Amethi Murder Update: अमेठी हत्याकांड पर Chandrashekhar Azad बजा देंगे ईंट से ईंट,कर दिया बड़ा एलान!

अमेठी में दलित टीचर और उसके परिवार की गोली मारकर हत्या के केस में नगीना सांसद ने योगी सरकार को लपेट दिया..गुस्से तमतमाए चंद्रशेखर आज़ाद ने यूपी पुलिस के धागे खोल दिए..सवालों की तोप चला दी..दे दी बड़ी चेतावनी सीधे कहा नहीं मिला इंसाफ को चंद्रशेखर आजाद बजा देंगे ईंट से ईंट..कह दिया कर देंगे अमेठी कूच.. #AmethiNews #AmethiMurderUpdate #upcrimenews #dalitnews #teachermurder

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रायबरेली पहुंचे राहुल गांधी ने दलित युवक की मौत के मामले में मांगा न्याय #rahulgandhi #raebareli

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Rahul Gandhi news: रायबरेली पहुंचे राहुल गांधी, दलित युवक की मौत के मामले में की न्याय की मांग, सुनिए क्या कहा...

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यूपी में हिंदूवादी संगठन ने दलित युवक के साथ की मारपीट, सिर मुड़वाकर घुमाया; वीडियो भी किया वायरल

Uttar Pradesh News: यूपी के फतेहपुर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक दलित युवक को ईसाई धर्म अपनाने का आरोप लगाकर उसकी पिटाई की गई, धमकाया गया और सिर मुंडवाकर पूरे गांव में घुमाया गया। इसका वीडियो भी बनाकर वायरल कर दिया गया। घटना खागा थाना के ऐलई गांव की बताई जा रही है। पीड़ित ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर बर्बरता का आरोप लगाते हुए शिकायत की है, जबकि विश्व हिंदू परिषद ने इसे सहमति से ईसाई धर्म अपनाने वाले युवक की घर वापसी बताया है। एसपी ने बताया कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आया है। शिकायत की जांच की जा रही है। आपका अपना अखबार ‘हिन्दुस्तान’ वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

वीडियो वायरल होने के बाद ऐलई गांव के शिवबरन पासवान ने शुक्रवार शाम बताया कि गुरुवार को वह अपने बेटे का इलाज कराने जा रहे थे, तभी इलाके के बजरंग दल के कार्यकर्ता रोहित ने कुछ साथियों के साथ उन्हें घेर लिया। उन पर लोगों को ईसाई धर्म अपनाने का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज की। जान से मारने की धमकी दी। शुक्रवार सुबह जब मैं उन्नाव से लौटा तो बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मुझे पकड़ लिया।

मेरी पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट की गई। उन्होंने जबरन मेरा सिर मुंडवा दिया और मुझे पीटते हुए पूरे गांव में घुमाया। कई घंटे घुमाने के बाद वे मुझे गांव के बाहर एक मंदिर में ले गए। उन्होंने मुझे माथा टेकने पर मजबूर किया और पूजा करने के लिए मजबूर किया। मैंने पुलिस से शिकायत की है लेकिन कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। थाने के बाहर भी बजरंग दल के लोग मुझे घेरे हुए हैं।

इस घटना से इलाके में सनसनी फैल गई है। बताया जा रहा है कि पीड़ित के खिलाफ दो साल पहले धर्म परिवर्तन का मामला दर्ज हुआ था। उधर, बजरंग दल के जिला संयोजक राजू सोनकर ने कहा कि रोहित दीक्षित बजरंग दल का कार्यकर्ता है। लेकिन ऐलाई गांव में ऐसा कुछ हुआ है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। मैं निजी कारणों से फतेहपुर से बाहर हूं। उधर, विहिप के जिला अध्यक्ष केके मिश्रा ने पिटाई के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि युवक की घर वापसी करा दी गई है। वह अपनी मर्जी से हिंदू रीति-रिवाज के साथ हिंदू धर्म में वापस लौटा है।

