हिमाचल शिक्षा सुधार: स्कूल-कॉलेज मर्जर, गैर-शिक्षक पदों की कमी, 7,485 खाली पदों ने व्यवस्था पर बढ़ाया दबाव
Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए कई कदम उठा रही है, जिसमें हिमाचल स्कूल मर्जर योजना प्रमुख है। कम छात्र संख्या वाले स्कूलों और कॉलेजों को बंद या मर्ज किया जा रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, सरकार ने 70 स्कूलों और 21 कॉलेजों को डिनोटिफाई करने का फैसला लिया है। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने का लक्ष्य है। हालांकि, गैर-शिक्षक कर्मचारियों के 7,485 खाली पदों ने व्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है।
गैर-शिक्षक पदों की कमी
राज्य में गैर-शिक्षक कर्मचारियों की कमी एक बड़ी चुनौती है। शिक्षा विभाग में विभिन्न श्रेणियों में हजारों पद खाली हैं। निम्नलिखित तालिका खाली पदों का विवरण देती है:
- अधीक्षक ग्रेड-2: 1420 स्वीकृत, 141 खाली
- वरिष्ठ सहायक: 2302 स्वीकृत, 1152 खाली
- लिपिक कनिष्ठ कार्यालय: 2791 स्वीकृत, 1409 खाली
- कनिष्ठ कार्यालय सहायक (लाइब्रेरी): 774 स्वीकृत, 770 खाली
- प्रयोगशाला परिचर: 4506 स्वीकृत, 1875 खाली
- पार्ट-टाइम मल्टी टास्क वर्कर: 8000 स्वीकृत, 1258 खाली
यह कमी कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है। एक कर्मचारी को दो-तीन भूमिकाएं निभानी पड़ रही हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने 600 गैर-शिक्षक पदों पर नियुक्तियां की हैं, जिनमें कुछ पदोन्नति और कुछ सीधी भर्ती शामिल हैं।
सरकार के सुधारात्मक कदम
हिमाचल सरकार ने हिमाचल स्कूल मर्जर के तहत सरप्लस कर्मचारियों को अन्य स्कूलों में तैनात किया है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि सभी खाली पदों को जल्द भरा जाएगा। हाल ही में सरकार ने 100 जेओए-लाइब्रेरी पदों को भरने की मंजूरी दी, जो उन स्कूलों में तैनात होंगे जहां छात्रों की संख्या 300 से अधिक है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने कैबिनेट से इन पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कर्मचारियों की मांग
अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष त्रिलोक ठाकुर ने खाली पदों का मुद्दा सरकार के सामने उठाया है। उन्होंने कहा कि कुछ पदों को पदोन्नति से भरा गया है, लेकिन बाकी पदों को जल्द भरने की जरूरत है। कर्मचारियों का कहना है कि स्टाफ की कमी से प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
शिक्षा सुधारों का व्यापक दृष्टिकोण
हिमाचल सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई अन्य कदम उठाए हैं। द प्रिंट के अनुसार, सरकार ने राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल और स्कूल ऑफ एक्सीलेंस शुरू किए हैं। ये स्कूल नवाचारी शिक्षण विधियों और बेहतर संसाधनों पर केंद्रित हैं। इसके अलावा, 6,000 शिक्षकों की भर्ती की गई और 3,100 अन्य शिक्षक पदों के लिए प्रक्रिया चल रही है। सरकार ने 6,692 गैर-शिक्षक पदों की भर्ती की घोषणा भी की, जिसमें आया, योग शिक्षक और विशेष शिक्षक शामिल हैं।
चुनौतियां और आलोचनाएं
हिमाचल स्कूल मर्जर योजना के बावजूद, कुछ लोग इसका विरोध कर रहे हैं। एक्स पर कुछ पोस्ट्स में दावा किया गया कि स्कूलों में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की कमी है। हालांकि, शिक्षा मंत्री ने इन आलोचनाओं का खंडन करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। जनवरी 2025 की ASER रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश ने छात्रों की पढ़ाई में शीर्ष स्थान हासिल किया है।
भविष्य की योजनाएं
सरकार ने अगले चरण में सभी खाली गैर-शिक्षक पदों को भरने का वादा किया है। इसके लिए भर्ती प्रक्रिया को तेज करने की योजना है। साथ ही, शिक्षा विभाग ने शिक्षक स्थानांतरण नीति में बदलाव किए हैं ताकि शैक्षणिक सत्र के बीच में व्यवधान न हो। यह कदम शिक्षा व्यवस्था को और सुचारू बनाने में मदद करेगा।
Author: Rashmi Sharma, Himachal Pradesh