सेब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने घोटालेबाजों की जमानत याचिका की खारिज, हाई कोर्ट के फैसले को ठहराया सही
Himachal News: चंबा जिले के चुराह क्षेत्र में सेब पौध खरीद घोटाले के आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया और अंतरिम जमानत देने से इनकार किया। इससे आरोपियों की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है। स्थानीय लोग इस सेब घोटाले से परेशान हैं और न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।
पुलिस ने शुरू की धरपकड़
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नूरपुर पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी की तैयारी तेज कर दी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद कई आरोपी दिल्ली भाग गए थे, जबकि पुलिस उनकी तलाश तीसा में कर रही थी। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पुलिस इस मामले में गहन जांच कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घोटाले ने उनकी मेहनत और विश्वास को ठेस पहुंचाई है।
88 लाख का सरकारी नुकसान
2022 में मनरेगा के तहत सनवाल पंचायत में 8 पौधारोपण कार्य स्वीकृत हुए थे। इसके लिए 1.17 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिसमें से 88 लाख रुपये वैंडरों के खाते में डाले गए। शिकायत के बाद मुख्य सचिव ने जांच शुरू की। जांच में अनियमितताएं सामने आईं, लेकिन पंचायत प्रधान को सिर्फ निलंबित किया गया। अन्य आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई। इस सेब घोटाले ने सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया।
अनधिकृत पौधों की बिक्री
बागवानी विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि एक नर्सरी वैंडर ने सनवाल पंचायत को 48,500 सेब पौधे बेचे, जबकि वह केवल 22,500 पौधे बेचने के लिए अधिकृत था। चुराह और अन्य पंचायतों में भी अनधिकृत पौधे सप्लाई किए गए। जांच में पाया गया कि एक ही व्यक्ति की लिखावट में बिल तैयार किए गए। पुलिस ने हस्ताक्षर नमूने जांच के लिए भेजे हैं। यह घोटाला स्थानीय किसानों के लिए निराशाजनक है।
असमान रोपाई और बारिश का बहाना
जांच कमेटी ने सनवाल में पौधारोपण का निरीक्षण किया। प्राथमिक पाठशाला के पास असमान रोपाई देखी गई। एक बीघा में 310 पौधे रोपे गए, जबकि सामान्य रूप से 22-32 पौधे ही संभव हैं। 19,387 पौधों में से ज्यादातर सूख गए। पंचायत प्रतिनिधियों ने भारी बारिश को जिम्मेदार ठहराया, लेकिन राजस्व विभाग ने इस दौरान भारी बारिश की बात खारिज की। यह खुलासा घोटाले की गहराई को दर्शाता है।