अवैध धर्मांतरण: छांगुर बाबा के काले साम्राज्य का पर्दाफाश, 1500 महिलाओं समेत 4000 हिंदुओं का करवा चुका है धर्म परिवर्तन

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में अवैध धर्मांतरण का एक बड़ा रैकेट सामने आया है। यूपी एटीएस ने बलरामपुर के जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा को गिरफ्तार किया है। वह 3000 से 4000 हिंदुओं को निशाना बनाकर धर्म परिवर्तन करवाने में शामिल था। इनमें 1500 से अधिक महिलाएं थीं। उसका नेटवर्क महाराष्ट्र और दुबई तक फैला था। एटीएस अब इस रैकेट की गहराई तक जांच कर रही है।

रैकेट का खुलासा और गिरफ्तारी

यूपी एसटीएफ को अवैध धर्मांतरण के पुख्ता सबूत मिले थे। इसके बाद जांच का जिम्मा एटीएस को सौंपा गया। छांगुर बाबा और उसकी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को लखनऊ के एक होटल से गिरफ्तार किया गया। कोर्ट ने दोनों को सात दिन की रिमांड पर भेजा है। रिमांड के दौरान एटीएस उनके नेटवर्क, फंडिंग और सहयोगियों की जानकारी जुटाएगी। कई पीड़ित डर की वजह से बोलने को तैयार नहीं हैं।

विदेशी फंडिंग और नेटवर्क

छांगुर बाबा का रैकेट बलरामपुर से शुरू होकर महाराष्ट्र और दुबई तक पहुंचा था। वह मुंबई में एक दरगाह के पास अंगूठी बेचता था। धीरे-धीरे वह अंतरराष्ट्रीय धर्मांतरण सिंडिकेट का हिस्सा बन गया। खाड़ी देशों की कई संस्थाओं से उसकी सांठगांठ थी। वह गरीबों, विधवाओं और कमजोर वर्गों को लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करता था। उसने बलरामपुर में इस्लामिक दावा केंद्र बनाने की साजिश रची थी।

उर्स और अवैध गतिविधियां

छांगुर बाबा बलरामपुर के मधपुर गांव में चांद औलिया दरगाह पर हर साल उर्स आयोजित करता था। इसमें विदेशी मेहमान भी शामिल होते थे। जांच में पता चला कि उसने नीतू और उसके परिवार का दुबई में धर्म परिवर्तन करवाया था। उनके पासपोर्ट और दस्तावेज अभी भी हिंदू नामों से हैं। एटीएस अब इन दस्तावेजों और विदेशी फंडिंग की जांच कर रही है।

प्रशासन और पुलिस पर सवाल

छांगुर बाबा ने बलरामपुर और आसपास के जिलों में कई अधिकारियों को रिश्वत देकर अपने पक्ष में कर लिया था। उसके विरोधियों पर तुरंत मुकदमे दर्ज हो जाते थे। उसके समर्थक विरोध करने वालों के साथ मारपीट करते थे। आजमगढ़ में उसके रिश्तेदारों पर दो साल पहले भी अवैध धर्मांतरण का मुकदमा दर्ज हुआ था। एटीएस इस रैकेट के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।

बुलडोजर कार्रवाई और संपत्ति

छांगुर बाबा की बलरामपुर में बनी आलीशान कोठी पर प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया। यह कोठी सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई थी। जांच में पता चला कि उसने विदेशी फंडिंग से 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति बनाई। उसके सहयोगी नवीन रोहरा ने भी बलरामपुर में कई जमीनें खरीदीं। एटीएस अब इन संपत्तियों और फंडिंग के स्रोतों की जांच कर रही है।

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