प्राकृतिक आपदा: आपदा के नौवें दिन थुनाग के इन गांवों में पहुंचे ITBP के जवान, राशन, मेडिकल और हाईजीन किट बांटे

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के थुनाग क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। ITBP के 26 जवान दो टीमों में बंटकर झुगांध और ढनियार गांवों में राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं। नौ दिनों से कटे इन गांवों में राशन, मेडिकल और हाइजीन किट बांटे गए। सेना के हेलिकॉप्टर से भी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। आपदा से प्रभावित लोगों के लिए यह मदद उम्मीद की किरण है।

ITBP की राहत टीमें

ITBP की दो टीमें मंगलवार को थुनाग की पंचायत रोड़ के झुगांध और ढनियार गांवों में पहुंचीं। इन जवानों ने राशन, मेडिकल और हाइजीन किट बांटे। उनके साथ राजस्व विभाग के कर्मचारी और पोर्टर भी थे। नौ दिनों से अलग-थलग पड़े इन गांवों के लिए यह मदद जीवन रेखा बनकर आई। जवान कठिन परिस्थितियों में भी लोगों तक जरूरी सामान पहुंचा रहे हैं।

प्रशासन का राहत कार्य

प्रशासन ने धार जरोल पंचायत में प्रभावितों को राहत सामग्री बांटी। सोमवार को क्षतिग्रस्त मकानों वाले परिवारों को मदद दी गई। छतरी और बरयोगी पंचायतों में भी राहत पहुंचाई गई। करसोग में 30 जून की रात को लापता ललित कुमार का शव आठ दिन बाद सतलुज नदी से मिला। प्रशासन और सेना की टीमें प्रभावितों के साथ खड़ी हैं। यह प्रयास लोगों को संबल दे रहा है।

लापता लोगों की तलाश

थुनाग में लापता लोगों की खोज जारी है। एनडीआरएफ की टीमें सराज विधानसभा क्षेत्र के लंबाथाच से पांडवशिला तक सर्च अभियान चला रही हैं। मंगलवार को थुनाग से पटिकरी तक खोजबीन की गई। एसडीआरएफ की टीमें भी इस काम में जुटी हैं। आपदा ने कई परिवारों को बिछड़ने पर मजबूर किया है। राहत टीमें हर संभव कोशिश कर रही हैं ताकि लापता लोग मिल सकें।

बुनियादी सुविधाओं का संकट

मंडी जिले में आपदा ने 291 पेयजल योजनाओं को ठप कर दिया। 151 सड़कें बंद हैं और 140 बिजली ट्रांसफार्मर खराब हैं। जंजैहली जैसे कस्बों में बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई। लोग अंधेरे में रातें बिता रहे हैं। यह स्थिति प्रभावितों की मुश्किलें बढ़ा रही है। प्रशासन इन सुविधाओं को जल्द बहाल करने की कोशिश में है, लेकिन चुनौतियां कम नहीं हैं।

भारी नुकसान का आंकड़ा

जिला प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक, आपदा ने 466 घरों और 457 पशुशालाओं को नुकसान पहुंचाया। 92 दुकानें तबाह हुईं और 466 मवेशी मारे गए। सेना ने 222 लोगों को सुरक्षित निकाला, लेकिन 27 लोग अभी भी लापता हैं। 15 शव बरामद हो चुके हैं। यह आंकड़े आपदा की भयावहता को दर्शाते हैं। प्रभावित परिवारों के लिए यह समय बेहद कठिन है।

हेलिकॉप्टर से राहत सामग्री

सेना के हेलिकॉप्टर लगातार थुनाग और जंजैहली में राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं। नौवें दिन भी यह सिलसिला जारी रहा। राशन किट, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान हवाई मार्ग से भेजा जा रहा है। कटे हुए इलाकों में यह मदद प्रभावितों के लिए जीवन रेखा बनी हुई है। सेना और प्रशासन की यह कोशिश लोगों को हौसला दे रही है।

प्रभावितों की पीड़ा

आपदा ने थुनाग के लोगों को गहरे जख्म दिए हैं। घर, दुकानें और आजीविका सब कुछ तबाह हो चुका है। कई परिवार अपने लापता सदस्यों की खोज में हैं। बुनियादी सुविधाओं की कमी ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। फिर भी, ITBP और प्रशासन की कोशिशें प्रभावितों को राहत और उम्मीद दे रही हैं। लोग इस संकट में एक-दूसरे का सहारा बन रहे हैं।

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