जब भय हृदय को जकड़ लेता है
कभी-कभी अंधेरा गहरा छा जाता है। अदृश्य परछाइयाँ संदेह की फुसफुसाहट करती हैं। जहाँ कभी सुगम मार्ग थे, वहाँ अब बाधाएँ खड़ी हो जाती हैं। नींद में खतरे के बेचैन सपने आते हैं। बजरंग बाण —हनुमान की वज्र प्रार्थना—ऐसे क्षणों में तूफ़ानी बादलों को चीरती हुई बिजली की तरह चमक उठती है।
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