मैं किसी और का नहीं हूं फिलहाल ,
कोई तो मेरी हो जाओ 😎
मैं किसी और का नहीं हूं फिलहाल ,
कोई तो मेरी हो जाओ 😎
लोग खुद को सेंसिटिव कहते हैं मुझे ये बुरा लग गया वो बुरा लग गया
पर ये सेंसिटिविटी नही
ब्लकि चिंता जब दूसरों की हो,उनको कुछ बुरा ना लग जाए
यूँ उनके इमोशनस को संभाला जाए जैसे कोई ओस की बूँद संभालता है
दोस्त बनकर भी नहीं साथ निभाने वाला
वही अंदाज है जालिम का जमाने वाला
अहमद फ़राज़
जरूरत सज़दा करवाती है...,
इबादत कौन करता है...??