन यौन गतिविधि के अधीन करना जिसमें “कुत्ते को अनुचित शारीरिक रूप से संभालना” शामिल है।

मार्शल ने कुत्ते के कल्याण को सुनिश्चित करने में विफल रहने के लिए भी दोषी होने की दलील दी, क्योंकि वह “आदतन यौन गतिविधि के कारण होने वाले दर्द और पीड़ा से उसे बचाने में विफल रहा।” उस व्यक्ति ने एक बार ताक-झांक करने और तीन बार “मृत/जीवित जानवर” से जुड़े यौन कृत्यों से संबंधित अत्यधिक अश्लील चित्र रखने के लिए भी दोषी होने की दलील दी। और उसने बच्चों की अश्लील तस्वीरें या छद्म तस्वीरें बनाने की बात स्वीकार की। उसने बाल पोर्न बनाने के एक मामले में खुद को दोषी नहीं ठहराया। मार्शल 12 दिसंबर को फिर से अदालत में पेश होगा और रीनी को दो साल की जेल हो सकती है।

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भारत विरोधी ताकतों की शिकायत करना पड़ा भारी, ब्रिटेन ने दो भारतीयों से छीना उनका सम्मान

Britain News: ब्रिटेन में भारतीय समुदाय की दो शख्सियतों से सम्मान छीन लिया गया है। यह दोनों शख्सियतें हैं, टोरी पीयर रामी रेंजर और हिंदू काउंसिल यूके प्रबंध न्यासी अनिल भनोट। रेंजर को कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एंपायर का सम्मान मिला हुआ था। वहीं, अनिल भनोट को ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर का सम्मान हासिल था। इस बात घोषणा लंदन गजट में की गई है।

इन दोनों को बकिंघम पैलेस को अपना सम्मान लौटाना होगा और भविष्य में यह कहीं इसका जिक्र नहीं कर सकेंगे। इन दोनों सम्मान वापस लेने की सिफारिश ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने किंग से की थी। जहां भनोट पर 2021 में बांलादेशी हिंदुओं पर हिंसा के खिलाफ ट्वीट करने को लेकर यह ऐक्शन हुआ है। वहीं, रेंजर के खिलाफ सिख फॉर जस्टिस ने शिकायत की थी।

रेंजर और भनोट ने सम्मान वापस लिए जाने के कदम की निंदा करते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। भनोट को ओबीई सम्मान सामुदायिक एकजुटता के लिए मिला था। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक भनोट ने बताया कि कमेटी ने उनसे जनवरी में संपर्क किया था। तब उन्हें लगा था कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

भनोट के मुताबिक उनके खिलाफ इस्लामोफोबिया का आरोप है। यह शिकायत साल 2021 की उन ट्वीट्स को लेकर है, जो उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के बारे में की थीं। ‘5 पिलर्स’ वेबसाइट ने इन ट्वीट्स के बारे में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और चैरिटी कमीशन और दोनों से शिकायत की थी।

वहीं, रेंजर को 2016 में ब्रिटिश व्यवसाय और सामुदायिक सेवा के लिए सीबीई से सम्मानित किया गया था। उन्होंने कहा कि मुझे सीबीई की परवाह नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि बोलने की स्वतंत्रता को कम कर दिया गया है। वह लोग गलत लोगों को पुरस्कृत कर रहे हैं। रेंजर फैसले की न्यायिक समीक्षा कराने औरयूरोपीय मानवाधिकार अदालत में ले जाने की योजना बना रहे हैं।

उनके खिलाफ शिकायतों में अमेरिका स्थित संगठन सिख्स फॉर जस्टिस की शिकायत भी शामिल है, जो भारत में प्रतिबंधित है। एक टिप्पणी उनके द्वारा पीएम मोदी का बचाव करने और बीबीसी डॉक्यूमेंट्री, ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ को चुनौती देने के बारे में थी। एक अन्य शिकायत साउथहॉल गुरुद्वारे के ट्रस्टी के संबंध में उनके द्वारा किए गए एक ट्वीट के बारे में थी। लॉर्ड रेंजर के एक प्रवक्ता ने कहाकि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है और न ही कोई कानून तोड़ा है। यह एक दुखद अभियोग है।

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