इजराइल ईरान युद्ध: शेयर बाजार में भारी गिरावट, सोना और तेल की कीमतें उछलीं
Global News: इजराइल ईरान युद्ध ने 13 जून 2025 को वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी। इजराइल के ईरान पर मिसाइल हमले और जवाबी कार्रवाई ने शेयर बाजार को झकझोर दिया। सेंसेक्स 1300 अंकों से ज्यादा लुढ़का, जबकि सोने और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं। निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल है।
शेयर बाजार में उथल-पुथल
इजराइल ईरान युद्ध ने भारतीय और वैश्विक शेयर बाजारों को दबाव में ला दिया। बीएसई सेंसेक्स 1300 अंक गिरकर 80,000 के नीचे आ गया। निफ्टी 50 भी 400 अंकों की गिरावट के साथ 24,500 से नीचे बंद हुआ। निवेशकों को 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ। अमेरिकी बाजार में भी डाउ जोंस 1% से ज्यादा टूटा। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में तनाव और डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों ने बाजार की चिंता बढ़ाई।
सोने की कीमतों में उछाल
सोने ने शुक्रवार को इतिहास रच दिया। एमसीएक्स पर सोना 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंचा। वैश्विक बुलियन बाजार में तेजी और रुपये की कमजोरी ने इसे बढ़ावा दिया। विश्लेषकों का कहना है कि इजराइल ईरान युद्ध बढ़ने पर सोने की मांग और बढ़ेगी। लोग इसे सुरक्षित निवेश मानते हैं। अनिश्चितता के दौर में सोना निवेशकों की पहली पसंद बन गया है।
तेल की कीमतों में 13% की बढ़ोतरी
ब्रेंट क्रूड की कीमत 78.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची, जो दो महीने का उच्चतम स्तर है। तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने कीमतें बढ़ाईं। मध्य पूर्व, जहां से वैश्विक तेल का 20% हिस्सा आता है, युद्ध की चपेट में है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरा मंडरा रहा है। 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह तेल की सबसे बड़ी उछाल है।
इजराइल का हमला और ईरान की जवाबी कार्रवाई
इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और मिसाइल कारखानों पर हमला किया। IDF ने कहा कि यह ऑपरेशन ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए है। ईरान ने 100 से ज्यादा ड्रोन से जवाब दिया। तेहरान में धमाकों की खबरें हैं। दोनों देशों के बीच तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया। रॉयटर्स के अनुसार, इजराइल का ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है।
निवेशकों की चिंता और सुरक्षित निवेश
निवेशक जोखिम से बचने के लिए सोना, ट्रेजरी बॉन्ड, और सुरक्षित मुद्राओं जैसे डॉलर और येन की ओर रुख कर रहे हैं। मध्य पूर्व में युद्ध का खतरा और तेल आपूर्ति की अनिश्चितता ने बाजारों को अस्थिर कर दिया। भारत जैसे तेल आयातक देशों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। विश्लेषक सलाह दे रहे हैं कि निवेशक सतर्क रहें। इजराइल ईरान युद्ध का असर लंबे समय तक रह सकता है।