एसपी फतेहपुर धवल जायसवाल के मुताबिक युवक का आरोप है कि उसके साथ मारपीट की गई और उसे जबरन पूरे गांव में घुमाया गया। वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि युवक की मर्जी से घर वापसी की गई है। युवक के खिलाफ 2022 में धर्म परिवर्तन का मामला दर्ज हुआ था। शिकायत की जांच की जा रही है। जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

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दलित पिता और गैर दलित महिला के बच्चे बना सकते हैं एससी प्रमाणपत्र, जानें सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए गुरुवार को एक बड़ा फैसला सुनाया। देश की सर्वोच्च अदालत ने दलित पुरुष और गैर-दलित महिला की शादी को निरस्त कर दिया। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि पति अपने नाबालिग बच्चों के लिए अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाणपत्र प्राप्त करें जो पिछले छह वर्षों से अपनी मां के साथ रह रहे हैं।

जस्टिस सूर्यकांत और उज्जल भुइयां की पीठ ने जूही पोरिया (पूर्व में जावलकर) और प्रदीप पोरिया को तलाक देते हुए कहा कि गैर-दलित महिला शादी के जरिए अनुसूचित जाति में शामिल नहीं हो सकती है। हालांकि दलित पुरुष से जन्मे उनके बच्चों को अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त होगा। कोर्ट ने 2018 के एक फैसले को दोहराते हुए कहा, “जन्म के आधार पर जाति तय होती है और विवाह से जाति नहीं बदल सकती। केवल इस तथ्य के कारण कि महिला के पति अनुसूचित जाति समुदाय से हैं, उन्हें अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र नहीं दिया जा सकता है।”

मामले में दोनों के 11 वर्षीय बेटे और छह साल की बेटी के लिए एससी जाति का प्रमाण पत्र प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। आपको बता दें कि दोनों 6 वर्षों से गैर-दलित मां के साथ रायपुर में अपने नाना-नानी के घर पर जीवन व्यतीत किया है। कोर्ट ने कहा कि मां-बाप के तलाक के बाद भी बच्चों को अनुसूचित जाति के तहत सरकारी शिक्षा और रोजगार के लाभ प्राप्त करने का अधिकार होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने पति को आदेश दिया कि वह छह महीनों के भीतर बच्चों के लिए अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र प्राप्त करें। इसके साथ ही पति को बच्चों की शिक्षा (पोस्ट-ग्रेजुएशन तक) के लिए सभी खर्च, जैसे प्रवेश शुल्क, ट्यूशन शुल्क और आवासीय खर्च उठाने का निर्देश दिया गया।

पति ने पत्नी और बच्चों के जीवनभर के मेंटिनेंस के तौर पर 42 लाख रुपये का एकमुश्त भुगतान किया है। इसके अतिरिक्त कोर्ट को रायपुर में पति का एक जमीन का प्लॉट भी पत्नी को सौंपने का आदेश दिया गया। इससे पहले पीठ ने पति को अगस्त 2024 तक पत्नी के लिए व्यक्तिगत उपयोग हेतु एक दोपहिया वाहन खरीदने का निर्देश दिया था।

बच्चों और पिता के बीच संबंध सुधारने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने महिला को निर्देश दिया कि वह बच्चों और उनके पिता के बीच संबंध सुधारने में सहयोग करे। इसके तहत बच्चों की पिता से समय-समय पर मुलाकात सुनिश्चित की जाए और छुट्टियों में उनके साथ समय बिताने की अनुमति दी जाए। पीठ ने दंपति द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ दायर क्रॉस-एफआईआर और अन्य मामलों को भी खारिज कर दिया।

आपको बता दगें कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 142 के तहत किए गए व्यापक हस्तक्षेप का एक और उदाहरण है। इसमें न केवल वैवाहिक विवाद को हल किया गया बल्कि बच्चों के अधिकार और उनके भविष्य की भी रक्षा की गई।

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