सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाबजूद गढ़माई मंदिर में हर पांच साल बाद काटे जाते है 2.5 लाख जानवर, जानें क्यों

Nepal News: नेपाल में हर पांच साल में गढ़ीमाई का मेला होता है जहां लाखों जानवरों की सामूहिक बलि दे दी जाती है। सशस्त्र सीमा बल और स्थानीय प्रशासन ने इस बार जानवरों को बचाने के लिए दिन रात एक कर दिया। जानकारी के मुताबिक भारतीय सुरक्षाबलों और प्रशासन की सतर्कता की वजह से कम से कम 750 जानवरों को बचाया गया है जिनमें भैंसें, बकरियां, भेड़ औऱ अन्य जानवर शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक इस बार दो ही दिन में 8 और 9 दिसंबर को गढ़ीमाई के मंदिर में 4200 भैंसों की बलि दे दी गई।

प्रशासन की सख्ती से जिन जानवरों को बचाया गया है उनमें 74 भैंसें शामिल हैं। इन जानवरों को गुजरात के जामनगर में रिलायंस ग्रुप के वाइल्डलाइफ रिहैबिलिटेशन सेंटर में भेज दिया गया है। एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया और अन्य संगठनों की मदद से पहली बार इश तरह का अभियान चलाया गया। स्थानीय प्रशासन ने भी सैकड़ों भैसों, बकरियों, कबूतरों और मुर्गियों को बलि के लिए सीमा पार कराने से रोका। बता दें कि नेपाल के बारा जिले के बरियारपुर गांव में हर पांच साल में यह मेला लगता है जिसमें लाखों जानवरों की सामूहिक बलि दे दी जाती है। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि बलि के लिए नेपाल ले जाए जाने वाले जानवरों को बचाया जाए।

जानकारों के मुताबिक इस मेले में महीनेभर में करीब 2.5 लाख से पांच लाख जानवरों की बलि दे दी जाती है। बताया जाता है कि 265 सालों से गढ़ीमाई का यह उत्सव होता है। नेपाल के भी सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में जानवरों की बलि रोकने का आदेश दिया था। बताया गया कि बलि के लिए ज्यादातर जानवर खरीदे जाते हैं। जानकारों का कहना है कि लोग मन्नत पूरी होने के लिए गढ़ीमाई के मंदिर में बलि देते हैं। विश्व में सबसे ज्यादा बलि इसी मंदिर में होती है।

मान्यता है कि गढ़ीमाई मंदिर के संस्थापक भगवान चौधरी को सपना आया था कि जेल से छुड़ाने के लिए माता बलि मा्ंग रही हैं। इसके बाद पुजारी ने जानवर की बलि दे दी। इसके बाद से ही यहां लोग अपनी मुराद लेकर आते हैं और जानवरों की बलि देते हैं। यह मेला 16 नवंबर से 15 दिसंबर तक आयोजित किया गया। इस मेले में विदेश से भी बहुत सारे लोग आते हैं।

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बलि प्रकरण; सैकड़ों लोगों के सामने दी गई बलि, पुलिस को नहीं मिला कोई भी गवाह; जानें क्या बोले राइट फाउंडेशन के अध्यक्ष

Mandi News: चैल चौक में हुए बलि प्रकरण मामले में बड़ा मोड़ आ गया है। पुलिस द्वारा नियुक्त जांच अधिकारी ने आज मौका पर आकर नक्शा आदि बनाया और शिकायतकर्ता के बयान भी दर्ज किए। आपको जानकर हैरानी होगी कि हजारों लोगों के सामने बकरे की बलि दी गई। एक बार में उसका सिर नहीं कटा तो नीचे लिटाकर बेरहमी से दूसरी बार उसका सिर काटा गया। लेकिन पुलिस को अभी तक एक भी गवाह नहीं मिला।

