नेमालाइन मायोपैथी: पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ की बेटियों को है दुर्लभ बीमारी, जानें कितनी खतरनाक

India News: पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की बेटियां प्रियंका और माही नेमालाइन मायोपैथी से जूझ रही हैं। इस दुर्लभ जेनेटिक बीमारी ने उनके सरकारी आवास खाली करने में देरी का कारण बना। यह बीमारी मांसपेशियों को कमजोर करती है। प्रियंका को सांस लेने के लिए ट्रेकियोस्टोमी ट्यूब चाहिए। उनके घर में आईसीयू जैसा सेटअप है। यह खबर लोगों में संवेदना और जागरूकता पैदा कर रही है। लोग उनकी स्थिति को समझ रहे हैं।

नेमालाइन मायोपैथी क्या है

नेमालाइन मायोपैथी एक दुर्लभ जेनेटिक डिसऑर्डर है। इसे रॉड बॉडी मायोपैथी भी कहते हैं। यह स्केलेटल मांसपेशियों को प्रभावित करता है। मांसपेशियों में धागे जैसी संरचनाएं बनती हैं। ये संरचनाएं मांसपेशियों के सामान्य काम में बाधा डालती हैं। यह बीमारी 50,000 में से किसी एक व्यक्ति को होती है। यह जन्मजात होती है और मांसपेशियों की कमजोरी का कारण बनती है। लोग इस बीमारी के बारे में कम जानते हैं।

बेटियों की गंभीर स्थिति

जस्टिस चंद्रचूड़ ने बताया कि उनकी बेटियां प्रियंका और माही को गंभीर देखभाल चाहिए। प्रियंका की हालत ज्यादा नाजुक है। वह ट्रेकियोस्टोमी ट्यूब पर निर्भर हैं। धूल और इंफेक्शन से बचाव जरूरी है। उनके दिल्ली के सरकारी आवास में आईसीयू जैसा सेटअप बनाया गया है। यह परिवार के लिए भावनात्मक और व्यावहारिक चुनौती है। लोग उनकी इस मजबूरी को समझ रहे हैं। यह स्थिति गहरी संवेदना जगाती है।

बीमारी के लक्षण

नेमालाइन मायोपैथी मांसपेशियों को कमजोर करती है। इससे चलने-फिरने में दिक्कत होती है। सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है, खासकर रात में। चेहरे की मांसपेशियां कमजोर होने से बोलने और निगलने में मुश्किल होती है। चेहरा भावहीन दिख सकता है। बार-बार इंफेक्शन का खतरा रहता है। मरीजों को व्हीलचेयर की जरूरत पड़ सकती है। यह लक्षण जीवन को कठिन बनाते हैं। लोग इन चुनौतियों से अनजान हैं।

निदान की चुनौतियां

नेमालाइन मायोपैथी का निदान मुश्किल है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने बताया कि भारत में इसके लिए टेस्टिंग सुविधाएं कम हैं। मांसपेशियों की बायोप्सी दर्दनाक होती है। उनकी बेटियों को बिना एनेस्थीसिया के टेस्ट से गुजरना पड़ा। यह अनुभव बेहद कष्टदायक था। जागरूकता की कमी के कारण डॉक्टर भी इसे समझ नहीं पाते। यह स्थिति परिवारों के लिए बड़ी चुनौती है। लोग इसकी गंभीरता को समझ रहे हैं।

इलाज की सीमाएं

इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है। फिजियोथेरेपी और ऑक्यूपेशनल थेरेपी लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं। प्रियंका जैसे मरीजों को सांस के लिए मशीन चाहिए। व्हीलचेयर और अन्य उपकरण जरूरी हैं। सर्जरी से जोड़ों की समस्याएं ठीक की जा सकती हैं। स्पीच थेरेपी बोलने में मदद करती है। यह उपचार मरीजों के जीवन को बेहतर बनाते हैं। लोग इन उपायों की जरूरत को समझ रहे हैं।

आवास खाली करने में देरी

जस्टिस चंद्रचूड़ ने सरकारी आवास खाली करने में देरी का कारण बताया। उनकी बेटियों को व्हीलचेयर के लिए विशेष घर चाहिए। दिल्ली में ऐसा घर ढूंढना मुश्किल है। उनके वर्तमान आवास में रैंप और बड़े दरवाजे हैं। नया घर अभी तैयार नहीं है। यह स्थिति उनकी मजबूरी को दर्शाती है। लोग उनकी इस परेशानी के प्रति सहानुभूति रखते हैं। यह खबर चर्चा में है।

परिवार की देखभाल

प्रियंका और माही की देखभाल के लिए विशेष नर्स और मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम काम करती है। इसमें न्यूरोलॉजिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट शामिल हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ और उनकी पत्नी कल्पना दास का जीवन बेटियों के इर्द-गिर्द है। वे उनकी हर छोटी उपलब्धि को सेलिब्रेट करते हैं। यह परिवार की समर्पण और प्रेम की कहानी है। लोग इस भावनात्मक जुड़ाव को महसूस कर रहे हैं।

जागरूकता की जरूरत

जस्टिस चंद्रचूड़ ने नेमालाइन मायोपैथी पर जागरूकता की कमी को उजागर किया। भारत में डॉक्टरों और केयरगिवर्स को इसकी जानकारी कम है। परिवार अक्सर इस बीमारी को नकारते हैं। बेहतर टेस्टिंग और सपोर्ट सिस्टम की जरूरत है। यह खुलासा लोगों को इस दुर्लभ बीमारी के प्रति संवेदनशील बना रहा है। लोग इस मुद्दे पर ध्यान दे रहे हैं।

बीमारी का खतरा

नेमालाइन मायोपैथी गंभीर हो सकती है। सांस की दिक्कतें जानलेवा बन सकती हैं। प्रियंका जैसे मरीजों को हर समय देखभाल चाहिए। अगर समय पर इलाज न मिले, तो स्थिति बिगड़ सकती है। व्हीलचेयर और मेडिकल उपकरण जरूरी हैं। यह बीमारी मरीजों और परिवारों के लिए बड़ी चुनौती है। लोग इसकी गंभीरता को समझ रहे हैं। यह खबर समाज में जागरूकता बढ़ा रही है।

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