احمد فراز : جو لکھا تپاکِ جاں سے لکھا
#AhmadFaraz #BirthAnniversary http://thewireurdu.com/87273/remembering-ahmad-faraz/
احمد فراز : جو لکھا تپاکِ جاں سے لکھا
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"कुछ तो मेरे पिन्दार-ए-मोहब्बत का भरम रख
तू भी तो कभी मुझको मनाने के लिए आ"
~ अहमद फ़राज़
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"किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तू मुझ से ख़फ़ा है, तो ज़माने के लिए आ"
~ अहमद फ़राज़
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"रंजिश ही सही, दिल ही दुखाने के लिए आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ"
~ अहमद फ़राज़
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"ख़्वाब मरते नहीं
ख़्वाब दिल हैं न आँखें न साँसें कि जो
रेज़ा-रेज़ा हुए तो बिखर जाएँगे
जिस्म की मौत से ये भी मर जाएँगे
ख़्वाब मरते नहीं
ख़्वाब तो रोशनी हैं नवा हैं हवा हैं
जो काले पहाड़ों से रुकते नहीं
ज़ुल्म के दोज़खों से भी फुकते नहीं
रोशनी और नवा के अलम
मक़्तलों में पहुँचकर भी झुकते नहीं
ख़्वाब तो हर्फ़ हैं
ख़्वाब तो नूर हैं
ख़्वाब सुक़रात हैं
ख़्वाब मंसूर हैं"
~ अहमद फ़राज़
"अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह
आसमानों से नए लोग उतारे जाएँ"
~ अहमद फ़राज़
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