रुपया गिरावट: इजराइल-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से 86.13 पर खुला
India News: भारतीय रुपया शुक्रवार सुबह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारी रुपया गिरावट के साथ 86.13 पर खुला। यह पिछले दो महीनों का सबसे निचला स्तर है। गुरुवार को यह 85.60 पर बंद हुआ था, लेकिन इजराइल-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने रुपये पर दबाव डाला। इस गिरावट ने आम लोगों और व्यवसायों में चिंता बढ़ा दी है।
शुरुआती कारोबार में रुपये की स्थिति
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 86.20 तक गिर गया। हालांकि, बाद में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के हस्तक्षेप से यह 86.04 पर आया। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य-पूर्व में अस्थिरता और तेल की बढ़ती कीमतें रुपये को और कमजोर कर सकती हैं। भारत, जो अपनी तेल जरूरतों का 80% आयात करता है, इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है।
इजराइल-ईरान तनाव का असर
इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले शुरू किए, जिन्हें ‘राइजिंग लायन’ नाम दिया गया। इन हमलों में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रमुख हुसैन सलामी की मौत की खबर है। इजराइल ने देश में आपातकाल घोषित कर दिया। इस तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी। तेल की आपूर्ति पर खतरे ने रुपया गिरावट को और गहरा किया।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
मध्य-पूर्व के तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी आई।
यह 2022 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक वृद्धि है। भारत के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि तेल आयात बिल बढ़ने से व्यापार घाटा और महंगाई बढ़ सकती है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत रूस से तेल आयात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
आर्थिक प्रभाव और चिंताएं
रुपया गिरावट और तेल की बढ़ती कीमतें भारत की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो भारत का चालू खाता घाटा (CAD) 3.6% तक बढ़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ेगी और आम लोगों पर बोझ पड़ेगा। RBI के पास $648 बिलियन का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो रुपये को स्थिर करने में मदद कर सकता है।