प्राकृतिक खेती: अमित शाह ने बताया रिटायरमेंट प्लान, कहा, वेद और खेती को देंगे समय
Delhi News: केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपने रिटायरमेंट प्लान का खुलासा किया। दिल्ली में ‘सहकार संवाद’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट के बाद वह वेद, उपनिषद और प्राकृतिक खेती के अध्ययन में समय बिताएंगे। शाह ने प्राकृतिक खेती को स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए फायदेमंद बताया। गुजरात और राजस्थान के सहकारी कार्यकर्ताओं से बातचीत में उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और सहकारी क्रांति की तारीफ की।
प्राकृतिक खेती के फायदे, स्वास्थ्य पर जोर
अमित शाह ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों से उगाया गेहूं कैंसर, बीपी और डायबिटीज जैसी बीमारियां लाता है। प्राकृतिक खेती से उत्पादन डेढ़ गुना बढ़ा और पानी की बर्बादी रुकी। उन्होंने अपने खेत का उदाहरण दिया, जहां प्राकृतिक खेती से शानदार नतीजे मिले। शाह ने बताया कि एक देसी गाय से 30 एकड़ की खेती संभव है। यह पर्यावरण और सेहत दोनों के लिए लाभकारी है।
सहकारी क्रांति, बनासकांठा का उदाहरण
शाह ने गुजरात के बनासकांठा का जिक्र किया, जहां पहले पानी की भारी कमी थी। आज वहां दूध उत्पादन से परिवार सालाना 1 करोड़ रुपये कमा रहे हैं। उन्होंने सहकारी मॉडल की तारीफ की, जिसने किसानों की जिंदगी बदली। शाह ने कहा कि प्राकृतिक खेती की उपज खरीदने और निर्यात के लिए सरकार ने समितियां बनाई हैं। गोबर का उपयोग भी खेती में हो रहा है।
सहकारिता मंत्रालय की अहमियत
अमित शाह ने बताया कि गृह मंत्री बनने से ज्यादा खुशी उन्हें सहकारिता मंत्री बनने से मिली। उन्होंने कहा कि यह पद सरदार पटेल के गृह मंत्रालय से भी बड़ा है। सहकारी कार्यकर्ताओं से उन्होंने वादा किया कि उनकी समस्याओं के लिए उनका दरवाजा हमेशा खुला है। शाह ने कार्यकर्ताओं, खासकर महिलाओं, के सवालों का जवाब दिया और सहकारी आंदोलन को मजबूत करने की बात कही।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, सरकारी समर्थन
शाह ने प्राकृतिक खेती को वैज्ञानिक और फायदेमंद बताया। उन्होंने कहा कि गुजरात में देसी गाय के रखरखाव के लिए सरकार 900 रुपये मासिक देती है। इससे उत्पादन बढ़ता है और जमीन की उर्वरता बनी रहती है। रासायनिक खाद से मिट्टी में कीड़े-मकोड़े खत्म हो रहे हैं, जबकि प्राकृतिक खेती मिट्टी को जीवंत रखती है। सरकार इस दिशा में किसानों को प्रोत्साहित कर रही है।
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