EPF Scam: हिमाचल हाईकोर्ट ने कर्मचारी भविष्य निधि अपराध को माना गंभीर, FIR रद्द करने से किया इनकार
Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सिद्धबाड़ी कोऑपरेटिव टी फैक्ट्री में EPF Scam को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने माना कि कर्मचारियों के वेतन से भविष्य निधि काटकर उसे वैधानिक कोष में जमा न करना गंभीर अपराध है। न्यायाधीश राकेश कैंथला की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता की एफआईआर रद्द करने की मांग को ठुकरा दिया।
क्या है मामला
सिद्धबाड़ी कोऑपरेटिव टी फैक्ट्री पर मार्च 2016 से जुलाई 2017 तक कर्मचारियों के वेतन से EPF Scam के तहत भविष्य निधि काटने, लेकिन उसे जमा न करने का आरोप है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वह कारखाने का मालिक नहीं, बल्कि केवल लीज पर संचालक था। उसने यह भी कहा कि कर्मचारी उसकी ओर से नहीं, बल्कि कोऑपरेटिव सोसाइटी द्वारा नियुक्त थे।
कोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता को लीज के तहत कारखाने का प्रबंधन सौंपा गया था। एक कब्जेदार के रूप में वह भविष्य निधि योगदान जमा करने के लिए बाध्य था। अदालत ने कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप भारतीय दंड संहिता की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत प्रथम दृष्टया सही हैं। इसलिए, एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता।
कानूनी जिम्मेदारी
न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि EPF Scam में शामिल व्यक्ति पर आपराधिक कार्रवाई हो सकती है, भले ही वह मालिक न हो। कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम 1952 के तहत ऐसी लापरवाही गंभीर अपराध है। यह फैसला कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिक जानकारी के लिए EPFO की वेबसाइट देखें।
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