मानसून आपदा: हिमाचल में 800 करोड़ का नुकसान, सीएम सुक्खू बोले, केंद्र से मदद की मांग करें भाजपा सांसद

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में मानसून आपदा ने भारी तबाही मचाई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि 800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कई लोग बेघर और भूमिहीन हो गए। सरकार राहत कार्यों में जुटी है, लेकिन वन भूमि पर पुनर्वास के लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी है। सुक्खू ने चार बीजेपी सांसदों से दिल्ली जाकर इस मुद्दे को उठाने की अपील की। प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हर संभव प्रयास हो रहे हैं।

केंद्र से विशेष राहत की अपील

सुक्खू ने कहा कि 2023 की मानसून आपदा में भी भारी नुकसान हुआ था, लेकिन केंद्र से कोई विशेष राहत नहीं मिली। उन्होंने बीजेपी सांसदों से आग्रह किया कि वे दिल्ली जाकर हिमाचल के लिए आर्थिक मदद मांगें। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि वह प्रभावित क्षेत्रों में राजनीति के लिए नहीं, बल्कि लोगों की मदद के लिए जा रहे हैं। कैबिनेट में जल्द विशेष राहत पैकेज लाया जाएगा।

बेघरों का पुनर्वास

मानसून आपदा ने कई घर तबाह कर दिए। सुक्खू ने कहा कि सरकार बेघर परिवारों को बसाने के लिए प्रतिबद्ध है। वन भूमि पर पुनर्वास के लिए केंद्र से अनुमति मांगी जाएगी, क्योंकि 68% भूमि वन क्षेत्र है। हर नुकसान की भरपाई होगी। प्रभावितों को मुआवजा देने के लिए लापता लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम परिवारों को त्वरित राहत देगा।

राहत और बचाव कार्य

सरकार युद्धस्तर पर राहत कार्य कर रही है। सड़कें खोली जा रही हैं। सुक्खू ने कहा कि जनता सरकार के प्रयासों की सराहना कर रही है। प्रभावित क्षेत्रों में भोजन और राशन हेलीकॉप्टर से पहुंचाया गया। उपमुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री ने भी स्थिति का जायजा लिया। मानसून आपदा से प्रभावित सड़कों, बिजली और पानी की व्यवस्था को बहाल करने के लिए 200 JCB मशीनें लगाई गई हैं।

राजस्व सुधार

सुक्खू ने ‘माई डीड’ परियोजना शुरू की, जिससे भूमि रजिस्ट्री आसान होगी। लोग अब एक बार कार्यालय जाकर या घर से ही रजिस्ट्री कर सकेंगे। बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर, सोलन और ऊना की तहसीलों में यह परियोजना शुरू हुई। यह पहल समय और श्रम बचाएगी। जमाबंदी और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं को भी सरल बनाया गया है।

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मानसून आपदा: हिमाचल में राहत कार्य किए तेज, केंद्र से की बेघरों के पुनर्वास के लिए भूमि की मांग

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में मानसून आपदा ने भारी तबाही मचाई। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार ने मंडी जिले में राहत और बचाव कार्य तेजी से किए। दो दिन के दौरे के बाद शिमला लौटे सुक्खू ने बताया कि आपदा प्रभावितों की मदद के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। बेघर परिवारों को वन भूमि पर बसाने का प्रस्ताव केंद्र के पास है। यह आपदा कई परिवारों के लिए दुखदायी रही।

बेघरों के लिए पुनर्वास

सुक्खू ने कहा कि सरकार बेघर परिवारों को वन भूमि पर बसाना चाहती है। इसके लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी है। उन्होंने सात सांसदों से प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से इस मुद्दे को उठाने की अपील की। विधानसभा में प्रस्ताव पारित हो चुका है। मानसून आपदा ने सैकड़ों परिवारों को बेघर किया। मंजूरी मिलते ही मकान निर्माण और पुनर्वास शुरू होगा। इससे प्रभावित लोगों को नया जीवन मिलेगा।

सड़क और सेवाओं की बहाली

मंडी के सराज, धर्मपुर और करसोग में सड़कें खोलने के लिए 100 जेसीबी मशीनें लगाई गईं। पांच लाख रुपये के ऑफलाइन टेंडर शुरू किए गए। उपमुख्यमंत्री और लोक निर्माण मंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। पेयजल योजनाएं चालू करने के निर्देश दिए गए। मानसून आपदा ने सड़कों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। सरकार का ध्यान सेवाओं को जल्द बहाल करने पर है।