पुलिस को नहीं मिला कोई भी गवाह

इतना गंभीर कुकृत्य सार्वजनिक रूप से बीच बाजार में हुआ, सैकड़ों स्कूल के बच्चे, स्थानीय लोग, सरकारी अधिकारी, पुलिस की टीम, व्यापार मंडल की पदाधिकारी, विधायक और उसके साथ आए पार्टी के लोग और देवता के साथ आए लोग मौके पर उपस्थित थे लेकिन फिर पुलिस के जांच अधिकारी को पिछले 32 घंटों में एक भी गवाह नहीं मिला।

मौके के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है। वीडियो में सभी लोगों के चेहरे साफ साफ दिखाई दे रहे है। कई वीडियो में बकरा भी साफ साफ देखा जा सकता है। पुलिस ने न अभी तक वह बकरा बरामद किया और न ही किसी के बयान लिखे। आपको जानकर हैरानी होगी कि पुलिस इस मामले में शिकायतकर्ता से गवाह और सबूत मांग रही है। समझ यह नहीं आता कि आखिर जांच अधिकारी कौन है? पुलिस या शिकायतकर्ता।

शिकायतकर्ता ने लगाया सही से जांच न करने का आरोप

इस मामले में जब राइट फाउंडेशन के अध्यक्ष के साथ बात की गई तो उनका कहना था कि पुलिस की कार्यवाही से मैं खुद हैरान हूं। समझ नहीं आ रहा कि पुलिस सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों की घोर अवमानना के मामले में कार्यवाही क्यों नहीं कर रही? उन्होंने कहा कि सरेआम लोक निर्माण विभाग की जमीन पर कब्जा किया गया। लेकिन पुलिस ने मामले को पूरी तरह कार्यवाही से बाहर कर दिया है।

उन्होंने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि यह वारदात पुलिस की मौजूदगी में हुई। जिनकी तैनाती गोहर पुलिस स्टेशन से सुरक्षा और कानून की पालना करवाने के लिए की गई थी। लेकिन फिर भी सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के बलि के विरुद्ध दिए आदेशों की घोर अवमानना हुई। एएसआई अजय की टीम ने मौके पर कोई कार्यवाही नहीं की। हैरानी की बात यह है कि एफआईआर में पुलिस के खिलाफ कार्यवाही की मांग के बाबजूद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कोई कार्यवाही की गई।

राइट फाउंडेशन के अध्यक्ष ने कहा कि वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कार्यक्रम का आयोजन व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजकुमार ठाकुर ने करवाया था। जिसके लिए सभी दुकानदारों से 11-1100 रुपए लिए गए थे। लेकिन पुलिस ने उनके भी बयान दर्ज नहीं किए और ना ही उनको जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया। उन्होंने कहा कि मौके पर नाचन के विधायक विनोद कुमार मौजूद थे, मैंने उनके ऑफिसियल पेज से चलाए गए वीडियो का रिफरेंस दिया है। लेकिन पुलिस ने विधायक विनोद कुमार का बयान तक दर्ज नहीं किया।

शिकायतकर्ता बोले, हाई कोर्ट में दायर करूंगा याचिका

राइट फाउंडेशन के अध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में पुलिस सही से कानूनी कार्यवाही नहीं कर रही। भारतीय संविधान के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट/हाई कोर्ट के बलि के खिलाफ आदेशों की अवहेलना करके अदालतों का घोर अपमान किया गया है। जोकि सहन करने योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून, संविधान और अदालत के आदेशों की पालना निश्चित करवाने के लिए मै स्वयं इस मामले में हाई कोर्ट में याचिका दायर करूंगा और व्यापार मंडल, देवता के देवलूयों, पुलिस, प्रशासन, लोकनिर्माण विभाग समेत सभी कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ कार्यवाही करवाऊंगा।

क्या है मामला

आपको बता दें कि वीरवार को चैल चौक बाजार के मुख्य चौराहे पर सरेआम सैकड़ों लोगों के सामने बकरे की बलि दी गई। जिसको लेकर राइट फाउंडेशन के अध्यक्ष ने पुलिस को शिकायत दी और मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। लेकिन अभी तक आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की है। बल्कि उल्टा शिकायतकर्ता से सबूतों और गवाहों की मांग कर रही है।

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