इजरायल-ईरान युद्ध: अराक भारी जल रिएक्टर पर इजरायल का हमला, IAEA ने जताई चिंता

Middle East News: इजरायल ने गुरुवार को ईरान के अराक भारी जल रिएक्टर पर हवाई हमला किया। इजरायल-ईरान युद्ध में यह एक बड़ा घटनाक्रम है। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने बताया कि हमले से पहले रिएक्टर को खाली कर लिया गया था। अधिकारियों ने दावा किया कि रेडिएशन का कोई खतरा नहीं है। इजरायल ने सुबह ही सोशल मीडिया पर चेतावनी दी थी कि वह इस सुविधा को निशाना बनाएगा।

हमले का उद्देश्य

इजरायली सेना ने कहा कि हमले का मकसद रिएक्टर के प्लूटोनियम उत्पादन को रोकना था। अराक रिएक्टर तेहरान से 250 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह भारी जल रिएक्टर परमाणु रिएक्टरों को ठंडा करता है और प्लूटोनियम पैदा करता है, जिसका उपयोग संभावित रूप से परमाणु हथियारों में हो सकता है। इजरायल ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा माना।

IAEA की प्रतिक्रिया

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने इजरायल से परमाणु सुविधाओं पर हमले न करने की अपील की थी। एजेंसी के निरीक्षकों ने 14 मई को आखिरी बार अराक का दौरा किया था। IAEA ने चेतावनी दी कि ऐसे हमले क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल सकते हैं। ईरान ने हमले की शिकायत IAEA से की, इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।

ईरान का जवाबी हमला

इजरायल-ईरान युद्ध में ईरान ने भी पलटवार किया। ईरानी मिसाइलों ने इजरायल के दक्षिणी शहर बीर शेबा में सोरोका मेडिकल सेंटर को निशाना बनाया। अस्पताल को भारी नुकसान हुआ। अधिकारियों ने लोगों से अस्पताल न आने की अपील की। अस्पताल दक्षिणी इजरायल के 10 लाख लोगों को सेवाएं देता है। हमले में हताहतों की तत्काल जानकारी नहीं मिली।

मानवीय नुकसान

वाशिंगटन स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स ने बताया कि इजरायली हमलों में ईरान में 639 लोग मारे गए, जिनमें 263 नागरिक और 154 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। 1,329 लोग घायल हुए। दोनों देशों के बीच सातवें दिन भी युद्ध जारी रहा। ईरान ने इजरायल पर 400 मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिसमें 24 लोगों की मौत हुई।

क्षेत्रीय तनाव

इजरायल-ईरान युद्ध ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा दिया है। इजरायल ने नातांज और अन्य परमाणु सुविधाओं पर भी हमले किए। ईरान ने इसे आक्रामकता करार दिया। वैश्विक समुदाय ने युद्ध को रोकने की अपील की, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं हैं।

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