निकल घर से कमर को बांध और यलगार करना सीख
के अब हर ज़ुल्म की बुनियाद को मस्मार करना सीख

यहां पर अब तेरा खामोश रहना जान ले लेगा
ज़बाँ को खोल और दुश्मन से तू तकरार करना सीख

कभी ना भूलना तू तीन सौ तेराह का वारिस है
उठा एक शाख़े नाज़ुक और उसे तलवार करना सीख

फ़क़त ज़िक्र व तिलावत से ही आज़ादी नहीं मिलती
उठा शमशीर दुश्मन को ज़लील व ख़्वार करना सीख

कोई हस्सान उन मज़लूम से जा कर यही कह दे
न बुज़दिल बन तू पीछे मुड़ पलट के वार करना सीख