अमेरिका टैरिफ विवाद: भारत के WTO में ऑटो कंपोनेंट्स टैरिफ पर चर्चा के प्रस्ताव को US ने ठुकराया
International News: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत के बीच अमेरिका टैरिफ विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। अमेरिका ने ऑटो कंपोनेंट्स पर लगाए 25% टैरिफ को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में चर्चा के भारत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। अमेरिका का कहना है कि यह टैरिफ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए लगाया गया है, इसलिए इसे सेफगार्ड नियमों के तहत नहीं देखा जा सकता। यह विवाद भारतीय निर्यातकों और उद्योगों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
भारत का WTO में प्रस्ताव
भारत ने 3 जून को WTO में ऑटो कंपोनेंट्स पर अमेरिकी टैरिफ को एग्रीमेंट ऑन सेफगार्ड्स के तहत चर्चा के लिए रखा। भारत का कहना था कि यह टैरिफ उसके उद्योगों को नुकसान पहुंचा रहा है। लेकिन 9 जून को अमेरिका ने जवाब दिया कि यह टैरिफ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सेक्शन 232 के तहत लगाया गया है। WTO के 10 जून के दस्तावेज के अनुसार, अमेरिका ने कहा कि सेफगार्ड नियम इस मामले में लागू नहीं होते।
अमेरिका की दलील
अमेरिका ने दावा किया कि ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ सेफगार्ड उपाय नहीं है। उसने कहा कि राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर यह कदम उठाया। इसलिए, एग्रीमेंट ऑन सेफगार्ड्स के आर्टिकल 12.3 के तहत चर्चा का कोई आधार नहीं है। अमेरिका ने यह भी कहा कि वह भारत के साथ इस मुद्दे पर बातचीत को तैयार है, लेकिन यह चर्चा सेफगार्ड नियमों के दायरे में नहीं होगी।
स्टील और एल्युमीनियम पर भी विवाद
अमेरिका टैरिफ विवाद केवल ऑटो कंपोनेंट्स तक सीमित नहीं है। भारत ने पहले स्टील और एल्युमीनियम पर अमेरिका के 25% से बढ़ाकर 50% टैरिफ का भी विरोध किया था। यह टैरिफ 4 जून से लागू हो चुका है। भारत ने जवाबी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखा है। भारतीय उद्योगों का कहना है कि ये टैरिफ उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा को कमजोर कर रहे हैं।
मिनी ट्रेड डील की उम्मीद
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है। भारत चाहता है कि 9 जुलाई से लागू होने वाले 26% रेसिप्रोकल टैरिफ से पहले एक मिनी ट्रेड डील हो जाए। यह डील भारतीय निर्यातकों को राहत दे सकती है। लेकिन अमेरिका का रुख इस प्रक्रिया को जटिल बना रहा है।
भारतीय उद्योगों पर असर
अमेरिका टैरिफ विवाद का असर भारत के ऑटोमोटिव और स्टील उद्योगों पर पड़ रहा है। ये क्षेत्र लाखों लोगों को रोजगार देते हैं। टैरिफ बढ़ने से भारतीय उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे निर्यात प्रभावित होगा। भारतीय कारोबारी और कर्मचारी चाहते हैं कि सरकार इस मुद्दे को जल्द सुलझाए ताकि उनकी आजीविका सुरक्षित रहे।