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मनरेगा मजदूरी: हिमाचल में 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अटकी, मजदूर हो रहे परेशान
Himachal News: हिमाचल प्रदेश में मनरेगा मजदूरी की राशि पिछले नौ महीनों से अटकी है। करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि के कारण मजदूरों को बार-बार पंचायत कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि यह राशि उनके परिवारों के लिए जीवनरेखा है। पंचायत प्रधान और सचिव आश्वासन दे रहे हैं कि सरकार से राशि मिलते ही भुगतान होगा। इस देरी ने ग्रामीणों में निराशा फैलाई है।
दिहाड़ी वृद्धि का वादा अधूरा
कांग्रेस सरकार ने अप्रैल 2023 में मनरेगा मजदूरी को 224 रुपये से बढ़ाकर 240 रुपये किया। फिर 2024 में इसे 300 रुपये करने की घोषणा हुई। लेकिन प्रदेश सरकार ने बढ़ाई गई राशि, पहले 16 रुपये और बाद में 64 रुपये, जारी नहीं की। एक मजदूर को 15 दिन के काम के लिए 960 रुपये प्रदेश सरकार से मिलने थे। यह राशि न मिलने से मजदूरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
केंद्र की राशि भी बाकी
केंद्र सरकार ने 3 जून को विकास कार्यों के लिए 101 करोड़ रुपये जारी किए। लेकिन एक महीने बाद भी यह राशि पंचायतों तक नहीं पहुंची। मजदूरों को केंद्र से 3540 रुपये मिल रहे हैं, लेकिन प्रदेश सरकार का हिस्सा बाकी है। इससे मनरेगा मजदूरी की पूरी राशि मजदूरों तक नहीं पहुंच रही। ग्रामीण विकास विभाग पर सवाल उठ रहे हैं। मजदूरों का इंतजार और लंबा हो रहा है।
पंचायतों का आश्वासन
सिरमौर जिले के पच्छाद उपमंडल में पंचायती राज प्रधान उपप्रधान संघ के अध्यक्ष नरेंद्र गोसाई ने बताया कि 64 रुपये की बढ़ी दिहाड़ी नौ महीने से अटकी है। मजदूरों को सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं। पंचायतें केंद्र की राशि पर निर्भर हैं, लेकिन प्रदेश सरकार की देरी ने हालात बिगाड़ दिए। मजदूरों का कहना है कि यह राशि उनके बच्चों के भविष्य के लिए जरूरी है।
सरकार का जवाब
पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि कुछ राशि पंचायतों को जारी कर दी गई है। बाकी राशि जल्द जारी होगी। लेकिन मजदूरों का कहना है कि बार-बार के आश्वासनों से अब भरोसा टूट रहा है। मनरेगा मजदूरी की देरी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। मजदूरों को उम्मीद है कि सरकार जल्द कदम उठाएगी ताकि उनकी मेहनत का फल मिल सके।