विशेष राहत पैकेज की मांग

मुख्यमंत्री ने केंद्र से विशेष राहत पैकेज की मांग की। उन्होंने कहा कि हिमाचल को अभी तक कोई विशेष सहायता नहीं मिली। वे जल्द दिल्ली जाकर इस मुद्दे को उठाएंगे। मानसून आपदा ने मंडी में कई घर, दुकानें और पशुधन नष्ट किए। राज्य सरकार ने प्रभावितों के लिए मुआवजा पैकेज तैयार किया है। इसे जल्द कैबिनेट में पेश किया जाएगा।

नया कानून और सतर्कता

सुक्खू ने बताया कि जलवायु परिवर्तन ने आपदाओं की तीव्रता बढ़ा दी है। पहले लोग नदी-नालों के किनारे घर बनाते थे। अब सरकार ने नदियों से 50 मीटर की दूरी पर निर्माण का कानून बनाया। नया कानून बनाने पर भी चर्चा हो रही है। यह कदम भविष्य में मानसून आपदा से होने वाले नुकसान को कम करेगा। सरकार लोगों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

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मानसून आपदा: नन्ही निकिता से मिलने पहुंचे जयराम ठाकुर, गोद लेकर किया दुलार

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में मानसून आपदा ने भारी तबाही मचाई। मंडी जिले के सराज क्षेत्र के तलवाड़ा गांव में 30 जून की रात बाढ़ और भूस्खलन ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया। इस त्रासदी में नौ महीने की निकिता ने अपने माता-पिता और दादी को खो दिया। वह रसोई में सुरक्षित मिली, लेकिन उसका पूरा परिवार बह गया। इस ह्रदय विदारक घटना ने सभी को झकझोर दिया है।

त्रासदी की रात

30 जून की रात तलवाड़ा गांव में बाढ़ का पानी अचानक घुस आया। निकिता के पिता नरेश कुमार, मां और दादी पुरणु देवी पानी का बहाव रोकने की कोशिश में थे। तभी पीछे से तेज बहाव आया और तीनों को बहा ले गया। सुबह ग्रामीणों ने निकिता को रसोई में पाया। रिश्तेदारों ने उसे सुरक्षित निकाला। इस मानसून आपदा ने गांव में कई परिवारों को उजाड़ दिया।

जयराम ठाकुर का दौरा

11 जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर तलवाड़ा पहुंचे। उन्होंने मासूम निकिता को गोद में लेकर दुलार किया। निकिता के पिता उनके पीएसओ बलवंत ठाकुर के परिवार से थे। ठाकुर ने कहा कि बच्ची की मासूमियत देखकर दिल टूट गया। वह अपने परिवार को खोज रही है, जो अब कभी नहीं आएंगे। उनकी यह मुलाकात भावुक कर देने वाली थी। ठाकुर ने पीड़ितों के प्रति संवेदना जताई।

परिवार की जिद

निकिता के रिश्तेदारों ने उसे गोद लेने की पेशकश ठुकरा दी। उनकी बुआ और अन्य परिजनों का कहना है कि यह बच्ची उनके परिवार का अनमोल हिस्सा है। वे उसे किसी को नहीं देंगे। निकिता अब उनके लिए बेटी, बहन और मां की तरह है। रिश्तेदार उसकी देखभाल के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस मानसून आपदा ने एक मासूम की जिंदगी बदल दी।

व्यापक तबाही

हिमाचल में इस आपदा ने 90 से अधिक लोगों की जान ले ली। 34 लोग अभी भी लापता हैं। मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां सैकड़ों घर, गौशालाएं और दुकानें नष्ट हो गईं। राहत कार्य तेजी से चल रहे हैं। सरकार ने प्रभावितों के लिए सहायता की घोषणा की है। लेकिन निकिता जैसी कहानियां हर किसी के दिल को छू रही हैं।

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मानसून आपदा: हिमाचल में फिर मानसून की बारिश बरपाएगी कहर, 5 से 7 जुलाई तक ऑरेंज अलर्ट जारी

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में मानसून आपदा ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। मंडी जिले में बादल फटने और भूस्खलन से भारी नुकसान हुआ। 20 जून से 1 जुलाई तक 51 लोगों की मौत हुई। 22 लोग लापता हैं। 283 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रभावितों को तत्काल मदद का निर्देश दिया। प्रशासन राहत कार्य में जुटा है। लोग नदियों और भूस्खलन क्षेत्रों से दूर रहने को कहा गया है।

मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विभाग ने 2-4 जुलाई तक यलो अलर्ट जारी किया है। 5 से 7 जुलाई तक मानसून आपदा का खतरा बढ़ेगा, जिसके लिए ऑरेंज अलर्ट है। कसौली में 55 मिमी और मंडी में 36 मिमी बारिश दर्ज हुई। भूस्खलन और जलभराव का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। नदियों और नालों के किनारे न जाने की सलाह दी गई है।

भारी नुकसान और राहत कार्य

मानसून आपदा से मंडी सबसे ज्यादा प्रभावित है। 55 मकान, 9 दुकानें और 45 गौशालाएं क्षतिग्रस्त हुईं। पंडोह डैम से 1.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। चंडीगढ़-मनाली हाईवे कई जगह बंद है। NDRF और SDRF की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं। 316 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए प्रशासन दिन-रात काम कर रहा है।

मुख्यमंत्री की अपील

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मानसून आपदा पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। प्रशासन को तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से आपदा प्रबंधन की चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई। सभी जिला अधिकारी अलर्ट मोड पर हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्कूल बंद किए गए हैं।

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मॉनसून आपदा: कुल्लू में बादल फटने से सैंज घाटी में बाढ़, पिता-बेटी समेत तीन लापता; कसोल में भी मची भारी तबाही

Himachal News: हिमाचल में मॉनसून आपदा ने कहर बरपाया। कुल्लू के सैंज घाटी में बादल फटने से जीवा नाले में बाढ़ आई। पिता-बेटी सहित तीन लोग बह गए। हाईड्रो प्रोजेक्ट के शेड और पुल क्षतिग्रस्त हुए। मणिकर्ण, बंजार और तीर्थन घाटी में भारी नुकसान हुआ। कसोल में पार्किंग की गाड़ियां बही। प्रशासन ने राहत कार्य शुरू किए। ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ने से अलर्ट जारी। लोग नदियों से दूर रहें।

सैंज घाटी में भारी तबाही

कुल्लू की सैंज घाटी में मॉनसून आपदा ने सबसे ज्यादा नुकसान किया। जीवा नाले में बादल फटने से फ्लैश फ्लड आया। रैला गांव में तीन लोग लापता हो गए। सैंज नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुंचा। हाईड्रो प्रोजेक्ट के शेड में मलबा घुसा। एक पुल को नुकसान हुआ। बिहाली गांव में भूमि कटाव से खतरा बढ़ा। प्रशासन ने बचाव कार्य तेज किए। लोग सुरक्षित स्थानों पर जाएं।

मणिकर्ण और कसोल में हड़कंप

मॉनसून आपदा ने मणिकर्ण में भी तबाही मचाई। तोश की पहाड़ियों में बारिश से बाण गंगा खड्ड में बाढ़ आई। कसोल में खड्ड किनारे पार्किंग की पर्यटकों की गाड़ियां बह गईं। कई गांवों में अफरातफरी मची। बड़े पेड़ और मलबा खड्डों में बहता दिखा। बंजार विधायक सुरेंद्र शौरी ने प्रशासन से तत्काल राहत कार्य की मांग की। उन्होंने लोगों से नदी-नालों से दूरी बनाए रखने की अपील की।

प्रशासन और मौसम विभाग का अलर्ट

कुल्लू से मंडी तक मॉनसून आपदा के चलते हाई अलर्ट जारी है। ब्यास नदी का जलस्तर बढ़ने से पंडोह डैम के गेट खोले गए। मौसम विभाग ने एक सप्ताह तक बारिश का येलो अलर्ट जारी किया। बंजार विधायक ने कहा कि सैंज में पिछले साल की त्रासदी से भी बड़ा नुकसान हुआ। गड़सा में मनिहार के पास पुल बह गया। प्रशासन राहत और बचाव में जुटा है। लोग सतर्क रहें।

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⚡️ Monsoon havoc in North India: 72 deaths in Himachal Pradesh, 34 in Uttar Pradesh; Rs 3000 crore loss. Flash floods, landslides, and collapsing houses cause devastation in popular tourist spots. Waterlogging and flood warnings in Delhi-NCR. Rescue operations underway in Himachal Pradesh's Spiti Valley. #MonsoonDisaster #NaturalDisaster #NorthIndia https://www.riskmap.com/incidents/1852882/articles/183591730/?utm_source=dlvr.it&utm_medium=mastodon