कर्नाटक हाई कोर्ट: तलाक के बाद 2 करोड़ की एलिमनी, फिर बच्चों को होटल में छोड़कर फरार हुई मां
Karnataka News: कर्नाटक हाई कोर्ट में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया, जहां कर्नाटक हाई कोर्ट ने तलाक के बाद एक महिला को 2 करोड़ रुपये और 150 ग्राम सोने की एलिमनी दी। इसके बावजूद, महिला ने अपने बच्चों की देखभाल में लापरवाही बरती। उसने बच्चों को लेकर दुबई यात्रा की और बेंगलुरु लौटने पर उन्हें एक होटल में अकेला छोड़ दिया। इस मामले ने बच्चों की भलाई और माता-पिता की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पिता की मार्मिक अपील और बच्चों की इच्छा ने कोर्ट को फैसला लेने के लिए मजबूर किया।
बच्चों की अनदेखी और मां की लापरवाही
2023 में महिला बेंगलुरु लौटी और अपने बच्चों को एक होटल में छोड़कर चली गई। पिता को रात 2 बजे एक अजनबी का फोन आया, जिसमें बताया गया कि उनका 7 साल का बेटा सड़क पर भटक रहा था, उसके पास सोना और पैसे से भरा बैग था। पिता ने तुरंत चिकपेट पुलिस स्टेशन से संपर्क किया और बच्चे को सुरक्षित लिया। कोर्ट में पिता ने बताया कि उनकी पूर्व पत्नी ने बच्चों को दो साल तक स्कूल नहीं भेजा और न ही उन्हें पिता से मिलने दिया। इस लापरवाही ने कर्नाटक हाई कोर्ट को बच्चों की भलाई पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।
कोर्ट में पिता की आपबीती
पिता के वकील ने कर्नाटक हाई कोर्ट में बताया कि 2022 में हुए तलाक समझौते में महिला को 2 करोड़ रुपये और 150 ग्राम सोना दिया गया। इसके बावजूद, उसने बच्चों के अधिकारों का हनन किया। वकील ने कहा:
- मां ने बच्चों को शिक्षा से वंचित रखा।
- बच्चों को पिता से मिलने से रोका गया।
- दुबई यात्रा के बाद बच्चों को होटल में अकेला छोड़ दिया गया।
वकील ने कोर्ट को बताया कि 7 नवंबर 2023 को एक अज्ञात कॉलर ने धमकी दी कि अगर टिकट की व्यवस्था नहीं की गई, तो बच्चे पाकिस्तान ले जाए जाएंगे। इस घटना ने पिता को गहरे सदमे में डाल दिया।
बच्चों की इच्छा और कोर्ट का फैसला
कर्नाटक हाई कोर्ट ने बच्चों की भलाई को सर्वोपरि मानते हुए उनकी इच्छा सुनी। बच्चों ने स्पष्ट कहा कि वे अपनी मां से डरते हैं और पिता के साथ रहना चाहते हैं। कोर्ट ने पिता को बच्चों की कस्टडी सौंप दी, लेकिन मां को मुलाकात का अधिकार दिया। पिता ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। यह फैसला बच्चों के भविष्य और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कोर्ट के इस फैसले ने माता-पिता की जिम्मेदारियों पर एक बार फिर ध्यान आकर्षित किया है।
सामाजिक और कानूनी सवाल
यह मामला न केवल व्यक्तिगत त्रासदी को दर्शाता है, बल्कि तलाक और एलिमनी से जुड़े कानूनी ढांचे पर भी सवाल उठाता है। बच्चों की उपेक्षा और माता-पिता के बीच विश्वास की कमी ने इस मामले को और जटिल बनाया। कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला उन परिवारों के लिए एक सबक है, जो तलाक के बाद बच्चों की जिम्मेदारी को लेकर लापरवाही बरतते हैं। अधिक जानकारी के लिए कर्नाटक हाई कोर्ट की वेबसाइट देखें।