मेगा मॉक ड्रिल: हिमाचल में भूकंप से निपटने की तैयारियों का परीक्षण, जानें कहां-कहां किया गया अभ्यास

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार को मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (HPSDMA) ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के तकनीकी सहयोग से इस अभ्यास को सभी 12 जिलों में आयोजित किया। इसका उद्देश्य भूकंप, बाढ़ और अग्निकांड जैसी आपदाओं में प्रशासन और नागरिकों की तैयारियों का परीक्षण करना था। हमीरपुर, शिमला, कुल्लू और चंबा जैसे जिलों में विभिन्न परिदृश्यों के तहत रेस्क्यू और राहत कार्यों का अभ्यास किया गया।

भूकंप परिदृश्य और रेस्क्यू अभियान

हमीरपुर में मेगा मॉक ड्रिल के तहत 8.0 तीव्रता के भूकंप का परिदृश्य तैयार किया गया। उपायुक्त अमरजीत सिंह ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नेतृत्व में 10 स्थानों पर अभ्यास की निगरानी की। बस स्टैंड और डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इमारतों के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। एडीसी अभिषेक गर्ग ने टीमें को निर्देश दिए। स्थानीय समुदाय की त्वरित प्रतिक्रिया के बाद, एनडीआरएफ और अन्य टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

शिमला में स्कूलों और अस्पतालों में अभ्यास

शिमला में मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन पोर्टमोर और विकासनगर स्कूलों में किया गया। पोर्टमोर स्कूल में भूकंप प्रभावित क्षेत्र का परिदृश्य बनाया गया, जहां इमारत का हिस्सा ढहने की स्थिति में छात्रों और स्टाफ को सुरक्षित निकाला गया। एनडीआरएफ के मेजर धर्मेंद्र ठाकुर ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) का दौरा किया। आईजीएमसी में 1000 बेड की व्यवस्था है, जिसे आपातकाल में 1400 तक बढ़ाया जा सकता है। विकासनगर में पेट्रोल पंप पर आग लगने का अभ्यास हुआ, जिसमें अग्निशमन और पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की।

कुल्लू और चंबा में रेस्क्यू ऑपरेशन

कुल्लू में भूतनाथ के पास ब्यास नदी के किनारे फंसे पर्यटकों को राफ्टिंग की मदद से बचाया गया। रेस्क्यू के बाद घायलों को क्षेत्रीय अस्पताल पहुंचाया गया। चंबा में रावी नदी और साल खड्ड में फंसे लोगों को स्टेचर और एंबुलेंस के जरिए निकाला गया। सुबह 11 बजे सायरन बजते ही टीमें तुरंत हरकत में आईं। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्राथमिक उपचार और राहत कार्यों की निगरानी की।

जनता की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर चर्चा

X पर यूजर्स ने इस मेगा मॉक ड्रिल को आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण कदम बताया। एक यूजर ने लिखा, “हिमाचल में भूकंप की स्थिति से निपटने के लिए यह अभ्यास जरूरी है।” हालांकि, कुछ ने ग्रामीण क्षेत्रों में और जागरूकता की मांग की। एक पोस्ट में कहा गया, “रेस्क्यू टीमें तेज हैं, लेकिन गांवों में संसाधन बढ़ाने की जरूरत है।” ये प्रतिक्रियाएं दर्शाती हैं कि लोग इस पहल का समर्थन करते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी पर चिंता भी जताई।

हिमाचल की भौगोलिक चुनौतियां और तैयारियां

हिमाचल प्रदेश भूकंपीय जोन IV और V में आता है, जिसके कारण यह भूकंप के लिए अत्यधिक संवेदनशील है। NDMA के रिटायर्ड मेजर जनरल सुधीर बहल ने कहा, “हिमाचल जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में संचार और सड़क सुविधाएं सीमित हैं। इसलिए स्थानीय समुदाय और स्वयंसेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण है।” इस अभ्यास में एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और होमगार्ड ने हिस्सा लिया। 109 सिमुलेशन साइट्स पर यह ड्रिल आयोजित हुई, जिसमें 30 से अधिक सरकारी और गैर-सरकारी एजेंसियां शामिल थीं।

तकनीकी सहायता और भविष्य की योजनाएं

NDMA ने इस ड्रिल के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की, जिसमें जीआईएस तकनीक और आपदा प्रबंधन ऐप ‘सचेत’ का उपयोग हुआ। यह ऐप नागरिकों को आपदा से पहले, दौरान और बाद में अलर्ट और सलाह देता है। सरकार अब भविष्य में और अधिक मॉक ड्रिल आयोजित करने की योजना बना रही है। इसमें बाढ़, भूस्खलन और औद्योगिक दुर्घटनाओं जैसे परिदृश्य शामिल होंगे। इसका लक्ष्य आपदा प्रबंधन को और मजबूत करना है।

सामुदायिक भागीदारी का महत्व

मॉक ड्रिल में आपदा मित्र, सिविल डिफेंस और एनसीसी कैडेट्स जैसे स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। विशेषज्ञों का मानना है कि आपदा के समय त्वरित सहायता के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित स्वयंसेवक जरूरी हैं। हिमाचल सरकार ने स्कूलों और अस्पतालों में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की योजना बनाई है।

यह अभ्यास हिमाचल के आपदा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल प्रशासन की तैयारियां मजबूत होंगी, बल्कि नागरिकों में भी जागरूकता बढ़ेगी।

Author: Anil Sharma, Himachal Pradesh

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