हिमाचल हाई कोर्ट: राजन सुशांत और बेटे धैर्य के खिलाफ अवमानना आरोप तय, जानें कोर्ट ने क्यों लिया फैसला
Himachal Pradesh News: हिमाचल हाई कोर्ट ने पूर्व लोकसभा सांसद राजन सुशांत और उनके बेटे धैर्य सुशांत के खिलाफ आपराधिक अवमानना के आरोप तय करने का फैसला लिया। यह मामला 11 फरवरी को हाई कोर्ट परिसर से फेसबुक लाइव के दौरान न्यायपालिका की छवि धूमिल करने से जुड़ा है। कोर्ट ने दोनों की माफी को खारिज कर दिया। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। दोनों को 16 जुलाई को कोर्ट में पेश होने को कहा गया।
माफी पर कोर्ट का सख्त रुख
हिमाचल हाई कोर्ट ने राजन और धैर्य की माफी को अस्वीकार करते हुए कहा कि यह वास्तविक पश्चाताप से रहित है। कोर्ट के अनुसार, माफी जल्दी और स्पष्ट होनी चाहिए। इस मामले में माफी को बचाव का हथियार माना गया। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसी माफी स्वीकार नहीं की जा सकती। दोनों पर कोर्ट की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप है। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया।
11 फरवरी की घटना का विवरण
11 फरवरी को राजन सुशांत और धैर्य ने कथित तौर पर फेसबुक लाइव के जरिए हिमाचल हाई कोर्ट की छवि को नुकसान पहुंचाया। कोर्ट ने इसे आपराधिक अवमानना माना। 3 मार्च को स्वत: संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने दोनों को नोटिस जारी किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने आरोप तय करने का फैसला लिया। यह घटना न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाती है।
कोर्ट का स्पष्ट संदेश
हिमाचल हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि न्यायालय का अपमान करने वालों को माफी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कोर्ट ने माफी को “कागजी” करार दिया। दोनों प्रतिवादियों को 16 जुलाई को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया गया। यह फैसला न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हिमाचल हाई कोर्ट की वेबसाइट पर और जानकारी उपलब्ध है।


