Kerala has proposed mandatory transfers for higher secondary principals every three years and introduced revised home-station and distance weightage guidelines for teachers. https://english.mathrubhumi.com/news/kerala/kerala-principal-transfer-norms-higher-secondary-jn9qi95g?utm_source=dlvr.it&utm_medium=mastodon #HigherSecondary #TeacherTransfer #PrincipalTransfer #Kerala

हिमाचल हाईकोर्ट: शिक्षक संघ अध्यक्ष का विवादास्पद तबादला रद्द, महिला शिक्षिका को मिली राहत
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हिमाचल हाईकोर्ट: शिक्षक संघ अध्यक्ष का विवादास्पद तबादला रद्द, महिला शिक्षिका को मिली राहत

Mandi News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष के विवादास्पद स्थानांतरण आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने शिक्षिका लता कुमारी की याचिका स्वीकार करते हुए 14 सितंबर के आदेश को खारिज किया। कोर्ट...

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हिमाचल तबादला विवाद: जसवां-प्रागपुर में शिक्षकों के तबादलों पर बिक्रम सिंह ने उठाए सवाल

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के जसवां-प्रागपुर विधानसभा क्षेत्र में हिमाचल तबादला विवाद ने तूल पकड़ लिया है। पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक बिक्रम सिंह ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि तबादलों पर रोक के सरकारी आदेशों की अवहेलना हो रही है। क्षेत्र के स्कूल खाली हो रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर संकट मंडरा रहा है।

तबादलों पर रोक के बावजूद कार्रवाई

बिक्रम सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार ने 1 जून से तबादलों पर रोक लगाने का दावा किया था। इसके बावजूद, पिछले 15 दिनों में जसवां-प्रागपुर से 25 से अधिक शिक्षकों का तबादला कर दिया गया। उन्होंने इन तबादलों को सुनियोजित और पक्षपातपूर्ण करार दिया। सिंह ने कहा कि शिक्षकों की मानवीय और पारिवारिक परिस्थितियों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।

महिला शिक्षकों की अनदेखी

बिक्रम सिंह ने विशेष रूप से महिला शिक्षकों के तबादलों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई महिला शिक्षकों को 300 से 400 किलोमीटर दूर स्थानांतरित किया गया है। इससे उनकी सुरक्षा और बच्चों की देखभाल जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। कुछ शिक्षकों के परिवार में बुजुर्ग माता-पिता हैं, जिनकी देखभाल प्रभावित हो रही है।

स्कूलों पर असर

तबादलों के कारण क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो गई है। बिक्रम सिंह ने कहा कि विद्यार्थी अब खाली कक्षाओं में पढ़ने को मजबूर हैं। उन्होंने इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक बताया। सिंह ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई इसलिए की जा रही है क्योंकि क्षेत्र से भाजपा विधायक हैं।

जांच और कार्रवाई की मांग

बिक्रम सिंह ने हिमाचल तबादला विवाद की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने दोषी अधिकारियों और नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही। साथ ही, उन्होंने मानवीय आधार पर तबादलों को तुरंत रद्द करने का आग्रह किया। उन्होंने सरकार से शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देने की अपील की। अधिक जानकारी के लिए हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

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शिक्षक तबादला पर हिमाचल सरकार ने 31 मार्च 2026 तक लगाई रोक, अब स्कूलों में पढ़ाई पर दिया जाएगा जोर

Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूल और कॉलेज शिक्षकों के शिक्षक तबादला पर 5 जून से पूर्ण रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 31 मार्च 2026 तक लागू रहेगा। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने इसकी अधिसूचना जारी की। यह कदम शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई का माहौल बनाए रखने के लिए उठाया गया है। अब सरप्लस शिक्षकों का युक्तिकरण होगा।

तबादलों पर क्यों लगी रोक

पिछले साल सरकार ने साल भर शिक्षक तबादला न करने का फैसला लिया था। इस साल भी यह नीति जारी रहेगी। शिक्षा विभाग को 18 हजार तबादला आवेदन मिले थे। इनमें से आठ हजार तबादलों के आदेश जारी हो चुके हैं। शेष आवेदनों पर अब विचार नहीं होगा। सरकार का लक्ष्य स्कूलों में पढ़ाई को सुचारु रखना है।

युक्तिकरण पर ध्यान

तबादला प्रक्रिया के चलते शिक्षकों का युक्तिकरण रुक गया था। अब स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति होगी। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने बताया कि यह निर्णय शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षण कार्य को बेहतर बनाने के लिए लिया गया। सरप्लस शिक्षकों को अन्य स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा।

शिक्षकों के आवेदन

शिक्षा निदेशालय को मंत्रियों और विधायकों के डीओ नोट के साथ हजारों तबादला आवेदन मिले। इनमें से कई शिक्षकों के तबादले हो चुके हैं। बाकी आवेदनों पर अब रोक के कारण कार्रवाई नहीं होगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कदम शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए है।

शैक्षणिक सत्र पर प्रभाव

शिक्षक तबादला पर रोक से स्कूलों में शिक्षकों की स्थिरता बनी रहेगी। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान शिक्षण कार्य बिना किसी रुकावट के चलेगा। स्कूलों में शिक्षकों की कमी को भी युक्तिकरण से पूरा किया जाएगा।

सरकार का दृष्टिकोण

शिक्षा सचिव ने बताया कि यह प्रतिबंध शैक्षणिक सत्र की समाप्ति तक रहेगा। सरकार का उद्देश्य स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखना है। अब शिक्षकों की नियुक्ति विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर होगी। इस कदम से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है। तबादला नीति पर जानकारी के लिए शिक्षा विभाग की वेबसाइट देखी जा सकती है।

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