आवारा पशु: हिमाचल हाईकोर्ट ने दिए धर्मशाला को पशु मुक्त करने के आदेश, गायों को लुथान किया जाएगा स्थानांतरित

Himachal News: हिमाचल हाईकोर्ट ने धर्मशाला को आवारा पशु मुक्त बनाने के लिए 31 जुलाई की समयसीमा तय की है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधवालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश जारी किया। नगर निगम, धर्मशाला को पशुओं को कांगड़ा के लुथान गौ अभ्यारण्य में स्थानांतरित करने को कहा गया। कोर्ट ने आयुक्त से हलफनामा मांगा है, जिसमें शेष पशुओं की संख्या का विवरण देना होगा।

गौ अभ्यारण्य में प्रगति

लुथान में 214 बीघा भूमि पर गौ अभ्यारण्य स्थापित किया गया है। इसके निर्माण के लिए 4.5 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं, जिसमें से 68 लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। नगर निगम ने फरवरी से अप्रैल 2025 तक 99 पशुओं को अभ्यारण्य में स्थानांतरित किया और 68 को पकड़ा। कोर्ट ने इस प्रगति को अपर्याप्त माना और स्पष्ट आंकड़ों की मांग की।

कोर्ट की सख्ती

हाईकोर्ट ने नगर निगम की रिपोर्ट में अस्पष्टता पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने पूछा कि धर्मशाला में अभी कितने आवारा पशु बचे हैं। अगली सुनवाई से पहले आयुक्त को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया। कोर्ट ने 31 दिसंबर 2024 के आदेश के कार्यान्वयन पर जोर दिया, जिसमें धर्मशाला को आदर्श शहर बनाने की बात कही गई थी।

चरणबद्ध कार्ययोजना

कोर्ट ने नगर निगम को हर महीने 30 आवारा पशु उठाकर लुथान अभ्यारण्य में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। यह कदम शहर को सुरक्षित और स्वच्छ बनाने के लिए उठाया गया है। स्थानीय लोगों ने इस समस्या से राहत की उम्मीद जताई है। कोर्ट का यह आदेश धर्मशाला के नागरिकों के लिए बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

जनहित याचिका से शुरुआत

यह मामला जनहित याचिकाओं के आधार पर शुरू हुआ, जिसमें धर्मशाला की सड़कों पर आवारा पशु की समस्या को उठाया गया। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया और राज्य सरकार व नगर निगम को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। इस आदेश से न केवल धर्मशाला, बल्कि अन्य शहरों में भी ऐसी समस्याओं पर ध्यान देने की प्रेरणा मिलेगी।

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