भारतीयों को हांग कांग के न्यायालय का फैसला पढना चाहिए. जिस देश में न्यायालय सत्ता की चाटुकारिता में न लगा हो वहां फैसले कैसे होते हैं.
संसद में गप्पू जी के बोल सुन कर हमेशा आदम गोंडवी की ये कविता याद आती है.
ये अमीरों से हमारी फ़ैसलाकुन जंग थी,
फिर कहाँ से बीच में मस्जिद औ' मंदर आ गए।
जिनके चेह्रे पर लिखी थी जेल की ऊँची फ़सील,
रामनामी ओढ़कर संसद के अन्दर आ गए।
Modi's first toot on #mastodon
"Mastodoston... "