आंसू की कीमत
बहे वो ऐसे,
जैसे हो कोई ज़हर,
किनारे से निकले,
बहते नदी जैसे।
छू जाए रूह को,
जिसे कोई सींचे,
बहे वो ऐसे,
जैसे हो रोज़ की बात।
पानी है वो,
पर है उसका मान,
सच कहते हैं संसार,
होते हैं सबके दाम।
नहीं था वो कोई अमोल,
पर किनारे से निकले,
हो गया वो अनमोल,
मान लो ये बात —
आंसू है रत्नमोल।
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