कभी हमसे तुमसे भी राह थी
कभी हम भी तुम भी थे आशना
तुम्हे याद हो के न याद हो
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| @Viveklectic |
मैने सदा चाहा यही दामन बचा लूं हसीनो से में
तेरी कसम ख़्वाबों में भी बचता फिरा नाज़नीनो से में
तौबा मगर मिल गयी तुझसे नज़र मिल गया दर्द-ए-जिगर
सुन ज़रा ओ बेख़बर
ज़रा सा हँस के जो देखा तूने मैं तेरा बिस्मिल हो गया
गुलाबी आँखे जो तेरी देखी.....
ढूंढा है ढूँढा है तुझे
आकाश उपर तले
शायद किसी बद्री में, लिपटी हुई तू मिले
ढूँढा है ढूँढा है तुझे
आकाश उपर तले
शायद किसी नदिया पे चलता हुआ तू मिले
रोशनी से भरे भरे, भरे भरे नैना तेरे
ना कुछ तेरा ना कुछ मेरा
ये जग जोगी वाला फेरा
राजा हो या रंक सभी का
अंत एक सा होई
सुख के सब साथी
दुःख में ना कोई
मेरे राम, मेरे राम
तेरा नाम एक सांचा
दूजा न कोई
रंजिश ही सही
दिल ही दुखने के लिये आ
आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ
मैं हूँ पानी के बुलबुले जैसा
तुझे सोचूं तो फूट जाता हूँ
तू किसी रेल सी गुज़रती है
में किसी पुल सा थरथराता हूँ
Bhool Bhulaiya ( Maze ) , Lucknow . It Was Built by Nawab of Awadh , Asaf-ud-Daula, In 1784 A.D .
Urad Ki Daal and Rice Husk Were Used as Raw Material For Construction